(विशु अधाना)
नयी दिल्ली, 30 दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिला प्रक्रिया तथा शिक्षण में एक साझा प्रवेश परीक्षा की शुरुआत एवं नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को अपनाने के साथ शिक्षा के क्षेत्र में इस साल आमूलचूल बदलाव हुआ।
शैक्षणिक सत्र 2022-23 से छात्रों को दाखिला देने की पुरानी नीति को छोड़कर, विश्वविद्यालयों ने या तो आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) को अपनाया।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) पहले छात्रों को उनके कक्षा 12 के अंकों के आधार पर प्रवेश देता था, वहीं जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं होती थीं।
इंजीनियरिंग कॉलेजों के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा-मेन्स (जेईई) के बाद 14.9 लाख से अधिक उम्मीदवारों के भाग लेने के साथ सीयूईटी देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा बन गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा इस साल पहली बार आयोजित सीयूईटी के परीक्षा केंद्रों में अंतिम समय में बदलाव और परीक्षाओं को स्थगित करने तथा कार्यक्रम में देरी के कारण उम्मीदवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
नयी दाखिला प्रक्रिया के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने 67 कॉलेजों, विभागों और केंद्रों में 79 स्नातक कार्यक्रमों में छात्रों को प्रवेश दिया। सितंबर में, इसने सामान्य सीट आवंटन प्रणाली के माध्यम से प्रवेश पाने वालों के लिए एक ऑनलाइन मंच भी शुरू किया था। सीयूईटी के माध्यम से, जेएनयू ने 10 स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया, जिनमें से अधिकतर विदेशी भाषाओं में कला स्नातक (ऑनर्स) पाठ्यक्रम थे।
हालांकि, जेएमआई सहित कुछ विश्वविद्यालयों ने सीयूईटी प्रक्रिया को आंशिक रूप से अपनाया। जेएमआई ने साझा परीक्षा के जरिए छात्रों को 10 पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया, जबकि अन्य कार्यक्रमों में प्रवेश विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित परीक्षा के जरिए दिया गया।
इस शैक्षणिक सत्र से, विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू किया, जिसमें स्कूल के साथ-साथ तकनीकी शिक्षा सहित उच्च शिक्षा में सुधार का प्रस्ताव है। इस नीति में पाठ्यक्रम के बीच बहु प्रवेश और निकास विकल्पों के साथ बहुभाषावाद और भारतीय भाषाओं, समग्र तथा बहु-विषयक शिक्षा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है।
नयी नीति ने 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनपीई) की जगह ली है और इसका उद्देश्य 2030 तक 100 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात के साथ प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तक शिक्षा का सार्वभौमिकरण करना है। इसमें उच्च शिक्षा में अनुपात को बढ़ाकर 2025 तक 50 प्रतिशत करने का भी लक्ष्य है।
दिल्ली विश्वविद्यालय एनईपी-2020 द्वारा निर्धारित चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को अपनाने वाला पहला केंद्रीय विश्वविद्यालय बन गया है। जामिया और जेएनयू भी इस नीति को लागू कर रहे हैं।
वर्ष की शुरुआत के दौरान, जैसे-जैसे देश भर में कोविड-19 की स्थिति में सुधार हुआ, विश्वविद्यालयों को फिर से खोलने की मांग तेज हो गई। छात्र संगठनों ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन किया और मांग की कि प्रमुख विश्वविद्यालय ‘ऑनलाइन मोड’ से प्रत्यक्ष तरीके से पठन-पाठन की ओर बढ़ें।
उन्होंने दावा किया था कि शैक्षणिक परिसर लगभग दो साल से बंद थे और पठन-पाठन ऑनलाइन था, जिससे ‘‘शिक्षा का स्तर गिर गया’’ और निम्न-आय वर्ग तथा ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की डिजिटल तरीके से पठन-पाठन के लिए उपकरणों तक पहुंच नहीं थी। फरवरी में, डीयू, जेएनयू और जेएमआई राष्ट्रीय राजधानी के उन विश्वविद्यालयों में शामिल थे, जिन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए प्रत्यक्ष तरीके से कक्षाएं शुरू की थीं।
इस वर्ष, जेएनयू में पहली बार महिला कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित (59) को नियुक्त किया गया। राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर और विश्वविद्यालय की पूर्व छात्रा पंडित ने जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एम.फिल और पीएचडी पूरी की है।
अप्रैल में, वाम समर्थित ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन के नेतृत्व वाले जेएनयू छात्र संघ ने आरोप लगाया था कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्यों ने छात्रों को मांसाहारी भोजन खाने से रोक दिया जिसके बाद एक छात्रावास में झड़पें हुईं। एबीवीपी पर कावेरी छात्रावास के मेस सचिव के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया था।
एबीवीपी ने आरोपों से इनकार किया था और दावा किया था कि ‘‘वामपंथियों’’ ने रामनवमी पर छात्रावास में आयोजित पूजा कार्यक्रम में बाधा डाली थी। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर पथराव करने का आरोप लगाया था। दिसंबर में, जेएनयू की एक इमारत की कई दीवारों पर ‘‘ब्राह्मण विरोधी’’ नारे लिखे हुए थे, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं।
इस साल दिल्ली विश्वविद्यालय और उसके अंतर्गत आने वाले कॉलेज सेंट स्टीफंस के बीच दाखिले के लिए साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर खींचतान भी देखी गई। बाद में मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा जिसने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। दिल्ली उच्च न्यायालय ने सितंबर में सेंट स्टीफंस कॉलेज को विश्वविद्यालय की दाखिला प्रक्रिया का पालन करने को कहा था।
भाषा आशीष नरेश
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