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Monday, 16 March, 2026
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वर्ष 2035 तक 97,000 मेगावाट ताप बिजली क्षमता जोड़ने की योजना : सरकार

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नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) राज्यसभा में सोमवार ने कहा कि सरकार ने कहा कि वर्ष 2034–35 तक अनुमानित 3,07,000 मेगावाट की ज़रूरत को पूरा करने के लिए वह 97,000 मेगावाट कोयला और लिग्नाइट-आधारित ताप ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना बना रही है।

उच्च सदन में बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, कई पहल पहले ही की जा चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2034–35 तक अनुमानित थर्मल (कोयला और लिग्नाइट) क्षमता की ज़रूरत लगभग 3,07,000 मेगावाट होने का अनुमान है, और इस ज़रूरत को पूरा करने के लिए, बिजली मंत्रालय ने अतिरिक्त 97,000 मेगावाट क्षमता स्थापित करने की योजना बनाई है।

मंत्री ने कहा कि अप्रैल 2023 से 31 जनवरी, 2026 तक लगभग 18,160 मेगावाट की ताप बिजली क्षमता पहले ही चालू की जा चुकी है। इसके अलावा, 38,745 मेगावाट की क्षमता, जिसमें 4,845 मेगावाट के संकटग्रस्त ताप बिजली परियोजना शामिल हैं, वर्तमान में निर्माणाधीन है।

इसके अलावा, 22,920 मेगावाट के ठेके दिए जा चुके हैं और उनका निर्माण होना बाकी है।

इसके अलावा, 24,020 मेगावाट की कोयला और लिग्नाइट-आधारित क्षमता की पहचान की गई है, जो देश में योजना के विभिन्न चरणों में है।

जनवरी 2026 तक देश की कुल स्थापित उत्पादन क्षमता 520.51 गीगावाट थी।

राष्ट्रीय बिजली योजना (एनईपी) के अनुसार, वर्ष 2031-32 में स्थापित उत्पादन क्षमता 874 गीगावाट होने की संभावना है।

नाइक ने कहा कि 12,723.50 मेगावाट के जलविद्युत परियोजना निर्माणाधीन हैं।

इसके अलावा, 4,274 मेगावाट के जलविद्युत परियोजना योजना के विभिन्न चरणों में हैं और उन्हें वर्ष 2031-32 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने सदन को यह भी बताया कि 6,600 मेगावाट की परमाणु क्षमता का निर्माण कार्य चल रहा है और इसे वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा 7,000 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता योजना और मंज़ूरी के अलग-अलग चरणों में है।

भाषा राजेश राजेश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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