कलुगोटला (आंध्र प्रदेश), छह फरवरी (भाषा) आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शासन के दौरान तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को ‘तिरुपति लड्डू’ बनाने के लिए आपूर्ति किए गए घी में शौचालय साफ करने में इस्तेमाल होने वाली रासायनिक सामग्री की मिलावट थी।
कुरनूल जिले के कलुगोटला गांव में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने मिलावटी प्रसाद के माध्यम से भगवान वेंकटेश्वर स्वामी की प्रतिष्ठा को धूमिल करने का प्रयास किया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि वाईएसआरसीपी शासन के दौरान श्रीशैलमर को आपूर्ति किए गए घी में भी मिलावट की गई थी।
येम्मिगनूर निर्वाचन क्षेत्र में पट्टादार पासबुक (भूमि दस्तावेज) वितरण कार्यक्रम के इतर नायडू ने दावा किया, ‘‘वाईएसआरसीपी की पिछली सरकार के दौरान शौचालय साफ करने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों से बने घी का इस्तेमाल लड्डूओं को बनाने में किया गया।’’
नायडू ने कहा कि रसायनों से युक्त मिलावटी घी का इस्तेमाल पांच साल तक लड्डू बनाने में किया गया।
उन्होंने कहा कि दो प्रकार के रसायन होते हैं, जिनमें से कुछ वनस्पति मूल के होते हैं, जो महंगे होते हैं। उन्होंने बताया कि पशु वसा की कीमत कम होती है।
नायडू ने कहा कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि पशु वसा का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि एक भक्त होने के नाते, उन्हें वेंकटेश्वर स्वामी की पवित्रता को ध्यान में रखते हुए ज्यादा नहीं कहना चाहिए।
वाईएसआरसीपी नेता यह तर्क दे रहे हैं कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( सीबीआई) के नेतृत्व वाली एसआईटी ने मिलावट न होने की पुष्टि करते हुए क्लीन चिट दे दी है, वहीं तेदेपा प्रमुख ने दावा किया कि वाईएस जगन मोहन रेड्डी के रिश्तेदार वाईवी सुब्बा रेड्डी ने कहा था कि मिलावट हुई थी।
नायडू ने कहा कि उन्होंने टीटीडी को मिलावटी प्रसाद से अपवित्र करने की कथित गलती को सुधारने की कोशिश की और कहा कि वर्तमान लड्डू और पहले वाले लड्डू में बहुत अंतर है।
नायडू ने बृहस्पतिवार को संवाददाता सम्मेलन में तिरुपति के लड्डू में कथित मिलावटी घी के मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के बाद सुधारात्मक कदम उठाने के लिए एक सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की थी।
नायडू ने कहा था कि वर्ष 2022 में, जब वाईएसआरसीपी सत्ता में थी, उस समय केंद्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी अनुसंधान संस्थान (सीएफटीआरआई) की रिपोर्ट में भी मिलावटी घी की बात स्पष्ट रूप से सामने आई थी।
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देवेंद्र नरेश
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