scorecardresearch
Friday, 27 March, 2026
होमदेशलोगों को न्यायिक फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है : शीर्ष अदालत

लोगों को न्यायिक फैसलों की आलोचना करने का अधिकार है : शीर्ष अदालत

Text Size:

नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की पुरानी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के बारे में उसके फैसलों में की गई एक टिप्पणी हटाने की मांग की गई थी।

न्यायालय ने कहा कि लोगों को उसके निर्णयों की आलोचना करने का अधिकार है।

इस बीच, केंद्र ने न्यायालय को अवगत कराया कि उसने आठवीं कक्षा की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ संबंधी अध्याय की समीक्षा के लिए एक समिति का गठन किया है, जिसमें शीर्ष अदालत के दो पूर्व न्यायाधीश एवं एक पूर्व अटॉर्नी जनरल शामिल होंगे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ को बताया कि समिति में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल, पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा एवं वर्तमान राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी के निदेशक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनिरुद्ध बोस के साथ-साथ एक कुलपति भी शामिल हैं।

मेहता ने कहा, ‘‘हमने इस अध्याय को तैयार करने के लिए समिति गठित की है। श्री के.के. वेणुगोपाल समिति के सदस्य होंगे। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा भी इसका हिस्सा होंगी। हमने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस को भी इसमें शामिल होने का अनुरोध किया है।’’

उच्चतम न्यायालय उस याचिका की सुनवाई कर रहा था, जो एनसीईआरटी के पूर्व सदस्य पंकज पुष्कर ने दायर की थी। यह याचिका आठवीं कक्षा की एक पाठ्यपुस्तक में वर्णित एक आदेश के खास अंश के खिलाफ थी। उस आदेश में लिखा था, ‘‘हाल के निर्णय झुग्गी-झोपड़ी के निवासियों को शहर में अतिक्रमणकारी के रूप में देखने की प्रवृत्ति रखते हैं।’’

न्यायालय ने कहा कि न्यायपालिका को स्वस्थ आलोचना के प्रति अति-संवेदनशील नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही इसने याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘यह किसी निर्णय के बारे में एक दृष्टिकोण है। यह एक स्वस्थ आलोचना है। न्यायपालिका को इसके प्रति इतना अति-संवेदनशील क्यों होना चाहिए। पुस्तक के इस भाग में न्यायपालिका की संरचना क्या है, वे कैसे काम करते हैं, उन्होंने क्या किया है, यह बताया गया है और कुछ अच्छी बातें भी उजागर की गई हैं।’’

उन्होंने मौखिक टिप्पणी की, ‘‘फिर वे कहते हैं… हालांकि, ऐसे भी निर्णय हैं जिन्हें लोग मानते हैं कि वे आम लोगों के सर्वोत्तम हित के खिलाफ काम करते हैं… यह किसी निर्णय के बारे में एक दृष्टिकोण है, लोगों को हमारे निर्णयों की आलोचना करने का अधिकार है।’’

भाषा सुरेश माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments