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Saturday, 3 January, 2026
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बंगाल में करीब 10 लाख एसआईआर गणना प्रपत्र अब तक नहीं जमा हुए : सीईओ

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कोलकाता, 24 नवंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) मनोज कुमार अग्रवाल ने सोमवार को बताया कि राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के तहत अब तक 10 लाख से अधिक गणना प्रपत्र वापस जमा नहीं हुए हैं।

उन्होंने कहा कि ये गणना प्रपत्र जमा नहीं हो सके, क्योंकि मतदाता या तो अनुपस्थित हैं, नाम का दोहराव है, या मृत हैं या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए हैं।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘सोमवार शाम चार बजे तक 4.55 करोड़ गणना प्रपत्रों का संग्रह और डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। इनमें से 10.33 लाख गणना प्रपत्र एकत्र नहीं किए जा सके। यह वास्तविक समय के आंकड़े हैं।’’ उन्होंने बताया कि राज्य में 7.64 करोड़ गणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं।

अग्रवाल ने कहा कि फिलहाल, वितरित किए गए कुल गणना प्रपत्रों में से 1.35 प्रतिशत प्रपत्र वापस नहीं मिले हैं।

सीईओ ने एसआईआर में बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि वे इस कार्य के असली नायक हैं।

उन्होंने कहा कि कई बीएलओ मतदाताओं तक पहुंचने और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कार्यालय समय से परे भी काम कर रहे हैं।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘बीएलओ सराहनीय काम कर रहे हैं। वे एसआईआर प्रक्रिया के असली नायक हैं। यह प्रक्रिया चार नवंबर को शुरू हुई और 20 दिनों के भीतर उन्होंने सात करोड़ से अधिक मतदाताओं से संपर्क किया है, जो कोई आसान काम नहीं है।’’

राज्य में एसआईआर के लिए 80,600 से अधिक बीएलओ, लगभग 8,000 पर्यवेक्षक, 3,000 सहायक मतदाता पंजीयक अधिकारी और 294 मतदाता पंजीयक अधिकारी (ईआरओ) नियुक्त किए गए हैं।

एक अधिकारी ने बीएलओ के समक्ष आ रही इंटरनेट संबंधी समस्याओं के बारे में पूछे गए सवाल पर कहा कि निर्बाध कनेक्टिविटी के लिए वाईफाई हब स्थापित किए गए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जिला मजिस्ट्रेट, ईआरओ और बीडीओ कार्यालयों में बीएलओ को डेटा एंट्री में मदद के लिए हेल्प डेस्क हैं। जहां भी इंटरनेट की समस्या है, वहां अलग से वाईफाई हब स्थापित किए गए हैं।’’

सीईओ ने कहा कि यदि कोई बीएलओ बीमार होता है तो उसकी चिकित्सा देखभाल की जिम्मेदारी जिलाधिकारी की होगी।

उन्होंने कहा कि ईआरओ को कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए वैकल्पिक बीएलओ नियुक्त करने का पूर्ण विवेकाधिकार है।

अग्रवाल ने कहा, ‘‘यदि किसी बीएलओ की मृत्यु हो जाती है, तो जिलाधिकारियों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसे दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग मुख्यालय भेजा जाएगा।’’

राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान अब तक तीन बीएलओ की मौत हुई है।

अग्रवाल ने रेखांकित किया कि पश्चिम बंगाल एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां बीएलओ के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है और गलतियों को सावधानी के साथ दूर किया जा रहा है, लेकिन ‘‘जानबूझकर गलत काम करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी’’।

राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के लिए राज्य स्तरीय सहायता केंद्रों में संविदा पर नियुक्त डेटा एंट्री ऑपरेटरों की सेवा लेने पर रोक लगाने के फैसले पर चिंता जताई है। इस बारे में पूछे जाने पर अग्रवाल ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग के निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संविदा पर कर्मचारियों को नियुक्त नहीं किया जा सकता। हमने बिहार जैसी ही निविदा प्रक्रिया अपनाई है।’’

ममता बनर्जी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर एसआईआर से संबंधित दो मुद्दों पर ‘तत्काल हस्तक्षेप’ की मांग की, जिसमें डेटा एंट्री ऑपरेटरों से संबंधित मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने निजी आवासीय परिसरों के अंदर मतदान केन्द्र स्थापित करने के निर्वाचन आयोग के प्रस्ताव पर भी आपत्ति जताई है।

इस बारे में पूछे जाने पर सीईओ ने कहा, ‘‘यह एक नीतिगत निर्णय है। निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय लिया है। मैं स्वयं कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेता।’’

सीईओ कार्यालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया की प्रगति के मामले में शीर्ष पांच जिले पूर्व बर्धमान (66.47 प्रतिशत), अलीपुरद्वार (66.41 प्रतिशत), उत्तर दिनाजपुर (65.43 प्रतिशत), मालदा (66.23 प्रतिशत) और पूर्व मेदिनीपुर (65.27 प्रतिशत) हैं।

उत्तर 24 परगना जिले के गोसाबा विधानसभा क्षेत्र को राज्य में एसआईआर की प्रक्रिया में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला निर्वाचन क्षेत्र माना गया, जहां 121 बीएलओ ने अपने निर्धारित कार्यों को 100 प्रतिशत पूरा किया।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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