नयी दिल्ली, 27 फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एनएएसी) ने आवश्यक गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करने वाले समीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अपने कुल मूल्यांकनकर्ताओं के पांचवें हिस्से को हटा दिया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एनएएसी ने उस समिति की सिफारिशों के आधार पर 1,000 से अधिक नए समीक्षकों को भी नियुक्त किया है, जिसमें कई विश्वविद्यालयों के कुलपति शामिल थे।
मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे एनएएसी ने कॉलेजों का भौतिक निरीक्षण भी रोक दिया है और प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है।
एनएएसी एक स्वायत्त निकाय है जिसकी स्थापना विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा 1994 में उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) का व्यवस्थित रूप से मूल्यांकन और मान्यता देने के लिए की गई थी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है।
अधिकारियों के अनुसार, एनएएसी के पास 7,000 से अधिक मूल्यांकनकर्ता थे जो संस्थानों की ग्रेडिंग के दौरान उच्च शिक्षण संस्थानों का मूल्यांकन करने के लिए जिम्मेदार थे।
एनएएसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘विभिन्न क्षेत्रों में मूल्यांकनकर्ताओं का अलग-अलग समूह होता था, कभी-कभी उन्हें दूसरे क्षेत्रों में भी जाना पड़ता था। मूल्यांकनकर्ताओं के काम और आचरण की समीक्षा लंबे समय से प्रक्रिया का हिस्सा रही है, लेकिन कई अनियमितताओं के कारण इस बार कड़ी कार्रवाई की गई। हमने कुल मूल्यांकनकर्ताओं के पांचवें हिस्से को हटा दिया है।’’
अधिकारी ने कहा, ‘‘समीक्षा के आधार पर कुछ को छह महीने के लिए, कुछ को एक साल के लिए हटाया गया है, तथा कुछ को प्रतिबंधित किया गया है। हमने समानांतर रूप से 1,000 से अधिक नए समीक्षकों की भर्ती भी की है, जिन्हें अब प्रशिक्षित किया जाएगा।’’
यह कार्रवाई गुंटूर स्थित केएलईएफ द्वारा अपने विश्वविद्यालय को ‘ए++’ रेटिंग दिलाने के बदले में एनएएसी टीम को कथित तौर पर रिश्वत देने की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के बाद की गई।
भाषा शफीक नेत्रपाल
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