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Friday, 17 April, 2026
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संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में पुराने मानदंडों पर सवाल उठाए

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नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत जनसंख्या और पात्रता मानदंडों में व्यापक संशोधन की सिफारिश की है तथा इस बात को लेकर चिंता जताई कि पुराने मानदंडों के कारण ऐसी ग्रामीण बस्तियां इस योजना से वंचित हैं, जिन्हें इसका लाभ मिलना चाहिए था।

ग्रामीण विकास पर कांग्रेस सांसद सप्तगिरि शंकर उलाका की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति ने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-ग्रामीण के तहत आवास निर्माण के लिए सरकारी सहायता बढ़ाकर चार लाख रुपये कर दी जानी चाहिए।

समिति ने कहा कि पीएमजीएसवाई के तहत बस्तियों की पहचान और प्राथमिकता निर्धारण अभी भी ‘‘पुराने जनसंख्या मानकों और पुराने आंकड़ों’’ पर निर्भर है, जो कई क्षेत्रों में वर्तमान जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करते हैं।

समिति ने पाया कि ‘‘जनसंख्या के पुराने आंकड़ों पर निर्भरता के कारण पात्र बस्तियां लाभार्थी सूची से बाहर हो सकती हैं’’ और ‘‘वर्तमान जनसंख्या की वास्तविकताओं और वास्तविक कनेक्टिविटी के न होने को’’ को बेहतर तरीके से समझने के लिए मानदंडों की समीक्षा की सिफारिश की।

समिति ने कहा कि वन क्षेत्रों, पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में स्थित कई बस्तियों में अब भी बारहमासी सड़क संपर्क नहीं है। साथ ही, यह सुनिश्चित करने के लिए कि बारहमासी सड़कें हों, ऐसे जिलों का ‘‘नये सिरे से और विस्तृत पुनर्मूल्यांकन’’ करने का आग्रह किया गया है।

समिति ने सिफारिश की कि विभाग ऐसे जिलों का नये सिरे से और विस्तृत पुनर्मूल्यांकन करे, जिसमें वन और दुर्गम क्षेत्र की बाधाओं के कारण छूटे हुए बस्तियों पर विशेष ध्यान दिया जाए।

इसके अलावा, समिति ने सड़क प्रस्तावों के मूल्यांकन और अनुमोदन में देरी को भी उजागर किया और कहा कि इस तरह की देरी ‘‘कार्यान्वयन की समयसीमा को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है, लागत बढ़ाती है और अपेक्षित लाभों में देरी करती है।’’

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के संबंध में, समिति ने पाया कि सामग्री, श्रम और परिवहन की बढ़ती लागत के बावजूद मौजूदा प्रति (आवासीय) इकाई सहायता ‘‘काफी समय से स्थिर बनी हुई है।’’

रिपोर्ट में कहा गया है कि लाभार्थियों को अक्सर अतिरिक्त संसाधन जुटाने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे ‘‘वास्तविक व्यय वर्तमान सहायता से काफी अधिक हो जाता है।’’ समिति ने सिफारिश की है कि वित्तीय संकट के बिना एक टिकाऊ घर के निर्माण को सुनिश्चित करने के लिए सहायता को ‘‘प्रति इकाई कम से कम चार लाख रुपये’’ तक किया जाए।

भाषा सुभाष माधव

माधव

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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