(फाइल फोटो के साथ)
हैदराबाद, 24 अप्रैल (भाषा) ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिममीन (एआईएमआईएम) अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) 2006 के मालेगांव विस्फोट मामले के चार आरोपियों को बरी करने के बंबई उच्च न्यायालय ने फैसले को शायद ही उच्चतम न्यायालय में चुनौती दे।
उन्होंने कहा कि कहा कि यह पीड़ितों के साथ ‘विश्वासघात’ के बराबर है।
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ओवैसी ने कहा कि विस्फोटों में विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाया गया था। उन्होंने कहा कि उसके बाद भी संभवत: ‘परिपाटी’ के तहत जांच एजेंसियों ने पहले नौ मुसलमानों को गिरफ्तार किया, जिन्हें अंततः 2016 में बरी कर दिया गया।
ओवैसी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘क्या एनआईए इस आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करेगी? इसकी संभावना बहुत कम है। यह सभी पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ विश्वासघात है। यह एक और आतंकी हमला होगा जिसमें हम इसके दोषियों को दंडित होते नहीं दिखेंगे। भारत में मुसलमान होने का मतलब सिर्फ न्याय का इंतजार करना है।’’
बंबई उच्च न्यायालय ने मालेगांव में 2006 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के आरोपी चार आरोपियों के खिलाफ आतंकवाद सहित लगे सभी आरोपों को 22 अप्रैल को खारिज करते हुए उन्हें बरी कर दिया था।
उत्तरी महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव कस्बे में 8 सितंबर, 2006 को चार बम विस्फोट हुए थे। उनमें से तीन शुक्रवार की नमाज के तुरंत बाद हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के परिसर के अंदर हुए और चौथा धमाका मुशावरत चौक में हुआ। इन धमाकों में 31 लोगों की जान चली गई थी और 312 लोग घायल हो गए थे।
भाषा राजकुमार धीरज
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