जयपुर, तीन जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के संविधान को जीवंत दस्तावेज बताते हुए मंगलवार को कहा कि यह समय के साथ बदलती जन-मानस की आशाओं और आकांक्षाओं को समाहित करने में पूरी तरह सक्षम है।
राष्ट्रपति मुर्मू यहां राजभवन में नवनिर्मित संविधान उद्यान के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहीं थीं। संविधान में हुए 105 संशोधनों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,‘‘ इस प्रकार से हमारा संविधान एक जीवंत दस्तावेज है जो समय के साथ बदलती हुई जन-मानस की आशाओं और आकांक्षाओं को समाहित करने में पूरी तरह सक्षम है।’’
उन्होंने कहा,‘‘हमारा लोकतंत्र विश्व का सबसे बड़ा व जीवंत लोकतंत्र है। हमारे इस महान लोकतंत्र का आधार हमारा संविधान है। इस समारोह में भाग लेकर संविधान निर्माताओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर मुझे मिल रहा है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने पत्र ‘यंग इंडिया’ में लिखा था कि मैं ऐसे भारत के लिए काम करूंगा जिसमें गरीब से गरीब आदमी को भी लगे कि अपने देश को बनाने में मेरी बात भी मानी जाती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान पर आधारित हमारा लोकतंत्र बापू के उस विचार के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
संसद में महिला सांसदों की बढ़ती संख्या का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी बहनें, अपने संघर्ष तथा योग्यता के बल पर पंचायत भवन से लेकर संसद भवन तक अपनी उपस्थिति और योगदान को निरंतर बढ़ा रही हैं तथा समाज और देश की सेवा कर रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा,‘‘ हमारे संविधान में समानता का अधिकार दिया गया है। समानता तथा महिला सशक्ति के संदर्भ में राजस्थान के एक महत्वपूर्ण योगदान को मैं रेखांकित करना चाहूंगी।’’
उन्होंने कहा कि बाल विवाह को समाप्त करने के वास्ते एक अधिनियम तैयार करने में राजस्थान के हरविलास शारदा का महत्वपूर्ण योगदान है और इस प्रकार राजस्थान का इतिहास महिलाओं की गरिमा व सशक्तिकरण का इतिहास भी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि संविधान उद्यान में स्थापित प्रतीकों में सम्माहित उच्च आदर्शों से आने वाली पीढ़ियां प्रेरणा लेंगी। उन्होंने कहा,‘‘ मैं समझती हूं कि इस संविधान उद्यान के निर्माण का मुख्य उद्देश्य संविधान के आदर्शों के प्रति जागरुकता बनाए रखना है। यह बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य है, हमारे देश के लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने की दिशा में बड़ा प्रयास है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति संवेदनशीलता तथा लोकतंत्र के प्रत्येक स्तर और प्रशासन के प्रत्येक पहलू के प्रति जागरूकता के कारण एक व्यापक संविधान का निर्माण किया।
उन्होंने कहा कि हमारे दूरदर्शी संविधान निर्माताओं के पास भविष्य की पीढ़ियों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार प्रणाली बनाने संबंधी विचारों की स्पष्टता थी; इसी कारण संविधान संशोधन के प्रावधानों को भी संविधान में ही शामिल किया गया है।
इससे पहले राजस्थान की दो दिवसीय यात्रा पर पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू ने संविधान उद्यान की पट्टिका का अनावरण तथा उद्यान का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि ‘‘राष्ट्रपति के रूप में राजस्थान का यह मेरा पहला दौरा है। राजस्थान के लोगों ने वीरता और बलिदान की अमिट गाथाएं लिखी हैं। ऐसी विभूतियों की इस धरती को मैं सादर नमन करती हूं।’’
राज्यपाल कलराज मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि हमारा संविधान भारतीय संस्कृति का जीवंत दर्शन है। संविधान के लेखन, इसे निर्मित करने के लिए बनाई गयी संविधान सभा, संविधान सभा की बैठकों, संविधान निर्माण में संलग्न रहे महापुरुषों की इसमें भूमिका और इसे लागू किए जाने की यात्रा बहुत अर्थपूर्ण है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि संविधान की मूल भावना हर नागरिक को पता होनी चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजभवन में नवनिर्मित संविधान पार्क संवैधानिक आदर्शों, मूल्यों और इसकी मूल भावना का प्रसार करेगा।
राजस्थान देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जहां आमजन में संवैधानिक जागरूकता लाने के लिए राजभवन में संविधान उद्यान स्थापित किया गया है। पार्क में प्रतिमाओं, मॉडल और चित्रों आदि के माध्यम से संविधान के निर्माण से लेकर उसके कार्यान्वयन तक की यात्रा को प्रदर्शित किया गया है।
इस अवसर पर उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से राजस्थान में सौर ऊर्जा क्षेत्रों के लिए पारेषण प्रणाली का उद्घाटन किया और एसजेवीएन लिमिटेड की 1000 मेगावाट की बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना की आधारशिला भी रखी।
इससे पहले जयपुर हवाई अड्डे के स्टेट हैंगर में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनकी अगवानी की। यहां से मुर्मू शहर में स्थित अमर जवान ज्योति पहुंचीं और वहां अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इसके बाद मंगलवार शाम को राष्ट्रपति माउंट आबू (सिरोही) स्थित ब्रह्माकुमारीज संस्थान के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘राइज–आध्यात्मिक सशक्तिकरण से स्वर्णिम भारत का उदय’ की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ विश्व में शांति के अग्रदूत की भूमिका भी निभा रहा है।
उन्होंने कहा,‘‘युद्धों और कलह के वातावरण में विश्व समुदाय समाधान के लिए भारत की ओर देख रहा है। अनिश्चितता के इस दौर में अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने के साथ-साथ, भारत विश्व में शांति के अग्रदूत की भूमिका भी निभा रहा है।’’
इस संस्थान से अपने संबंध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा,‘‘ब्रह्माकुमारी संस्थान से मेरा गहरा संबंध रहा है, और बना रहेगा। मैंने इस संस्थान में राजयोग की पद्धति सीखी। बाहरी भौतिक सुविधाओं और घटनाओं के स्थान पर आंतरिक आध्यात्मिक शक्ति को महत्व देने वाली इस पद्धति ने, मेरे जीवन में उस समय प्रकाश व उत्साह का संचार किया, जब मुझे अंधकार व निराशा का अनुभव हो रहा था।’’
भाषा पृथ्वी धीरज
धीरज
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