scorecardresearch
Friday, 27 March, 2026
होमदेशदिल्ली के मजनू का टीला में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

दिल्ली के मजनू का टीला में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

Text Size:

(अपर्णा बोस)

नयी दिल्ली, 17 जुलाई (भाषा) दिल्ली के मजनू का टीला में एक सीमित क्षेत्र के भीतर रह रहे पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ये लोग अच्छे भविष्य की उम्मीद में भारत आए थे जिन्हें यहां तंबुओं और कच्चे मकानों में रहना पड़ रहा है।

राधा सोलंकी (52) ने कहा कि केंद्र द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम को स्थगित रखे जाने के कारण उनकी उम्मीदें और सपने बिखर गए जिन्होंने नौ साल पहले पाकिस्तान से भारत में कदम रखा था।

सोलंकी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हमें कोई मदद नहीं मिली, पानी और बिजली भी नहीं। हम खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हमारे अंदर अब कोई दया नहीं बची है, क्योंकि यहां किसी ने भी हम पर दया नहीं की है। पिंजरे में बंद पक्षी ही पिंजरे में रहने का दर्द महसूस कर सकता है।’

आपबीती सुनाते हुए, सोलंकी ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के बाद उनकी वित्तीय स्थिति इस हद तक बिगड़ गई कि उनके बच्चों को स्कूल से बाहर होना पड़ा क्योंकि वे डिजिटल कक्षाओं का खर्च नहीं उठा सकते थे।

तीस वर्षीय गंगा, जिनके पति मोबाइल कवर की एक दुकान चलाते हैं और परिवार के अकेले कमाने वाले हैं, ने कहा कि मदद के लिए उनकी सारी अपील अनसुनी रही।

गंगा ने कहा, ‘हम नहीं चाहते कि कोई हमें वित्तीय सहायता प्रदान करे, लेकिन कम से कम वे हमें नागरिकता और नौकरी प्रदान कर सकते हैं। हमने कई बार मदद की गुहार लगाई है, लेकिन कोई मदद या प्रतिक्रिया नहीं मिली।’

मई, 2022 में पश्चिम बंगाल में एक रैली को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि कोविड महामारी समाप्त होने के बाद नागरिकता संशोधन कानून लागू किया जाएगा।

शरणार्थियों की नागरिकता के मुद्दे के बारे में मानवाधिकार कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने कहा कि संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के माध्यम से शरणार्थियों को नागरिक का दर्जा देने की आवश्यकता नहीं है।

कृष्णन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘शरणार्थियों को सीएए लागू किए बिना भी नागरिकता प्रदान की जा सकती है। तो फिर सरकार ऐसा क्यों नहीं कर रही है? शरणार्थियों को कम से कम बुनियादी सुविधाएं और शरणार्थी का दर्जा दिया जाना चाहिए क्योंकि वे इसके हकदार हैं।’

भाषा नेत्रपाल देवेंद्र

देवेंद्र

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments