(रुमेला सिन्हा)
कोलकाता, आठ मार्च (भाषा) इस दुनिया में किसी को भी अकेलापन और उपेक्षित महसूस नहीं करना चाहिए। यह कहना है 63 वर्षीय एलिना दासगुप्ता दत्ता का, जो यहां वृद्ध व्यक्तियों की देखभाल करने वाले मंच के संस्थापकों में शामिल हैं।
लगभग एक दशक पहले दो अन्य लोगों के साथ मिलकर ‘ट्रिबेका केयर’ की शुरुआत करने वालीं दत्ता ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अपनी शादी में बिना किसी सहारे के दर्द और अपमान सहने के बाद’’ ऐसे लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना चाहती हैं, जिनके पास उनकी देखभाल करने के लिए कोई नहीं है।
वरिष्ठ नागरिक मंच के बारे में अधिक बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित देखभाल प्रबंधक शहर के ऐसे बुजुर्ग लोगों की देखभाल करते हैं, जिनमें से ज्यादातर के बच्चे उन्हें छोड़कर विदेश चले गए हैं।
दत्ता ने कहा कि प्रशिक्षित प्रबंधक बुजुर्गों की चिकित्सा आवश्यकताओं का ध्यान रखने के साथ हर संभव सहयोग करते हैं, जैसा कि एक बेटा या बेटी को करना चाहिए।
हालांकि, दत्ता ने स्पष्ट किया कि इस कार्य के लिए वसूले जाने वाले शुल्क से कर्मचारियों को वेतन भुगतान किया जाता है और वह इस पहल के ऐवज में कुछ भी पाने की अपेक्षा नहीं करती हैं।
राजनेता के तौर पर अपने अनुभव साझा करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं माकपा नेता सायरा शाह हलीम ने कहा कि वह दक्षिण कोलकाता की बालीगंज सीट पर उपचुनाव प्रचार के दौरान महिलाओं को लेकर अपनाये जा रहे नजरिये को लेकर अंचभित हुई थीं।
अपने सहयोगियों द्वारा ‘वीरांगना’ कहकर संबोधित की जाने वालीं हलीम ने कहा, ‘‘राजनीति कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है और महिलाओं के लिए यह दोगुनी मुश्किल है। मुझे याद है कि चुनाव प्रचार के दौरान एक विपक्षी पार्टी ने मेरे रहन-सहन, पहनावे को बड़ा मुद्दा बना दिया था।’’
हालांकि, उन्होंने कहा कि साहस का परिचय देते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को राजनीति में आना चाहिए।
भाषा
शफीक संतोष
संतोष
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