नयी दिल्ली, तीन जनवरी (भाषा) पशु अधिकार संगठन ‘पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स’ (पेटा) इंडिया ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर जानवरों को आजीवन कैद में रखने के प्रस्तावों का विरोध किया है और सरकार से आवारा कुत्तों और मवेशियों की आबादी के प्रबंधन के लिए मानवीय और विज्ञान-आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया है।
संगठन ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को लिखे अपने पत्र में ‘पेटा इंडिया’ ने दो दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं – भारत में सामुदायिक कुत्तों के मानवीय प्रबंधन के लिए रोडमैप और भारत में आवारा पशुओं के मानवीय प्रबंधन के लिए रोडमैप – जो अहिंसा और वसुधैव कुटुम्बकम् के सिद्धांतों पर आधारित हैं।
‘पेटा इंडिया’ ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड की एक मानक संचालन प्रक्रिया को लेकर भी चिंता जताई है, जिसमें सामुदायिक कुत्तों को लगभग 20 वर्ग फुट प्रति जानवर के बाड़े में जीवनभर के लिए बंद रखने का प्रस्ताव है।
संगठन द्वारा उद्धृत पशु कल्याण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर जानवरों को कैद में रखने से पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम, 2023 से सार्वजनिक संसाधन हट जाएंगे, जो नसबंदी और रेबीज टीकाकरण पर केंद्रित हैं।
‘पेटा इंडिया’ के वरिष्ठ नीति एवं कानूनी सलाहकार विक्रम चंद्रवंशी ने कहा, ‘‘
अंतिम संस्कार के लिए चिता के आकार के छोटे से स्थान में कुत्तों को जीवनभर के लिए कैद रखना वैज्ञानिक जनसंख्या प्रबंधन नहीं है। यह किसी को इस तरह से कैद में रखना है, जैसे मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदी को रखा जाता है।’’
आवारा पशुओं के मुद्दे पर, पेटा इंडिया ने कहा कि बाड़े में बंद रखने से डेयरी फार्म द्वारा पशुओं को छोड़े जाने की समस्या का समाधान नहीं होता है। इसने बताया कि अक्सर बछड़ों को जन्म के समय ही छोड़ दिया जाता है और दूध उत्पादन कम होने पर मादा पशुओं को त्याग दिया जाता है।
इसने यह भी कहा कि भीड़भाड़ वाली और संसाधनों की कमी से जूझ रही गौशालाएं इस बढ़ती संख्या को संभाल नहीं सकतीं।
इसने कहा कि अवैध डेयरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, पशुओं को छोड़ने पर जुर्माना लगाने, पशुओं की उत्पत्ति का पता लगाना और पौधों पर आधारित दूध के विकल्पों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का आह्वान किया गया है।
‘पेटा इंडिया’ ने कहा कि उसने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर उनसे सिफारिशों को लागू करने का आग्रह किया है।
भाषा
देवेंद्र दिलीप
दिलीप
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