नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बृहस्पतिवार को चीन की ओर इशारा करते हुए कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में ‘एक प्रतिस्पर्धी’ द्वारा की जा रही तेज गति से प्रगति का मुकाबला करने के लिए देश को अंतरिक्ष क्षमताएं बढ़ाने पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।
इंडियन डिफेंस स्पेस सिम्पोजियम के समापन सत्र को संबोधित करते हुए जनरल चौहान ने देश की अंतरिक्ष संपदा की सुरक्षा पर ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया, ताकि भविष्य के अंतरिक्ष युद्ध की स्थिति में वे काम आ सकें।
सीडीएस ने कहा कि अपने खुद के साइबर को सुरक्षित बनाना और ‘क्वांटम इनक्रिप्शन’ के जरिये अंतरिक्ष आधारित ‘हाई-स्पीड’ संचार प्रणाली तैयार करना जरूरी है।
चौहान ने कहा, ‘‘हम अन्य प्रतिस्पर्धी की क्षमता की बात कर रहे हैं, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह बहुत तेजी से और जल्द ही अपने करीबी प्रतिस्पर्धी से अंतरिक्ष क्षमताओं को छीन लेगा। इससे सिर्फ यह संकेत मिलता है कि हमें विकसित की जा रही अपनी क्षमताओं एवं उनका मुकाबला करने की शक्ति पर और ध्यान देने की जरूरत है। यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा कि पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों, लघु सेंसर और पुन:उपयोग में लाये जाने वाले रॉकेट द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं का उपयोग करने का वक्त आ गया है, ताकि सटीक खुफिया तस्वीरें वास्तविक समय पर मिल सके।
उन्होंने कहा, ‘‘एक सुरक्षित और विश्वसनीय ‘अंतरिक्ष यात्री’ हमारी जरूरतों को पूरा करेगा और सामरिक मिसाइल सहित रासायनिक हथियार प्रणालियों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हैं।’’ नाविक एक भारतीय दिशा-सूचक उपग्रह प्रणाली है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मई 2022 तक भारत के 29 उपग्रहों की तुलना में चीन के 541 उपग्रह सेवा दे रहे थे। भारत के इन उपग्रहों में छह का निर्माण विश्वविद्यालयों और स्टार्टअप ने किया है।
वहीं, प्रक्षेपण की कोशिशों के मामले में, 2022 में चीन ने इस तरह के 64 प्रक्षेपण किये, जबकि भारत ने पांच प्रक्षेपण किये।
सीडीएस ने स्वदेश विकसित एक चिप का भी अनावरण किया, जो भारत में दिशा सूचक उपग्रह प्रणाली, अवस्थिति बताने और ‘टाइमिंग’ अनुप्रयोगों के लिए मददगार साबित हो सकता है।
भाषा सुभाष माधव
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