पटना: मौजूदा मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे. बिहार भाजपा नेता संजय सरावगी ने रविवार को इसकी पुष्टि की.
शपथ ग्रहण के बाद नए मंत्रिमंडल के गठन पर भी चर्चा होगी. सरावगी ने कहा कि इस पर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए के सहयोगी दलों के साथ मिलकर फैसला लिया जाएगा.
उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री, हमारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का केंद्रीय नेतृत्व और एनडीए साथ बैठकर इस पर निर्णय लेंगे.”
बिहार में राजनीतिक हलचल के बीच यह फैसला आया है. राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे और जदयू प्रमुख नीतीश कुमार ने पहले बिहार विधान परिषद (एमएलसी) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था. पिछले महीने राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अब वह संसद के उच्च सदन में जाने की तैयारी कर रहे हैं.
5 मार्च को 75 वर्षीय नीतीश कुमार ने अपने फैसले की घोषणा करते हुए भावुक संदेश लिखा था. उन्होंने कहा कि उनकी लंबे समय से इच्छा रही है कि वह बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों और संसद के सदनों के सदस्य रहें. उन्होंने “विकसित बिहार” बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और नई सरकार को अपना “सहयोग और मार्गदर्शन” देने की बात कही.
नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) ने उनके फैसले का स्वागत किया और संसदीय लोकतंत्र में उनकी भूमिका की सराहना की.
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा, “यह उनका अपना फैसला है. संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार अगर वह एक जगह शपथ लेते हैं, तो उन्हें दूसरी जगह से इस्तीफा देना होगा…”
पूर्व जदयू सांसद चंदेश्वर चंद्रवंशी ने कहा, “उन्होंने बिहार को यहां तक पहुंचाया है… वह दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन बिहार की राजनीति पर उनकी पकड़ बनी रहेगी… उनकी सोच सिर्फ बिहार के लिए नहीं बल्कि पूरे देश के लिए है…”
जदयू विधायक दुलाल चंद्र गोस्वामी ने कहा कि पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार ने बिहार को “विकसित राज्यों” की सूची में शामिल किया और उनका विधान परिषद (एमएलसी) पद से इस्तीफा राज्य के लिए “नुकसान” है.
