(सलोनी भाटिया और विनोद त्रिपाठी)
नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली के वित्त मंत्री कैलाश गहलोत ने केंद्र शासित प्रदेश के लिए अगले वित्त वर्ष का बजट पेश करने के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को कहा कि केंद्रीय अनुदान में कमी के मद्देनजर शहर की सरकार की सबसे बड़ी चिंता राजस्व में इजाफा करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और उपराज्यपाल द्वारा बार-बार हस्तक्षेप करने की वजह से आम आदमी पार्टी (आप) नीत सरकार को अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
गहलोत ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हर काम के लिए पहले केंद्र और उपराज्यपाल की मंजूरी लेनी पड़ती है,जिसकी वजह से निर्णय की प्रक्रिया में देरी होती है।’’
उन्होंने कहा कि ‘आप’ सरकार अगर कोई काम करने की कोशिश करती है, तो उसमें बाधा उत्पन्न की जाती है।
गहलोत ने बुधवार को विधानसभा में बजट पेश करते हुए दावा किया था कि केंद्रीय कर पूल से दिल्ली को 325 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि यहां से 1.75 लाख करोड़ रुपये आयकर जमा हो रहा है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 से दिल्ली को 325 करोड़ रुपये भी नहीं दिए जाएंगे, जो राष्ट्रीय राजधानी के साथ ‘‘आर्थिक भेदभाव’’ और ‘‘घोर अन्याय’’ है।
गहलोत ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘यह हमारा अधिकार है। दिल्ली के कर में हमारा हिस्सा है। हम अदालत जाने पर विचार कर रहे हैं।’’
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अदालत का रुख करेंगे, तो गहलोत ने कहा, ‘‘हमें हर काम के लिए अदालत जाना पड़ता है।’’
अपने बजट भाषण के दौरान गहलोत ने कहा था कि वह पूर्व वित्त मंत्री मनीष सिसोदिया की कमी महसूस कर रहे हैं, जिन्हें दिल्ली आबकारी नीति में कथित घोटाले के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह अनुभव (बजट पेश करने का) शानदार था, लेकिन हम मनीष सिसोदिया की कमी महसूस कर रहे थे। न केवल केजरीवाल सरकार, बल्कि पूरी दिल्ली उनकी कमी महसूस कर रही थी, क्योंकि सिसोदिया और दिल्ली का बजट एक-दूसरे के पर्याय बन गए थे।’’
गहलोत ने यह भी उम्मीद जताई कि सिसोदिया की जल्द वापसी होगी और वह अपनी जिम्मेदारी दोबारा संभालेंगे।
गौरतलब है कि केंद्र और ‘आप’ सरकार में विभिन्न मदों में आवंटन को लेकर हुई खींचतान की वजह से दिल्ली का बजट एक दिन की देरी से बुधवार को पेश किया गया।
गहलोत ने कहा, ‘‘यहां कुछ भी आसान नहीं है, फिर चाहे दिल्लीवालों को योग का प्रशिक्षण देना हो, शिक्षकों को फिनलैंड भेजना हो, किसी मंत्री को नयी प्रौद्योगिकी सीखने के लिए विदेश जाना हो या स्वयं मुख्यमंत्री को सिंगापुर जाना हो।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हम दिल्ली वालों से किए गए वादों को लेकर प्रतिबद्ध हैं और उन्हें पूरा करेंगे, भले ही हमें उसके लिए लड़ना पड़े।’’
दिल्ली सरकर ने बुधवार को पेश बजट में आबकारी विभाग के राजस्व में कमी आने की पूर्वानुमान लगाया है।
सरकार ने वर्ष 2022-23 के बजट में आबकारी से 9,500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का आकलन किया था, जबकि वर्ष 2023-24 के बजट में अनुमान है कि इस स्रोत से मात्र 7,365 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होगा।
जब गहलोत से पूछा गया कि राजस्व में कमी को वह कैसे पूरा करेंगे, तो उन्होंने कहा, ‘‘हम विभिन्न स्रोतों से राजस्व एकत्र करने का प्रयास कर रहे हैं। राजस्व में आई कमी को पूरा करना मुख्य चिंता है। हम बैठेंगे, विचार करेंगे और देखेंगे कि क्या किया जा सकता है। माल एवं सेवाकर (जीएसटी) संग्रह अच्छा है, लेकिन इसमें अब भी सुधार की गुंजाइश है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर नयी नीति (2021-22) जारी रहती, तो मेरा मानना है कि यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। ऐसी ही नीति पंजाब में बेहतर कर रही है। यह अच्छी नीति थी, लेकिन समस्या खड़ी की गई। हम जो भी काम करना चाहते हैं, उसकी राह में समस्या खड़ी कर दी जाती है।’’
वित्त मंत्री के तौर पर पहली बार बजट पेश करने के अनुभव के बारे में पूछे जाने पर गहलोत ने कहा कि यह जिम्मेदारी उन्हें ‘‘आखिरी समय में मिली।’’
अरविंद केजरीवाल नीत मंत्रिमंडल से सिसोदिया के इस्तीफे के बाद 28 फरवरी को गहलोत को वित्त विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। इससे पहले, सिसोदिया दिल्ली सरकार के 33 में से 18 विभाग संभाल रहे थे।
गहलोत ने कहा, ‘‘मैं पेशे से एक वकील हूं। मैंने बजट को एक वकील के तौर पर मुकदमे की तरह तैयार किया। कई बार होता है कि आखिरी समय में काम आ जाता है और मैंने बजट को ऐसी ही कार्य के तौर पर लिया। मेरी पूरी टीम, चतुर्थ श्रेणी कर्मी से लेकर सचिव तक ने देर रात तक काम किया और मैं नहीं मानता कि हम किसी दिन रात 11 बजे से पहले कार्यालय (सचिवालय) से घर गए।’’
पिछले साल दिल्ली सरकार ने रोजगार बजट घोषित किया था, जिसमें रोजगार के अवसर सृजित करने पर जोर दिया गया था, लेकिन गहलोत के बजट भाषण में इसका उल्लेख नहीं था।
इस पर उन्होंने कहा, ‘‘रोजगार बजट की कुछ पहलें पटरी पर हैं, लेकिन दिल्ली शॉपिंग फेस्टिवल, फूड ट्रक नीति, बाजारों के पुनर्विकास जैसी कुछ पहलों पर काम आगे नहीं बढ़ सका है। हम इन नीतियों पर दोबारा काम करेंगे और आगे बढ़ेंगे।’’
स्वास्थ्य और परिवहन क्षेत्र के बजट आवंटन में कमी के मुद्दे पर गहलोत ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य ‘आप’ सरकार की प्राथमिकता बना रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले साल कुल बजट का 22 प्रतिशत शिक्षा के लिए आवंटित किया गया था, जबकि इस साल यह आंकड़ा 21.7 प्रतिशत है। गत वर्षों में कक्षाओं के निर्माण जैसे अवसंरचना विकास के लिए राशि आवंटित की गई। इस क्षेत्र को बेहतर आवंटन किया गया है।’’
बजट में दिल्ली नगर निगम के तीन लैंडफिल में कूड़े के पहाड़ों का निस्तारण करने के लिए नगर निगम को 850 करोड़ रुपये का ऋण देने का प्रस्ताव किया गया है।
गहलोत ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल खुद इन कूड़े के पहाड़ों की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने ओखला और भलस्वा का दौरा किया है और जल्द गाजीपुर लैंडफिल जाएंगे। हमें भरोसा है कि हम तय समयसीमा में काम पूरा कर लेंगे और दो साल में लैंडफिल में कूड़े के पहाड़ का निस्तारण कर लेंगे।’’
भाषा धीरज पारुल
पारुल
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
