नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने मंगलवार को कहा कि सस्ते बर्तनों, पांरपरिक दवाओं और सौंदर्य प्रसाधन में सीसे की मौजूदगी समस्या है और इसके बारे में जागरूकता का अभाव है।
पहले इंडिया फाउंडेशन, प्योर अर्थ, एशियाई विकास बैंक और यूनीसेफ के सहयोग से ‘सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट’ द्वारा आयोजित गोलमेज सम्मेलन को संबोधित करते हुए भूषण ने कहा कि भारत में परिचालित करीब 1,60,000 आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं आरोग्य क्लीनिक के जरिये सीसे के विषैले प्रभाव के बारे में जागरूकता फैलाने की जरूरत है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि सीसे का विषैला प्रभाव भारत के स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण और आर्थिक विकास के लिए गंभीर खतरा है।
‘सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट’ के वरिष्ठ शोधार्थी रशेल सिल्वरमैन बोन्नीफील्ड ने कहा कि सीसा धीमा जहर है जो हमारे बच्चों की क्षमता को बाधित कर रहा है और हृदय संबंधी रोगों का बोझ बढ़ा रहा है।
उल्लेखनीय है कि सीसा घातक जहर है जो कम स्तर होने पर भी बहुत अधिक क्षति पहुंचाता है। बचपन में सीसे के संपर्क में आने से बच्चे का सामान्य संज्ञानात्मक विकास नहीं हो पाता जिससे उसकी सीखने की क्षमता बाधित होती है और उसे व्यवहारगत समस्या भी होती है।
वयस्को को सीसे के संपर्क में आने से उच्च रक्तचाप और हृदयघात का खतरा बढ़ता है।
गौरतलब है कि सीसा युक्त पेट्रोल का उपयोग चरणबद्ध तरीके से समाप्त किए जाने के बावजूद, अनुमान है कि दुनिया का हर तीन में से एक बच्चा सीसे की विषाक्तता से प्रभावित है और भारत में आधे बच्चे इससे प्रभावित हैं।
भाषा धीरज मनीषा
मनीषा
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.