नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुंसधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की एक पाठ्यपुस्तक ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ अध्याय को लेकर विवादों के केंद्र में रही और उक्त अध्याय की वजह से उच्चतम न्यायालय ने यह कहते हुए पुस्तक पर ‘पूर्ण प्रतिबंध’ लगा दिया है कि इसमें ‘‘आपत्तिजनक’’ सामग्री है।
एनसीईआरटी विभिन्न प्रक्रियाओं का अनुपालन करते हुए पाठ्यपुस्तक तैयार करती है जो इस प्रकार है।
1) यह एक आदमी का काम नहीं
एनसीईआरटी के अधिकारियों के मुताबिक पाठ्यपुस्तक किसी एक लेखक द्वारा तैयार नहीं की जाती है, बल्कि एक कठोर प्रक्रिया से गुजरती है जिसमें कई विशेषज्ञों की मदद से सामग्री तैयार होती है।
2) ‘‘करिकुलम एरिया ग्रुप’’ (सीएजी)
प्रत्येक विषय के लिए एक सीएजी का गठन किया जाता है, जो पाठ्यपुस्तक तैयार करने के लिए उपयुक्त विशेषज्ञों की खोज करता है। सीएजी इस बात का विश्लेषण करता है कि छात्रों के लिए तैयार की जा रही सामग्री की खातिर किसका अनुभव और अकादमिक ज्ञान लाभकारी होगा।
3) पाठ्यपुस्तक विकास समिति (टीडीसी)
इसके बाद उपरोक्त समूह प्रत्येक विषय के लिए पाठ्यपुस्तक विकास समिति (टीडीसी) का गठन करता है, जिसमें शिक्षाविद, पाठ्यक्रम निर्माण विशेषज्ञ, विषयों के विशेषज्ञ और उद्योग विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
4) बहुस्तरीय समीक्षा
शिक्षण एवं विकास समितियों द्वारा तैयार अध्यायों के मसौदे को अनुमोदन से पहले आमतौर पर कई स्तरों पर आंतरिक समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया से गुज़रना होता है। एनसीईआरटी अधिकारियों के अनुसार, पाठ्यपुस्तक तैयार करने और उसकी समीक्षा की प्रक्रिया अकादमिक दृष्टि से गहन और परामर्शपरक होती है।
5) मंजूरी
बहुस्तरीय समीक्षा के बाद, सीएजी और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री समिति (एनएसटीसी) विषयवस्तु की तथ्यात्मक शुद्धता और आयु-उपयुक्तता को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी देते हैं।
6) क्या उद्योग विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों या प्राधिकारियों से परामर्श लिया जाता है?
किसी विशेष क्षेत्र की ज्ञान संबंधी आवश्यकताओं पर राय लेने के लिए प्रत्येक टीडीसी में कुछ उद्योग विशेषज्ञ शामिल होते हैं। आवश्यकता पड़ने पर कुछ मामलों में सरकारी अधिकारियों या प्राधिकरणों से परामर्श लिया जाता है, लेकिन यह प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।
7) फीडबैक को कैसे शामिल किया जाता है?
पाठ्यपुस्तक की विषयवस्तु के संबंध में जब भी सुझाव या महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो एनसीईआरटी सामग्री की जांच और समीक्षा के लिए समितियां गठित करती है। यह स्थापित प्रक्रिया दर्शाती है कि पाठ्यपुस्तक की विषयवस्तु स्थिर नहीं है, बल्कि समय-समय पर उसकी समीक्षा की जाती है।
8) इस विवादास्पद पाठ्यपुस्तक में किसने योगदान दिया?
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तक, जिस पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है, में 60 से अधिक योगदानकर्ताओं के नाम सूचीबद्ध हैं। हालांकि, अधिकारियों ने इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं की कि विशिष्ट भाग में किसने योगदान दिया था।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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