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Thursday, 18 July, 2024
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‘हमारा काम सिर्फ ड्राइवर, राइडर को शांत कराना नहीं’, उबर की 24×7 सेफ्टी हेल्पलाइन को संभालने वाले लोग

विशाखापत्तनम और हैदराबाद में सैकड़ों उबर सुरक्षा एजेंट पूरे भारत में सवारियों और ड्राइवरों की बात सुनकर उनकी शिकायतों, विवादों और आपात स्थितियों से निपटने में चौबीसों घंटे उनकी मदद कर रहे हैं.

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विशाखापत्तनम: जब पुणे के पास एक जंगल के बीच उनकी कैब खराब हुई, तो दो यात्रियों और उनके उबर ड्राइवर को ज्यादा देर तक परेशान नहीं होना पड़ा. कुछ ही मिनटों में, एक और कैब उनकी मदद करने के लिए वहां आ गई, जिसे सैकड़ों मील दूर आंध्र प्रदेश से एक कॉल के माध्यम से तेजी से भेजा गया. इस बचाव अभियान का संचालन 25 वर्षीय स्वेता कर रही थी, जो उबर की सेफ्टी एजेंट थी.

विशाखापत्तनम और हैदराबाद में उबर के एक्सीलेंस सेंटर (सीओई) में स्वेता और सैकड़ों अन्य सुरक्षा एजेंटों के लिए, देश के सभी कोनों से सहायता के लिए तत्काल कॉल का जवाब देना कार्यालय में बस एक और दिन है. उनका काम सुरक्षित और परेशानी मुक्त यात्रा सुनिश्चित करने के लिए राइडर्स और ड्राइवरों के बीच मध्यस्थ के रूप में काम करना है.

लेकिन CoEs में मौजूद पुरुष और महिलाएं सिर्फ मदद ही नहीं करती है, वे दिक्कतों को सुलझाने के लिए एक मानवीय स्पर्श लाते हैं, और समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझाने की पूरी तरह कोशिश करते हैं.

विशाखापत्तनम सीओई के एक सेफ्टी एजेंट मोहम्मद शनावाज़ ने कहा, “हमारा काम सिर्फ ड्राइवर या फिर कस्टमर को दिलासा देना या शांत करना नहीं है. हम तथ्यों की पुष्टि कर उचित कार्रवाई करना ज्यादा जरुरी समझते हैं.”

जुलाई के आखिरी सप्ताह में दिप्रिंट ने इस CoE में एक दिन बिताया और सुरक्षा एजेंटों के साथ उनकी लाइव और आउटबाउंड कॉल के दौरान बातचीत की. विशाखापत्तनम के मध्य में 600 सीटों वाले भव्य कार्यालय में सुरक्षा एजेंट अपने हेडसेट और लैपटॉप से लैस होकर सवारियों और ड्राइवरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार बैठे रहते हैं.

एजेंट हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, तमिल, तेलुगु और मलयालम सहित लगभग 10 भाषाओं में बातचीत कर सकते हैं. विशाखापत्तनम सीओई के प्रमुख लोरेन कॉलिसन के अनुसार, इस केंद्र में 51 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी महिलाएं हैं.

Uber safety agents
उबर के विशाखापत्तनम सीओई में सुरक्षा एजेंट काम करते हुए | फोटो: निधिमा तनेजा/दिप्रिंट

भारत और दक्षिण एशिया की ग्राहक सहायता प्रमुख मानसी चड्ढा के अनुसार, हेल्पलाइन पर आने वाली सभी कॉलों में से 60 प्रतिशत से अधिक में ड्राइविंग से संबंधित मुद्दे ‘ऑफ़लाइन’ यात्राओं (जहां ड्राइवर ऐप बंद करने और केवल नकद स्वीकार करने पर जोर देता है) के बारे में शिकायतें शामिल हैं.

जबकि उबर ने यह डेटा साझा करने से इनकार कर दिया कि दैनिक या मासिक आधार पर कितनी कॉल प्राप्त होती हैं, चड्ढा ने कहा कि कॉल की संख्या किसी विशेष शहर में सवारी की मात्रा के लगभग आनुपातिक है.

राइड-शेयरिंग प्लेटफॉर्म द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, उबर जिन 123 भारतीय शहरों में परिचालन करता है, उनमें से दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और कोलकाता में उबर सेफ्टी लाइन पर आने वाली सभी कॉलों में से 50 प्रतिशत से अधिक हैं.

आंकड़ों से पता चलता है कि एक महानगरीय शहर के लिए, सुबह और शाम के व्यस्ततम कार्यालय समय में अधिकांश कॉल आती हैं.

यात्रा के दौरान और यात्रा समाप्त होने के 30 मिनट बाद तक 24X7 सुरक्षा हेल्पलाइन सक्रिय रहती है. इसे 2019 में चुनिंदा शहरों में लॉन्च किया गया था और अब यह देश भर के उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध है.

चड्ढा के अनुसार, 99 प्रतिशत सेफ्टी लाइन कॉल का जवाब “30 सेकंड से भी कम” में दिया जाता है.


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‘पैनिक’ बटन के पीछे बैठे लोग

विशाल विशाखापत्तनम CoE में, अधिकांश कर्मचारी एक-दूसरे के सामने लंबी सफेद मेजों पर बैठते हैं. बैठकों और अन्य उद्देश्यों के लिए बायर्न म्यूनिख और आर्सेनल जैसे फुटबॉल क्लबों के नाम पर एक दर्जन से अधिक छोटे केबिन भी बनाये गए हैं.

कार्यालय के एक छोर पर, “शांत कमरे” हैं जहां एजेंट कॉल के बाद आराम कर सकते हैं. एक कोने में साइकिलें हैं जिनका उपयोग कर्मचारी ब्रेक लेने के लिए कर सकते हैं.

कार्य अपने आप में चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित हो सकता है. उदाहरण के लिए, विज़ाग से इंजीनियरिंग स्नातक 25 वर्षीय शानावाज़ ने ग्राहक सेवा को काम के लिए चुना, दूसरे छोर पर एक उत्तेजित ड्राइवर की बात सुनी.

बमुश्किल रुकते हुए, ड्राइवर ने एक यात्री के बारे में शिकायत की, जिसने न केवल गलत लोकेशन पर प्रवेश किया था, बल्कि उसके साथ गाली-गलोच और हमला भी किया था. जैसे ही ड्राइवर ने अपनी आपबीती सुनाई, शनावाज़ ने उसे लगातार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया और किराया मुआवजा दिया.

कमरे के दूसरे छोर पर बैठी स्वेता एक राइडर से बात कर रही थी, जिसने आरोप लगाया कि उसका फोन ड्राइवर ने चुरा लिया है और सवारी भी रद्द कर दी है. कॉल करने वाले को उचित कार्रवाई का आश्वासन देने के बावजूद, स्वेता ने कथित घटना के स्थान और समय की तेजी से जांच की. पता चला कि दोनों की मुलाकात ही नहीं हुई थी.

वास्तव में, प्रत्येक कॉल के साथ, वह कई टैब का उपयोग करती थी, स्प्रेडशीट भरती थी और नोट्स लेती थी.

स्वेता जो मूल रूप से जमशेदपुर की हैं और आठ महीने से उबर के साथ हैं – ने कहा, “हमारा काम सिर्फ कॉल उठाना नहीं है. हम अपने डेटाबेस पर लगातार शोध और अद्यतन कर रहे हैं. प्रत्येक मामले में, हम ड्राइवरों और यात्रियों के बारे में अधिक समझने के लिए उनके हिस्ट्री का अध्ययन करते हैं. हम किसी भी विकासशील प्रवृत्ति पर भी कड़ी नजर रखते हैं.”

कॉलिसन इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सुरक्षा एजेंट न केवल मदद करते हैं, बल्कि दिन के दौरान आने वाली असंख्य कॉलों पर नज़र रखते है और डेटा भी प्राप्त करते हैं.

कॉलिसन ने कहा, “किसी भी चीज़ के बारे में हमें बताने के लिए वे सबसे अच्छे हैं. वे ही सवारियों और यात्रियों के साथ बातचीत करते हैं.” “जब कैंसिलेशन बढ़ रहे थे क्योंकि ड्राइवर को सवारी स्वीकार करने से पहले ड्रॉप लोकेशन के बारे में पता नहीं था, तो उन्होंने ही इसका पता लगाया.”

जबकि स्वेता और शानवाज़ उस टीम का हिस्सा हैं जो विशेष रूप से लाइव आने वाले प्रश्नों से निपटती है, दूसरी टीम मुद्दों की अधिक गहराई से जांच करती है.

हैदराबाद की मूल निवासी और पांच साल से उबर कर्मचारी उम्मे अयमेन इस टीम की सदस्य हैं. दिप्रिंट के दौरे के समय वह विजाग कार्यालय में थीं और एक ड्राइवर को बुला रही थीं, जिसने ड्रॉप लोकेशन को लेकर एक यात्री के साथ विवाद की शिकायत दर्ज कराई थी.

ड्राइवर ने बताया कि कैसे यात्री ने उसे निर्धारित ड्रॉप पॉइंट से कई किलोमीटर आगे ड्राइव करने के लिए मजबूर किया और प्रारंभिक अनुमान और संशोधित राशि के बीच किराए के अंतर का भुगतान करने से इनकार कर दिया.

आयमन ने ध्यान से सुना और ड्राइवर को उसके खोए हुए पैसे की भरपाई करने के लिए प्रतिबद्ध किया. ड्राइवर, जो बातचीत की शुरुआत में क्रोधित था, ने गंभीरता से लिए जाने के लिए धन्यवाद व्यक्त किया.

एमबीए स्नातक आयमन ने कहा, “कभी-कभी, वे केवल यही चाहते हैं कि उनकी बात सुनी जाए. इससे उन्हें यह जानने में मदद मिलती है कि उनके मुद्दों को हल करने के लिए दूसरी ओर एक और इंसान है.”

श्वेता ने भी कहा कि उन्हें हर दिन नए मामलों को संभालने और लोगों की मदद करने में खुशी मिलती है.

राइडचेक, 5 लाख रुपये का बीमा, SoS बटन

24/7 हेल्पलाइन पर काम करने वाले एजेंटों के अलावा, उबर ने अपने एप्लिकेशन में कई सुरक्षा सुविधाओं को एकीकृत किया है. उदाहरण के लिए, यदि किसी यात्रा के दौरान किसी संभावित विसंगति का पता चलता है, जैसे कि अप्रत्याशित रूप से लंबे समय तक रुकना, तो उबर की राइडचेक सुविधा ड्राइवर और यात्री दोनों को एक इन-ऐप अधिसूचना भेजती है, जो उन्हें यह सत्यापित करने के लिए प्रेरित करती है कि सब कुछ ठीक है.

इसके अतिरिक्त, उबर कैब में यात्रा करने वाले प्रत्येक यात्री और ड्राइवर का बिना किसी अतिरिक्त लागत के बीमा किया जाता है. प्रस्तावित कवरेज में मृत्यु की स्थिति में 5 लाख रुपये, स्थायी विकलांगता के लिए 5 लाख रुपये तक और अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में 2 लाख रुपये तक, बाह्य रोगी उपचार के लिए 50,000 रुपये तक की उप-सीमा शामिल है.

एक अन्य सुविधा जिसे सभी शहरों में लागू किए जाने की उम्मीद है वह है आपात स्थिति दर्ज करने के लिए SoS सुविधा. जब कोई यात्री इस पर क्लिक करता है तो नजदीकी पुलिस स्टेशन को वाहन की जीपीएस लोकेशन मिल जाती है.

यह सुविधा जुलाई 2022 से हैदराबाद में लाइव है. दिप्रिंट के साथ साझा किए गए उबर केस स्टडी के अनुसार, शहर में एक यात्री ने हाल ही में एक ड्राइवर के साथ बहस के बाद SoS बटन दबाया. ऐसा करते ही उसकी लाइव लोकेशन आ गई. यात्रा विवरण के साथ निकटतम पुलिस स्टेशन को भेज दिया गया. पुलिस ने यात्री का हालचाल जानने के लिए फोन किया और फोन पर स्थिति को शांत करने में कामयाब रही.

उबर के प्रवक्ता के मुताबिक, अगर तनाव कम करना सफल नहीं होता तो यात्री की मदद के लिए पुलिस अधिकारियों की एक टीम भेजी जाती.

भारत और दक्षिण एशिया में उबर के सुरक्षा अभियानों के प्रमुख सूरज नायर ने कहा, “सभी राज्यों के पुलिस विभागों के साथ इस बारे में बातचीत चल रही है.”

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें)

(संपादन: अलमिना खातून)


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