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Friday, 24 April, 2026
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सीईसी के खिलाफ नए नोटिस में विपक्ष ने लगाई आरोपों की झड़ी, सत्तारूढ़ दल से निकटता का दावा

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नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) विपक्ष ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव लाने का नया नोटिस देते हुए उनके विरूद्ध कई आरोप लगाए हैं, जिनमें सत्तारूढ़ दल के साथ निकटता, आचार संहिता से जुड़ी कार्रवाइयों में पक्षपात और ‘‘त्रुटिपूर्ण’’ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को पूरे देश में क्रियान्वित करना प्रमुख हैं।

विपक्ष के 73 राज्यसभा सदस्यों के हस्ताक्षर वाला नया नोटिस शुक्रवार को राज्यसभा सचिवालय को सौंपा गया।

सूत्रों ने बताया कि विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुख्य रूप से नौ आरोप लगाए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आदर्श आचार संहिता के कार्यान्वयन में पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने, निर्वाचन आयोग के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की पक्षपातपूर्ण और सार्वजनिक ढंग से निंदा करने का आरोप लगाया है।

उन्होंने केरल में आयोग के एक दस्तावेज पर भाजपा की मुहर होने की घटना का हवाला देते हुए दावा किया है कि यह सीईसी की सत्तारूढ़ दल के साथ निकटता का साक्ष्य है।

विपक्षी दलों ने एसआईआर का हवाला देते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया तथा 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पश्चिम बंगाल में आयोग के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग शिकायतों पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई

विपक्षी सांसदों का यह दावा भी है, ‘‘दोषपूर्ण एसआईआर को राष्ट्रव्यापी स्तर पर करने की संतुति दी गई। उच्चतम न्यायालय को पश्चिम बंगाल अनुच्छेद 142 के तहत हस्तक्षेप करना पड़ा और विधानसभा चुनाव के समय नौकरशाहों के स्थानांतरण और तैनाती के लिए शक्ति का अवैध रूप से दुरुपयोग किया गया।’’

विपक्षी दलों ने एसआईआर का हवाला देते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित किया गया तथा 90 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए तथा लगभग चौंतीस लाख मतदाताओं को न्यायिक अधिकार से वंचित कर दिया गया।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पश्चिम बंगाल में अलग-अलग शिकायतों पर आयोग द्वारा जानबूझकर कार्रवाई नहीं की गई

विपक्षी दलों ने बीते आठ अप्रैल को तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग के पदाधिकारियों की बैठक का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्था में उच्च पद पर बैठे लोगों द्वारा अशोभनीय आचरण किया गया।

भाषा हक

हक नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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