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Friday, 20 March, 2026
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एनजीओ ने स्वप्ना सुरेश को नौकरी से किया बर्खास्त

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पलक्कड़ (केरल), छह जुलाई (भाषा) सोना तस्करी मामले में मुख्य आरोपी स्वप्ना सुरेश को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ कथित संबंध वाले एक एनजीओ में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) ने आरोप लगाया कि केरल सरकार आरोपी स्वप्ना सुरेश के लिए संगठन को ‘‘सूली पर चढ़ा’’ रही थी।

पलक्कड़ स्थित एचआरडीएस ने मीडिया को जारी एक बयान में कहा कि भले ही सुरेश को महिला अधिकारिता और सीएसआर निदेशक के रूप में उनके वर्तमान पद से हटा दिया गया है, लेकिन वह महिला अधिकारिता सलाहकार समिति के अध्यक्ष के पद पर बनी रहेंगी, जो अवैतनिक पद है।

हाई रेंज रूरल डेवलपमेंट सोसाइटी (एचआरडीएस) ने कहा कि उसने राज्य विधानसभा में मुख्यमंत्री के इस आरोप पर विचार करने के बाद सुरेश की नियुक्ति रद्द करने का फैसला किया है कि एनजीओ सोने की तस्करी के मामले के आरोपियों का बचाव कर रहा है।

28 जून को, मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने विधानसभा में एक स्थगन प्रस्ताव के जवाब में कहा था कि सुरेश को आरएसएस से जुड़े एक संगठन का समर्थन प्राप्त है।

एनजीओ ने बताया कि ‘मामले में सह-आरोपी’ और मुख्यमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव एम शिवशंकर को सेवा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई थी।

एनजीओ ने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि सोने की तस्करी के मामले में एक आरोपी को नियुक्त करने के लिए एचआरडीएस को सूली पर चढ़ाने वाली सरकार शिवशंकर को सेवा से बर्खास्त करेगी, जो इस मामले में सह-आरोपी हैं।’’

सुरेश को 18 फरवरी को एचआरडीएस में निदेशक, महिला अधिकारिता और सीएसआर नियुक्त किया गया था।

एनजीओ ने आरोप लगाया कि पुलिस, सतर्कता, अपराध शाखा और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​उसके कार्यालयों में बार-बार आ रही हैं और उसके कर्मचारियों से पूछताछ कर रही हैं।

एचआरडीएस ने बयान में कहा, ‘‘भले ही हमने उन्हें पद से हटा दिया है, लेकिन संगठन के साथ अवैतनिक काम करने के उनके अनुरोध पर विचार करने के बाद, हमने उन्हें महिला अधिकारिता समिति की अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने का फैसला किया है। संगठन उन लोगों को कोई वेतन नहीं देता है जो अध्यक्ष/अध्यक्ष पदों पर हैं।’’

एनजीओ ने बर्खास्तगी पत्र में कहा कि केरल सरकार हर तरह से संगठन के खिलाफ है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।

केरल राज्य अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति आयोग ने पहले एनजीओ के खिलाफ इन शिकायतों पर कार्रवाई शुरू की थी कि उसने अट्टापडी और अन्य जगहों पर आदिवासियों के लिए ‘‘ऐसे मकानों का निर्माण किया था जो रहने योग्य नहीं हैं।’’

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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