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Wednesday, 29 July, 2026
होमदेशExclusive: NEET पेपर लीक में नहीं छोड़ना था कोई सबूत, 'पेपर दोबारा बनाकर' छोड़ दिए डिजिटल निशान

Exclusive: NEET पेपर लीक में नहीं छोड़ना था कोई सबूत, ‘पेपर दोबारा बनाकर’ छोड़ दिए डिजिटल निशान

CBI की चार्जशीट में कहा गया है कि NTA के तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने पैसे कमाने और अपनी ट्यूशन क्लास का सक्सेस रेट बढ़ाने के लिए क्वेश्चन पेपर लीक किया था.

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नई दिल्ली: 2026 NEET पेपर लीक को सिर्फ कुछ चुनिंदा छात्रों तक ही सीमित रखने की योजना थी, ताकि इसका कोई डिजिटल सबूत न बचे. लेकिन एक आरोपी ने सवालों का पेपर दोबारा तैयार किया, उसे कई लोगों तक पहुंचाया और इसी दौरान डिजिटल सबूत बन गया. इसी सुराग की वजह से जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क तक पहुंच गईं. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की पहली चार्जशीट के मुताबिक, NEET का प्रश्नपत्र कभी भी डिजिटल रूप में एक सीमित नेटवर्क से बाहर साझा नहीं किया गया. इसके बजाय, चुने हुए छात्रों को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञों की ओर से चलाए गए खास कोचिंग सत्रों में सवाल लिखवाए गए.

इन तीनों में पी.वी. कुलकर्णी शामिल हैं, जिनके पास कथित तौर पर पूरा प्रश्नपत्र था. उनके साथ केमिस्ट्री विशेषज्ञ प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी और फिजिक्स विशेषज्ञ मनीषा संजय हवालदार पर आरोप है कि उन्होंने 10-15 छात्रों के एक समूह को सवाल बोलकर लिखवाए, ताकि कोई इलेक्ट्रॉनिक सबूत न रहे.

यह पूरा मामला शायद कभी सामने नहीं आता, लेकिन एक अप्रत्याशित घटना ने पूरे ऑपरेशन का पर्दाफाश कर दिया.

CBI की चार्जशीट के मुताबिक, ब्यूटी पार्लर चलाने वाली और इस मामले में गिरफ्तार आरोपी मनीषा संजय वाघमारे ने उन छात्रों में से एक को ढूंढ निकाला, जिसने इन क्लासों में हिस्सा लिया था. उसने छात्र से याद किए गए सभी सवाल दोबारा लिखवाए. इसके बाद उसने उस दोबारा तैयार किए गए पेपर को छपवाया और कई लोगों को बड़ी रकम लेकर बेच दिया.

CBI सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि यही दोबारा तैयार किया गया पेपर पुणे के बिचौलिए धनंजय निवृत्ति लोखंडे से नासिक के बिचौलिए शुभम मधुकर खैरनार तक पहुंचा. वहां से यह टेलीग्राम के जरिए राजस्थान पहुंचा और इसी के बाद जांच एजेंसियों को इस नेटवर्क का पता चला.

एक सूत्र ने कहा, “अगर वाघमारे ने पेपर दोबारा तैयार करके उसे आगे नहीं फैलाया होता, तो यह लीक शायद सिर्फ उन चुनिंदा स्टडी ग्रुप तक ही सीमित रहता जिन्हें NTA के तीनों विषय विशेषज्ञ पढ़ाते थे. तब किसी को भी इसका पता नहीं चलता.”

2026 NEET UG पेपर लीक को लेकर देशभर में हुए विरोध प्रदर्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ दिन बाद CBI ने मंगलवार को सभी 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की. इनमें कुलकर्णी भी शामिल हैं.

CBI के मुताबिक, कुलकर्णी ने दो अन्य विषय विशेषज्ञों के साथ मिलकर जिन छात्रों को पढ़ाया, उन्हें प्रश्नपत्र लीक करके कम से कम 21 लाख रुपये कमाए.

जांचकर्ताओं के मुताबिक, इसके बाद सवालों को कोचिंग संस्थानों, काउंसलिंग सेंटरों और दूसरे बिचौलियों के नेटवर्क तक पहुंचाया गया. फिर इन्हें छात्रों और उनके परिवारों को 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक में बेचा गया.

एक सूत्र ने बताया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि पेपर लीक करने वाला कोई संगठित आपराधिक गिरोह काम कर रहा था. “जांच में जो सामने आया, वह कोचिंग संस्थान चलाने वाले लोगों का एक नेटवर्क है. इनका मकसद अपने यहां पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षा में पास कराना था, ताकि संस्थानों की प्रतिष्ठा बढ़े और ज्यादा छात्र जुड़ें.”

‘पेपर हाथ से लिखवाया और टाइप करवाया’

CBI सूत्रों के मुताबिक, NTA के तीनों विषय विशेषज्ञों ने आर्थिक फायदा कमाने और अपनी ट्यूशन क्लासों के रिजल्ट बेहतर दिखाने के लिए प्रश्नपत्र लीक किया. उन्होंने छात्रों को पहले से सवाल देकर उनकी सफलता की संभावना बढ़ाई.

एक सूत्र ने कहा, “वे घर पर 10 से 20 छात्रों के छोटे-छोटे बैच पढ़ाते थे और उन्हीं से सवाल लिखवाते थे. CBI ने अब वे हाथ से लिखे नोट्स भी जब्त कर लिए हैं.”

उन्होंने कहा, “उनका मकसद छात्रों को यह भरोसा दिलाकर पैसा कमाना था कि वे उन्हें परीक्षा पास करा देंगे. साथ ही अपनी कोचिंग का नाम भी बनाना था. अच्छे नतीजों से ज्यादा छात्र आते और आखिर में ज्यादा कमाई होती.”

सूत्र के मुताबिक, यह लीक बड़े स्तर का कारोबार तब बना, जब मनीषा संजय वाघमारे ने छात्र से सवाल लेकर पूरा प्रश्नपत्र दोबारा तैयार किया.

सूत्र ने कहा, “उसने उन छात्रों में से एक को ढूंढ निकाला, जिसने इन कोचिंग क्लासों में हिस्सा लिया था. फिर अपनी दुकान पर उससे सारे सवाल टाइप करवाए. इसके बाद पूरा पेपर दोबारा तैयार किया और पुणे के एक व्यक्ति को 10 लाख रुपये में बेच दिया. उस व्यक्ति ने कथित तौर पर इसे नासिक भेजा, जहां इसे फिर 10-15 लाख रुपये में बेचा गया.”

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे पेपर आगे बढ़ता गया, उसकी कीमत भी बढ़ती गई. इसी तरह यह पूरी चेन आगे बढ़ी और आखिरकार राजस्थान में दिनेश बिलवाल के परिवार तक पहुंच गई.”

3 मई को देशभर में 22 लाख से ज्यादा छात्रों ने NEET-UG परीक्षा दी थी.

सिर्फ चार दिन बाद, 7 मई को राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव शर्मा को एक अहम सूचना मिली कि छात्रों के बीच एक तथाकथित “गेस पेपर” घूम रहा है. इस दस्तावेज में 410 सवाल थे. इनमें से केमिस्ट्री और बायोलॉजी के 120 सवाल असली NEET पेपर से बिल्कुल मेल खाते थे. उनका क्रम और उत्तर विकल्प भी बिल्कुल एक जैसे थे.

जब जांचकर्ताओं ने इस दस्तावेज की शुरुआत का पता लगाना शुरू किया, तो CBI जांच के मुताबिक उन्हें ऐसी कड़ी मिली जो सीधे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) तक पहुंचती थी. CBI सूत्रों ने कहा कि इसी दोबारा तैयार किए गए प्रश्नपत्र और उसके डिजिटल सबूतों की वजह से जांच एजेंसियां पूरे कथित पेपर लीक नेटवर्क का खुलासा कर सकीं.

इसके बाद NEET परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा कराई गई. इसके नतीजे 16 जुलाई को घोषित किए गए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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