नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) सांसदों, कई छात्र संगठनों और शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को एक साझा प्रेसवार्ता कर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के साथ एकजुटता दिखायी और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ हाल ही में की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई का विरोध किया।
वक्ताओं ने कहा कि जेएनयू प्रशासन को सभी जेएनयूएसयू पदाधिकारियों के साथ-साथ छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष का निष्कासन वापस लेना चाहिए और छात्रों पर लगाए गए जुर्माने को भी वापस लेना चाहिए।
भाकपा (माले) लिबरेशन के नेता एवं लोकसभा सदस्य राजा राम सिंह ने कहा कि चार पदाधिकारियों का निष्कासन करना गलत है, और पुस्तकालय सभी छात्रों के लिए खुला होनी चाहिए।
सिंह ने कहा, ‘‘2014 से सरकार जेएनयू को तोड़ने की पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए हैं।’’
माकपा नेता एवं राज्यसभा सदस्य वी. शिवदासन ने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय प्रशासन आज पुस्तकालय तक पहुंच सीमित करके छात्रों और उनके शोध के खिलाफ खड़ा है। वे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।’’
कांग्रेस सांसद शशिकांत सेंथिल ने कहा कि छात्रसंघ पदाधिकारियों का विश्वविद्यालय से निष्कासन एक अभूतपूर्व कदम है, क्योंकि विश्वविद्यालय बेहतर शिक्षा देने के बजाय धीरे-धीरे निगरानी की तरफ ध्यान केंद्रित कर रहा है।
जेएनयू और दिल्ली विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों ने भी प्रेसवार्ता को संबोधित किया।
जेएनयू प्रशासन ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
जेएनयू प्रशासन ने पीएचडी के पांच छात्रों को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया है, जिनमें जेएनयूएसयू के चार पदाधिकारी शामिल हैं। इन विद्यार्थियों को 21 नवंबर, 2025 को डॉ. बी. आर. आंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में प्रवेश द्वार पर लगे ‘चेहरे की पहचान प्रौद्योगिकी’ (एफआरटी) उपकरण में तोड़फोड़ करने का दोषी पाया गया था।
भाषा शफीक पवनेश
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