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Monday, 19 January, 2026
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नजरबंदी के दौरान नवी मुंबई में नवलखा का नया पता होगा- माकपा पुस्तकालय, अगरोली गांव

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मुंबई, 20 नवम्बर (भाषा) मुंबई के सेटेलाइट सिटी नवी मुंबई के एक गांव का एक गुमनाम पुस्तकालय अचानक विभिन्न गतिविधियों से गुलजार हो गया है, क्योंकि सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के बीच पुलिसकर्मी इसके आसपास सख्त पहरा दे रहे हैं। ग्रामीणों को इस बात की जानकारी नहीं है कि गौतम नवलखा कौन हैं, लेकिन वे एक मंजिला भवन में रहने आये ‘शक्तिशाली’ व्यक्ति के बारे में दबी जुबान से चर्चा करते नजर आ रहे हैं।

नवी मुंबई के सीबीडी बेलापुर स्थित अगरोली गांव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पुस्तकालय के बाहर पुलिसकर्मियों का यह नजारा ग्रामीणों को कम से कम एक महीने तक देखने को मिलेगा, क्योंकि यही वह जगह है, जहां एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी नवलखा नजरबंद रहेंगे।

अदालत के आदेश के बाद जेल से रिहा होने के बाद शनिवार शाम को उन्हें नजरबंद कर दिया गया।

सत्तर-वर्षीय नवलखा के लिए कॉमरेड बी टी रणदिवे मेमोरियल लाइब्रेरी की पहली मंजिल पर एक बड़ा हॉल उनका नया घर है, जहां वह अब अपनी साथी सहबा हुसैन (71) के साथ रह रहे हैं। नवी मुंबई पुलिस की एक टीम अब जिस इमारत की रखवाली कर रही है, वह माकपा के स्वामित्व में है। पुस्तकालय भूतल पर है, जबकि नवलखा और उनकी साथी ऊपर की मंजिल पर रहते हैं।

दो साल से अधिक समय के बाद नवलखा की नवी मुंबई की तलोजा जेल से रिहाई चिकित्सा के आधार पर घर में नजरबंद करने की उनकी याचिका को शीर्ष अदालत द्वारा मंजूर किये जाने के नौ दिन बाद हुई।

एक ग्रामीण ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘अधिकांश स्थानीय निवासी नहीं जानते कि नवलखा कौन है और उन्हें किस अपराध के लिए घर में नजरबंद रखा गया है।’’

अधिकारियों सहित कम से कम छह पुलिसकर्मियों को पुस्तकालय भवन के प्रवेश द्वार पर देखा गया। भवन की पहली मंजिल के प्रवेश द्वार पर एक डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर लगाया गया है और पुलिस को हाथ से पकड़कर इस्तेमाल करने वाले मेटल डिटेक्टर का भी उपयोग करते देखा गया।

इसके अलावा, पहली मंजिल की सीढ़ियों और भवन के पीछे के क्षेत्र की गतिविधियों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि पहली मंजिल के हॉल में एक नया डिश टीवी लगाया गया है, जहां नवलखा ठहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए एक नया रेफ्रिजरेटर भी लाया गया है।

एक ग्रामीण संदेश पाटिल ने कहा, ‘‘हालांकि नवलखा को इमारत में नजरबंद रखा गया है, लेकिन स्थानीय लोग उनके बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नवलखा के रहने के लिए भवन को अंतिम रूप दिए जाने के बाद, नवी मुंबई पुलिस की टीम और राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के अधिकारियों ने दो दिन पहले जमीनी कार्य तैयार करने के लिए परिसर का दौरा करना शुरू कर दिया था, लेकिन हमें इस बारे में सही जानकारी नहीं है कि वह यहां क्यों हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह पहली बार है कि मैंने अपने गांव में इतने सारे पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों को देखा है।’’

पाटिल ने कहा, ‘‘मीडिया में खबर आने के बाद ही लोगों को उनकी नजरबंदी के बारे में पता चला, लेकिन वे अब भी नहीं जानते कि वह वास्तव में हैं कौन।’’

पुस्तकालय भवन के सामने एक जनरल स्टोर चलाने वाले प्रदीप वर्मा ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वास्तव में नवलखा कौन हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह कोई शक्तिशाली व्यक्ति ही होंगे, क्योंकि चौबीसों घंटे भारी पुलिस बल तैनात है।’’

एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पहले दिन नवलखा की साथी सहबा हुसैन घर से बाहर निकलीं और उन्होंने बैंगन, टमाटर जैसी कुछ सब्जियां और रोजाना इस्तेमाल होने वाली कुछ चीजें खरीदीं।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से अंदर जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति तथा खाने-पीने की सामग्री एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की भी जांच की जा रही है।

भाषा सुरेश नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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