भद्रक, 28 अगस्त (भाषा) ओडिशा में भद्रक जिले के चार मछुआरे बंगाल की खाड़ी में अपनी नाव डूबने के बाद पांच दिन तक लहरों, भूख व थकान से जूझते रहे लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी और वे बृहस्पतिवार को सुरक्षित घर लौट आए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इन चार लोगों में 70 वर्षीय एक व्यक्ति भी शामिल है।
अधिकारियों ने बताया कि चारों लोग 21 अगस्त को तटीय जिले के बासुदेवपुर ब्लॉक क्षेत्र स्थित चूड़ामणि बंदरगाह से मछली पकड़ने के लिए समुद्र में उतरे थे लेकिन उन्हें तब नहीं पता था कि उनके साथ ऐसी घटना घटने जा रही है, जिसके बारे में वे कल्पना भी नहीं कर सकते।
चार मछुआरों में से एक पबन्ना मलिक (56) ने कहा, “हमने जाल डाला ही था कि अचानक इंजन में खराबी आ गई और उसने काम करना बंद कर दिया। बार-बार कोशिश करने के बावजूद, वह चालू नहीं हुआ। हमने लंगर डाला लेकिन समुद्र की तेज धाराओं ने उसे खींच लिया।”
उन्होंने बताया कि इसके बाद नाव गहरे समुद्र की ओर बह गई।
मलिक ने बताया कि मछुआरों ने तीन दिनों तक पाल की मदद से नाव को नियंत्रित करने की कोशिश की लेकिन 24 अगस्त को वह टूट गई और अंततः नाव डूब गई।
उन्होंने बताया, “हम अपने साथ सिर्फ एक बोतल पानी ले गए थे। हम लकड़ी आदि के सहारे तैरते रहे…।’’
लगभग पांच दिन बाद मछुआरे 27 अगस्त की रात को सुनामुहिन वन क्षेत्र के निकट पहुंचे, जहाँ स्थानीय लोगों ने उन्हें बचा लिया।
बासुदेवपुर थाना प्रभारी निरीक्षक लोपामुद्रा नायक ने बताया कि उन्हें (मछुआरों को) बासुदेवपुर चिकित्सा केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी हालत स्थिर बताई।
अन्य तीन मछुआरों की पहचान प्रकाश मलिक (34), बन्ना मलिक (27) और सपना मलिक (70) के रूप में हुई है।
भाषा जितेंद्र अविनाश
अविनाश
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