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Thursday, 25 April, 2024
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सैनिटरी नैपकिन, मेंस्ट्रुअल कप के साथ-साथ पीरियड चार्ट भी हुआ उन दिनों में जरूरी

सुनील बताते हैं कि जब उन्होंने यह कार्यक्रम शुरू किया था और महिलाएं चार्ट घरों में लगाती थीं तो कई बार घर के ही सदस्य इन्हें फाड़ देते थे और पीरियड चार्ट को ऐसे घर पर लगाना सही नहीं मानते थे.

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नई दिल्ली: “जब मेरी बेटी बड़ी होने लगी तो उसे एक कम्फर्टेबल माहौल देने के लिए मैंने पीरियड्स के बारे में पढ़ना और जानना शुरू किया, तब मुझे एक रिपोर्ट से पता चला की आजकल लड़कियों को बहुत कम उम्र में ही पीरियड्स शुरू हो जाते हैं, और उसके बाद जब मैंने अपनी पत्नी से इस बारे में बात किया तो मुझे पता चला कि पीरियड्स में इर्रेगुलरिटी भी बड़ी समस्या बन चुकी है.”

हरियाणा के जींद ज़िले के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान महिलाओं बेटियों से जुड़े कई राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय अभियान चला चुके हैं और इस बार भी उन्होंने महिलाओं बेटियों की बड़ी समस्या मेंस्ट्रुअल साइकिल को बड़ी संजीदगी से उठाया है और देशभर में अभियान बनाया है.

बता दें कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सेल्फी विद डॉटर जैसे अभियानों का आगाज कर चुके सुनील पिछले दिनों महिला को जोड़ कर दी जाने वाली गालियों के खिलाफ अभियान चलाया, जिसके बाद उन्होंने एकबार फिर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी. जागलान ने ये अभियान तब शुरू किया था जब “व्हॉट ए स्टूपिड सन ऑफ ए बिच “ व्हाइट हाऊस में ये शब्द अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एक पत्रकार को प्रैस कॉन्फ़्रेंस में कहे थे.

सुनील बताते हैं कि हम पुरुष महिलाओं को मेंस्ट्रुअल साइकिल के दौरान होने वाली परेशानी को लेकर असंवेदनशील रहे हैं. वह बताते हैं, “बेटी को एक कंफरटेबल माहौल देने के लिए मैंने पहले अपनी पत्नी से बात की जिसके बाद मुझे इसके बारे में कई और बातें पता चलीं.”

“पत्नी से पीरियड्स इर्रेगुलरिटी के बारे में पता चला तो मैंने उन्हें अपनी डेट्स को एक जगह नोट करने का आईडिया दिया. फिर कुछ टाइम बाद मैंने एक चार्ट डिज़ाइन किया जिसमें वो अपनी पीरियड्स की डेट को लिख कर रख सके. लेकिन जब मुझे पता चला कि पीरियड्स में अनियमितता तो एक बड़ी परेशानी बन चुकी है तब मुझे ‘पीरियड चार्ट’ बनाने और इसको सभी तक पहुंचाने का आईडिया आया.”

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पीरियड चार्ट का आईडिया सुनील जागलान के दिमाग की उपज है, जो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं और सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के निदेशक भी हैं. इस प्रोग्राम का नाम 2015 के एक अभियान के नाम पर रखा गया था, जहां उन्होंने पिताओं को अपनी बेटियों के साथ सेल्फी लेकर भेजने के लिए प्रेरित किया था.

दिप्रिंट से बात-चीत में सुनील जागलान ने बताया कि ‘पीरियड चार्ट आईडिया की शुरुआत लगभग दो साल पहले की थी और शुरुआत में ये चार्ट केवल हरियाणा के 60 से 70 घरों में ही लगाया गया था लेकिन अब हम बीस हज़ार से भी ज्यादा चार्ट छपवा चुके हैं और ये अभियान हरियाणा के साथ साथ बिहार, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश में चलाया जा रहा है. हमारे इस कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ती ही जा रही है.”

पीरियड चार्ट एक ऐसा कैलेंडर टाइप चार्ट है जिस पर घर की महिलाएं अपना नाम, महीना एवं तारीख लिखकर अपने पीरियड की डेट याद रख सकती हैं और साथ ही इससे पीरियड के डेट में हो रहे दिनों के बदलाव का भी पता चलता रहता है.

पीरियड चार्ट | फोटो: विशेष व्यवस्था से

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महिलाओं के साथ पुरुषों को भी करना है जागरुक

सुनील जागलान और उनकी टीम ने मिलकर हिमाचल की ऋषिदा को पीरियड चार्ट का ब्रैंड एम्बेस्डर भी बनाया है जिसकी फोटो चार्ट पर लगी हुई है. इसके साथ ही चार्ट के ऊपर हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं ईसाई चारों धर्मों की प्रमुख महिलाओं की फोटो भी लगी हुई हैं जिसमे माता सीता, हज़रत ख़दीजा, मदर मरियम एवं माता तृप्ता की फोटो शामिल है.

अपनी दसवीं की पढ़ाई के साथ लोगों में जागरूकता ला रहीं हिमाचल की चौदह वर्षीय ऋषिदा जो पीरियड चार्ट की ब्रैड अम्बेस्डर बन चुकी हैं ने दिप्रिंट से बात-चीत में बताया, ‘इस प्रोग्राम और चार्ट को घर पर लगाने का मकसद सिर्फ औरतों को जागरूक करना या फिर सिर्फ पीरियड की तारीख याद रखना नहीं है, इसका एक बड़ा मकसद ये भी है कि इससे घर के पुरुषों को भी पता चलता है कि घर की महिला को पीरियड है और वो उनकी मदद कर सकते है, एवं इस बारे में खुलकर बात कर सकते है.’

ऋषिदा आगे कहती हैं, ‘आज भी गांवों में पीरियड के बारे में खुलकर बात नहीं की जाती है, पीरियड को अपवित्र माना जाता है, पीरियड के दौरान मंदिर जाना या अचार छूना बुरा होता है तो हम इस चार्ट को घरो की दीवारों पर लगाके पीरियड पर बात करना नॉर्मल बनाना चाहते है. महिलाओं के साथ साथ पुरुषों को भी इसके बारे में जागरुक करना चाहते है.’

पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने में केवल गांव के लोग ही नहीं बल्कि आज भी कई शहरों के घरों में इसके बारे में बात नहीं होती है. इसे बारे में ऋषिदा बताती हैं कि जब उन्होंने अपने गुरुग्राम की एक कॉलोनी में पीरियड चार्ट बांटना शुरू किया तो कुछ औरतों ने इसे अपने अलमारी के अंदर लगाया ताकि यह घर के पुरुषों और अन्य लोगो को न दिखे.

ऋषिदा कहती हैं उन्हें इसी तरह की सोच को ख़त्म करना है और पीरियड्स एक नॉर्मल फेनोमेनन है, यही जागरूकता शहरों और गांवों में लानी है.

पीरियड चार्ट है मददगार

दिप्रिंट से टेलीफोन के माध्यम से बात-चीत में हरियाणा के कंवारी गांव की 23 वर्षीय सुप्रिया बताती हैं कि उन्हें इस पीरियड चार्ट से काफी मदद मिलती है. पीरियड चार्ट की वजह से उन्हें अपनी पीरियड में हो रही इर्रेगुलरिटी आसानी से पता चल जाता है और जब वो डॉक्टर के पास जाती हैं तो उन्हें तारीख बताने में भी आसानी होती है.

नेशनल कबड्डी प्लेयर एवं ग्रेजुएशन कर चुकी सुप्रिया कहती है, “इस चार्ट के घर में लगे रहने से घर के मर्दों को भी पता चल जाता है कि इसके पीरियड चल रहे है और वो हमें कोई काम नहीं बताते है. साथ ही हमें जरुरत की सामान भी लाकर दे देते है.”

सुप्रिया लगभग दो साल पहले इस कैम्पेन से जुड़ी थी, जब सुनील अपनी टीम के साथ उनके गांव में आये थे. अब वो स्वयं भी इस मुहीम में जुड़ चुकी हैं और वो भी महिलाओं को जागरूक करने का काम कर रही हैं.

कई बार फाड़े गए चार्ट

सुनील बताते है कि जब उन्होंने यह कार्यक्रम शुरू किया था और महिलाएं चार्ट ले जाकर घरों में लगाती थीं तो कई बार घर के ही सदस्य इन्हें फाड़ देते थे और पीरियड चार्ट को ऐसे घर पर लगाना सही नहीं मानते थे.

उन्होंने कहा, “गांव के लोग कई बार हम पर यह आरोप लगाते थे की हम उनकी महिलाओं को ये गलत चीज़े बता रहे है, गलत पट्टी पढ़ा रहे है. लेकिन हमने अपना काम नहीं रोका और आगे बढ़ते चले गए.”

सुप्रिया बताती है, जब पहली बार उन्होंने अपने घर में चार्ट लगाया था तो इसका विरोध हुआ उनके घर वालों ने कहा कि बाहर से लोग घर आएंगे तो सब चार्ट देखेंगे जो अच्छा नहीं लगता है. ‘लेकिन जब उन्हें समझाया गया इसका फायदा बताया गया और हमने बार बार चार्ट लगाया तो अब वो मान गए है.’

महिलाओं द्वारा अपने घरों के दीवारों पर पीरियड चार्ट लगाए गए | फोटो: विशेष व्यवस्था से

गायनेकॉलोजिस्ट डॉ.मनन गुप्ता से अर्ली मेनोपॉज और पीरियड्स में इर्रेगुलरिटी पर बातचीत पर उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि जब चालीस साल की उम्र से पहले ही ओवरी हार्मोन्स रिलीज़ करना बंद कर देती हैं तो उसे मेनोपॉज कहा जाता है.

डॉ. गुप्ता ने बताया कि चालीस साल से पहले पीरियड्स के बंद होने से बहुत सारे शारीरिक बदलाव होते है जिनके साइड इफेक्ट्स होते है. उन्होंने कहा, ‘अर्ली मेनोपॉज से दिल की बीमारियां होती है, हड्डियां कमज़ोर हो जाती है, सेक्सुअल डिजायर खत्म हो जाते है, वजायनल डॉयनेस हो जाती जिसकी वजह से दवाईया लेनी पढ़ती है, आंखे कमज़ोर हो जाती हैं.

उन्होंने आगे बताया कि महिलाओं के पीरियड इर्रेगुलरिटी के पीछे अलग अलग तरह के कारण होते है इसलिए यदि उन्हें पीरियड से रिलेटेड कोई भी दिक्कत महसूस होती है तो उन्हें जल्द से जल्द डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

‘अब ये बन चुका है मिशन’

सुनील ने दिप्रिंट को बताया कि उनका ये विज़न अब एक मिशन बन चुका है वो अपनी टीम के साथ मिलकर महिलाओं से बात करते है और पीरियड से जुड़ी समस्याओं का पता लगाते है जिसके बाद वो डॉक्टर्स से भी कंसल्ट करते है और उसके बाद महिलाओं की मदद करते है.

जागलान अब लड़कियों के लिए घर पर चार्ट बनाने के ऑनलाइन वर्कशॉप भी आयोजित कर रहे हैं और महिलाओं की सभा आयोजित कर उन्हें मासिक धर्म और महिलाओं के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी दी जाती है साथ ही सैनिटरी नैपकिन और मेंस्ट्रुअल कप के बारे में भी जानकारी दी जाती है.

सुनील और उनकी टीम की ये पहल इतनी बड़ी हो चुकी है कि अब महिलाएं अलग अलग गावों में पीरियड्स से जुड़ी समस्याओं पर खुलकर पंचायत में बात करने के साथ-साथ मेंस्ट्रुअल लीव की भी मांग करने लगी हैं.

पूजा मेहरोत्रा के इनपुट्स के साथ.


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