प्रयागराज, पांच अगस्त (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने वकीलों की हड़ताल को गंभीरता से लेते हुए कहा कि बार एसोसिएशन के आह्वान पर पेशेवर दायित्व से किसी तरह विरत रहना और इस तरह की हड़ताल के आह्वान को स्वीकार करना पीठासीन अधिकारी की तरफ से दुराचार के समान हो सकता है।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने अलीगढ़ के स्थानीय बार एसोसिएशन द्वारा न्यायिक कार्य से विरत रहने का वकीलों से किए गए आह्वान के आलोक में एक मामले की सुनवाई टालने के लिए उप जिलाधिकारी (एसडीएम) को फटकार लगाई।
अदालत ने कहा, “इस तरह की हड़ताल के आह्वान को स्वीकार करना पीठासीन अधिकारी की ओर से दुराचार के समान हो सकता है और उसे पद से हटाने समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की जा सकती है।”
अदालत ने संबंधित अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा कि बार के प्रस्ताव को देखते हुए एक मामले में सुनवाई टालने के लिए क्यों न उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
यह मामला सत्यपाल सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा एसडीएम के समक्ष उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 38(2) के तहत दाखिल बहाली आवेदन से जुड़ा है। इस मामले में इसी साल 25 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन अधिवक्ताओं की हड़ताल की वजह से इस मामले की सुनवाई 28 जुलाई तक के लिए टाल दी गई।
संबंधित एसडीएम के आचरण की आलोचना करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘अब यह सुस्थापित है कि बार एसोसिएशन के आह्वान पर पेशेवर ड्यूटी से किसी तरह विरत रहना पूरी तरह से अवैध है।’’
अदालत ने 28 जुलाई को अपने आदेश में संबंधित एसडीएम को कारण बताओ नोटिस जारी किया। अदालत ने उस बार एसोसिएशन, उसके अध्यक्ष और सचिव का पूर्ण विवरण भी मांगा और मामले की अगली सुनवाई की तिथि छह अगस्त तय की।
भाषा राजेंद्र खारी
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