Wednesday, 7 December, 2022
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चमत्कार, जाति और गिरफ्तारियांः UP के फतेहपुर में क्रिश्चियन ‘कनवर्जन’ की इनसाइड स्टोरी

विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस साल जनवरी से अब तक हुई 55 गिरफ्तारियों के साथ पुलिस अवैध धर्मांतरण की शिकायतों के मामले में आखिरकार उनके साथ 'सहयोग' कर रही है. लेकिन जमीन पर इस पुरे मामले की एक जटिल तस्वीर सामने आती है.

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फतेहपुर: हारमोनियम बजाते हुए और प्रभु यीशु के वचनों का प्रचार करते हुए, पेंटेकोस्टल-शैली के आस्था- आधारित उपचार (फेथ हीलिंग) सत्र जिन्हें चंगाई सभा कहा जाता है, नए-नए बपतिस्मा (ईसाई धर्म में दीक्षा) प्राप्त ईसाइयों से भरी मंडलियां – ये सब उत्तर प्रदेश के अंदरूनी हिस्सों के लिए कोई असामान्य घटनाएं नहीं हैं.

मगर, राज्य के फतेहपुर जिले में कुछ बदल सा गया है. हालांकि, विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और इसकी युवा शाखा बजरंग दल की स्थानीय इकाइयां पिछले कई वर्षों से ईसाई समूहों से जुड़े ‘धर्मांतरण  रैकेट’ के बारे में शिकायत करती रही थीं, मगर पुलिस ने पिछले कुछ महीनों में ही इन आरोपों पर अभूतपूर्व उत्साह के साथ कार्रवाई की है.

इस वर्ष की शुरुआत से फतेहपुर के तीन पुलिस थानों ने सामूहिक रूप से कम-से-कम सात प्राथमिकियां (एफआईआर) दर्ज की हैं और अब तक 55 लोगों को गिरफ्तार भी किया है. इनमें से प्रत्येक उदाहरण में, पुलिस की कार्रवाई विहिप या बजरंग दल के सदस्यों की इन शिकायतों पर हुई थी कि कोई ईसाई समूह या व्यक्ति प्रलोभन, छल और जबरदस्ती, या इनमें से कुछ के संयोजन के माध्यम से हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश कर रहा है.

यहां तक कि अब यूपी का आतंकवाद निरोधी दस्ता (एंटी टेररिज्म स्क्वॉड – एटीएस) भी इसमें शामिल हो गया है. सूत्रों ने बताया कि इस जिले में दर्ज धर्मांतरण के विभिन्न मामलों का जायजा लेने के लिए एटीएस की एक टीम पिछले बुधवार को फतेहपुर पहुंची थी. यह हरिहरगंज थाना क्षेत्र में इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया (ईसीआई) की एक शाखा के फंडिंग के स्रोत की भी जांच कर रहा है.

इस साल 15 अप्रैल से 20 नवंबर के बीच कथित तौर पर ग्लोबल क्रिश्चियन चैरिटी वर्ल्ड विजन इंटरनेशनल से संबंध रखने वाले इस चर्च से 41 गिरफ्तारियां हुई हैं. इसके अलावा पुलिस ने चर्च के पादरी विजय मसीह समेत धर्मान्तरित हुए लोगों के बदले हुए नामों वाले कई आधार कार्ड बरामद करने का भी दावा किया है.

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फतेहपुर के हरिहरगंज में इवेंजेलिकर चर्च | शिखा सलारिया | दिप्रिंट

जांच के दायरे में आया एक और चर्च फतेहपुर के बहुवा शहर में स्थित ‘नया जीवन चर्च’ है. यह कथित रूप से फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड (एफएमपीबी) से जुड़ा हुआ है, जो चेन्नई स्थित इवैंजेलिकल संगठन है. पुलिस ने पिछले महीने इसके चार सदस्यों को भी गिरफ्तार किया था.

खागा पुलिस स्टेशन ने भी इस साल जनवरी और सितंबर के बीच कम-से-कम पांच धर्मांतरण संबंधी मामले दर्ज किए हैं, जिनमें 10 गिरफ्तारियां हुई हैं.

तो, फतेहपुर में वास्तव में चल क्या रहा है? इस महीने की शुरुआत में जब दिप्रिंट ने खागा, हरिहरगंज और बहुवा का दौरा किया, तो जमीन पर कई परस्पर विरोधी कहानियां मौजूद थीं.

एक ओर जहां कुछ ग्रामीणों ने शिकायत की कि ईसाई समूह उन्हें हिंदू प्रथाओं को छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और संदिग्ध रूप से ‘भूत भगाने’ के लिए दान मांग रहे हैं, वहीं कई अन्य लोगों ने दावा किया कि उन्होंने जाति प्रथा की बेड़ियों से बच निकलने के लिए स्वेच्छा से ईसाई धर्म अपना लिया है और अब उन्हें झूठे आरोपों के साथ परेशान किया जा रहा है.

इसके अलावा, कुछ ‘धर्मांतरित’ ग्रामीणों, जिनके नए ईसाई नाम वाले ‘जाली’ आधार कार्ड पाए गए थे, ने दावा किया कि वे कभी भी ‘चर्च’ नहीं गए थे, पर पुलिस ने उनके इस दावे का खंडन किया है. इस बीच, गैरकानूनी धर्मांतरण में आरोपी बनाये गए चर्च और व्यक्ति अपनी बेगुनाही के बारे में बात करना जारी रखे हुए हैं.


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समस्या पुरानी, कार्रवाई नई

हिंदुत्ववादी संगठन फतेहपुर, खासकर इसके ग्रामीण इलाकों में, में हो रहे कथित ईसाई धर्मांतरण के खिलाफ दशकों से विरोध कर रहे हैं, लेकिन पिछले सात से आठ वर्षों में इनके स्वर की आवाज बढ़ गई है.

अगस्त 2013 में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेत्री साध्वी निरंजन ज्योति यहां के तीसी गांव पहुंचीं और गंगाजल के जरिए ईसाई धर्म में धर्मांतरित लोगों को ‘शुद्ध’ किया. उन्होंने एनजीओ वर्ल्ड विजन इंटरनेशनल पर भी निशाना साधते हुए यह दावा किया कि इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करना है. साध्वी निरंजन ज्योति साल 2014 से ही फतेहपुर से लोकसभा सांसद हैं और वर्तमान में केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री हैं.

पिछले कुछ सालों के दौरान विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने कई विरोध प्रदर्शन किए हैं, वर्ल्ड विजन का प्रतिनिधित्व करने वाले पुतले जलाए हैं, और उन घरों में तालाबंदी की है जहां प्रार्थना सभा आयोजित की जाती थी.

विहिप की फतेहपुर इकाई के प्रांतीय सचिव वीरेंद्र पांडे ने कहा कि अब जो अंतर आया है वह यह है कि पुलिस ने उनके साथ ‘सहयोग’ करना शुरू कर दिया है और ईसाई समूहों की ‘अवैध गतिविधियों’ पर नकेल कस रही है.

पांडे ने दिप्रिंट को बताया, ‘पहले, पुलिस हमारी बात सुनती ही नहीं थी और विरोध करने पर हमारे खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कर लिया करती थी. लेकिन अब, पुलिस (हमारा) सहयोग कर रही है.’

हालांकि, मामले को गिरफ्तारी से सजा तक ले जाना बिलकुल अलग है.

इस साल फतेहपुर में गिरफ्तार किए गए 55 लोगों में से 37 फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. पुलिस का कहना है कि विहिप का आरोप है कि मिशनरियों ने गरीब हिंदुओं को उनका धर्म बदलने के लिए पैसे, नौकरी और अन्य प्रलोभन दिए, मगर इसे साबित करना मुश्किल है.

फतेहपुर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) राजेश कुमार सिंह ने दिप्रिंट को बताया, ‘लोग सामने नहीं आ रहे हैं और यह स्वीकार ही नहीं कर रहे हैं कि उन्होंने कभी पैसे लिए या उन्हें पैसे की कोई पेशकश की गई. हम जांच कर रहे हैं और सबूत इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे हैं.’

राज्य का धर्मांतरण विरोधी कानून – उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध अधिनियम – बल प्रयोग, धार्मिक गलत बयानी और प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाता है.

‘सामूहिक धर्मांतरण’ की सजा, जो दो या दो से अधिक लोगों के धर्मांतरण के रूप में लिया जाता है, तीन से 10 साल तक कारावास और 50,000 रुपये या उससे अधिक का जुर्माना है.

नवंबर 2020, जब से यह कानून लागू हुआ है, के बाद से ‘गैरकानूनी’ धर्मांतरण के 291 मामलों में कथित तौर पर 507 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अभी तक किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सका है.

पूर्व ‘RSS कार्यकर्ता’ आयोजित कर रहे हैं ‘चंगाई सभा’

इस साल 2 जुलाई को, रामचंद्र पासवान और उनकी पत्नी नीरमती को खागा के सुजाराही गांव स्थित उनके घर से एक अन्य व्यक्ति के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था. प्राथमिकी के अनुसार उन पर ‘ईसाई धर्म को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को इस धर्म का पालन करने के लिए प्रोत्साहित करने’ तथा ‘बाइबिल बांटने’ के आरोप लगाए गए थे.

क्षेत्र की बजरंग दल इकाई के एक नेता की शिकायत के बाद दर्ज यह मामला खागा पुलिस स्टेशन में इस साल दायर पांच मामलों में से एक है.

फिलहाल जमानत पर बाहर पासवान का कहना है कि उन्होंने कभी अन्य लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश नहीं की. लेकिन वे यह जरूर स्वीकार करते हैं कि स्वयं उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया है. उनके अनुसार, वह साल 2007 तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सदस्य थे, लेकिन कई सारे कारणों की वजह से ईसाई धर्म की ओर आकर्षित हुए हैं.

इन्हीं कारणों में से एक थी जाति. दलित समुदाय से आने वाले पासवान ने सवाल किया, ‘क्या आप कभी मुझे ब्राह्मण या ठाकुर के बराबर बना सकते हैं? मेरे पूर्वज हिंदू देवताओं की पूजा करते थे, लेकिन वे उसी घड़े से पानी क्यों नहीं नहीं पी सकते थे, जिससे सवर्ण लोग पिया करते थे?’

खुद को आरएसएस का पूर्व कार्यकर्ता बताने वाले रामचंद्र पासवान अपने परिवार के साथ. उन्होंने अब ईसाई धर्म अपना लिया है और खागा के सुजाराही गांव में एक ‘चंगाई सभा’ चलाते हैं

उन्होंने दावा किया कि धर्मांतरण का एक अन्य कारण वे ‘चमत्कार’ थे जिन्हें उन्होंने अनुभव किया था. उनके लिए महत्वपूर्ण मोड़ साल 2007 में तब आया, जब उनके छह महीने के बेटे को निमोनिया हो गया था. वे बताते हैं, ‘हमने बहुत सारे डॉक्टरों को आजमाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. तब मेरे भतीजे ने मुझे एक पादरी से मिलवाया और मुझे ईश्वर (ईसाई देवता) से प्रार्थना करने के लिए कहा. उन्होंने कहा चंगाई हो जाएगी (सब अच्छा होगा).’

उनका बेटा बच गया और पासवान का (ईसाई धर्म में) विश्वास और पक्का हो गया. आखिरकार, उन्होंने भी चंगाई सभाओं, या आस्था-आधारित उपचार सभाओं में प्रचार करना शुरू कर दिया. चंगाई शब्द का अर्थ मोटे तौर ‘तंदुरुस्त या चंगा’ हो जाने के रूप में निकाला जाता है. अब वे ‘यीशु से प्रार्थना के माध्यम से बुरी आत्माओं से छुटकारा दिलवाने’ के लिए झाड़-फूंक का भी आयोजन करते हैं.

पासवान ने दिप्रिंट को ऐसे ही एक ‘झाड़-फूंक’ का एक वीडियो दिखाया. इसमें एक ‘भूत से प्रभावित’ महिला चिल्लाती हुई दिखाई देती है, जबकि वह (पासवान) ‘आत्मा’ को उसके शरीर को छोड़ने और प्रभु येसु (यीशु) का अनुसरण करने का निर्देश देते हैं.

समय के साथ, पासवान ने अपना एक छोटा सा अनुयायी वर्ग का तैयार कर लिया है और स्थानीय लोग ‘विशेष जल’ लेने के लिए उनके घर आते रहते हैं.

पासवान के पड़ोसियों ने कहा कि उनकी गिरफ्तारी से पहले, उनके दो मंजिला घर से ढोल और गाने की आवाजें आती थीं, लेकिन अब वहां सन्नाटा पसरा है. उनमें से कुछ खुश हैं. उनका दावा है कि चंगाई सभाओं का लक्ष्य धर्मांतरण कराना था.

पासवान के एकदम पास के पड़ोसी ने उनका नाम न बताने की शर्त पर कहा, ‘उनके लिए यह सब एक व्यवसाय है. वे लोगों से जितना हो सके दान करने के लिए कहते हैं. मैं भी कई बार गया और फिर रुक गया. वे हमें हिंदू धर्म छोड़ने और अपने धर्म का पालन करने के लिए कहते थे. ‘

एक अन्य ग्रामीण, शर्मिला सिंह ने दावा किया कि लोगों से आग्रह किया जाता है कि वे डॉक्टरों से दूर रहें और इसके बजाय चंगाई सभाओं में ‘फेथ हीलिंग’ के लिए प्रयास करें. उन्होंने कहा, ‘मैं खुद कभी उनकी बैठकों में शामिल नहीं हुई, लेकिन जो लोग शामिल हुए थे उन्होंने मुझे बताया कि वे उन्हें होली और दिवाली नहीं मनाने के लिए कहते हैं.’

पासवान के अनुसार, उनके पड़ोसियों ने ही बजरंग दल से शिकायत की थी क्योंकि उन्हें इस बात से ‘ईर्ष्या’ थी कि एक दलित के रूप में वह अच्छा जीवन यापन करने और अपना घर बनाने में कैसे सक्षम हो रहे हैं.

उनका कहना है, ‘मैं किसी के साथ कुछ गलत नहीं करता, कोई नाहक गपशप नहीं करता, कोई चोरी नहीं करता, कोई लालच नहीं करता. मैं पैसे नहीं मांगता. मैं अपनी कमाई पर भरोसा करता हूं. ‘

उन्होंने कहा कि उन्हें इसलिए भी निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने हाल के चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) का समर्थन किया था. उन्होंने कहा, ‘[पड़ोसियों] को इसके बारे में तब पता चला जब सपा नेता नीलम रोमिला सिंह मेरे घर आईं.’

रामचंद्र पासवान की यह कहानी सुजाराही से करीब 8.5 किलोमीटर दूर शिकारपुर गांव में रहने वाले पेंटर आशाराम पासवान से मिलती-जुलती है. उन्हें इस साल 25 जून को विहिप के एक स्थानीय पदाधिकारी राजकमल मौर्य की शिकायत पर गिरफ्तार कर लिया गया था. उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी भी रामचंद्र पासवान वाले मामले की तरह ही है.

उन दोनों पर अवैध रूप से ‘ईसाई धर्म को बढ़ावा देने’ का आरोप लगाया गया था और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें 295-ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) शामिल है. साथ ही साथ उनके ऊपर यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा 3 और 5 (1) के तहत भी आरोप लगाए गए हैं.

आशाराम पासवान ने कहा कि वह एक रहस्यमय बीमारी के बाद (ईसाई धर्म के प्रति) आस्थवान हो गए थे, जिसके कारण वह कभी-कभार बेहोश हो जाते थे. उन्होंने इसे एक दुष्ट आत्मा के वश में होने के रूप में देखा. उन्होंने दावा किया कि उनकी भतीजी, जो चंगाई सभा की अनुयायी है, द्वारा उनके लिए ‘ईश्वर’ से प्रार्थना करने के बाद वह ठीक हो गए. जल्द ही वह भी इसके सदस्य बन गए.

उन्होंने कहा, ‘तब से, मेरा परिवार बेहतर स्थिति में है. क्या ‘ईश्वर’ से प्रार्थना करना पाप है? मैंने सभी बुरे कामों को छोड़ दिया है. मैं अब धार्मिकता के मार्ग पर हूं.’


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‘नया जीवन चर्च’ का मामला

एक समय था जब फतेहपुर के बहुवा कस्बे में स्थित ‘नया जीवन चर्च’ गतिविधियों का केंद्र बना हुआ था. फ्रेंड्स मिशनरी प्रेयर बैंड नेटवर्क, जिसके पास यूपी में लगभग 35 चर्च हैं, के एक हिस्से के रूप में यह चर्च गायक मिशनरियों के समूह को आस-पास के गांवों में भेजने के लिए जाना जाता था.

लेकिन यह चर्च, जो कम-से-कम 10 साल पुराना है, अक्टूबर के बाद से बंद है जब पादरी जैलाल गिहार और उनके सहयोगी किशोरी रैदास, फूला देवी और श्रीमती को आईपीसी की धारा 295-ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के साथ ही यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून की धारा 3 और 5 (1) के तहत लगाए गए आरोपों के बाद गिरफ्तार कर लिया गया था.

ये गिरफ्तारियां मधु शुक्ला नामक बजरंग दल की एक कार्यकर्ता की इस शिकायत के बाद की गईं थीं कि आरोपी लोगों को धर्मांतरित करने के लिए प्रलोभन दे रहे थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पादरी गिहर ने ग्रामीणों को धमकी दी थी कि अगर वे धर्म परिवर्तन नहीं करते हैं तो उन्हें बलात्कार के मामलों में या अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत फंसा दिया जायेगा. इस मामले में एक किशोर भी नामजद था, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया गया. अन्य चार अभी भी जेल में बंद हैं.

किशोरी के दामाद शिवदास रैदास ने दिप्रिंट को बताया कि निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी और अब वे सत्र अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं.

उन्होंने कहा, ‘मेरे ससुर एक बैंड बजाने वाले के रूप में काम करते हैं. मेरी सास के मरने के कुछ साल बाद वह चर्च के संपर्क में आये थे. हम बहुत गरीब लोग हैं.’

फतेहपुर के बरौंहा गांव में स्थित किशोरी रैदास की बंद पड़ी झोपड़ी. रैदास को अक्टूबर में बहुवा में नया जीवन चर्च से जुड़े एक धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार किया गया था और वह अभी भी जेल में है.

किशोरी के पड़ोसियों को उनसे पूरी सहानुभूति है.

उनके एक पड़ोसी ने अपना नाम न छापे जाने की शर्त के साथ कहा, ‘वह अपनी झोपड़ी में प्रार्थना सभा आयोजित करते थे और हम भी उनमें शामिल होते थे. उन्होंने कभी हमारा धर्म बदलने की कोशिश नहीं की. वह एक गरीब साथी है.’

चर्च के एक अन्य सदस्य मुकुट जे.के. ने भी उत्पीड़न का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियां रविवार को हुई जब सभी उपस्थित लोग प्रार्थना में लगे हुए थे.

उन्होंने दावा किया, ‘कुछ लोग आए और उपस्थित लोगों के बीच बैठ कर सवाल उठाने लगे और बहस करने लगे. फिर उन्होंने अपने साथियों को फोन किया, जिसके बाद उन्होंने चर्च को बाहर से ताला लगा दिया. फिर पुलिस और एसडीएम (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट) पहुंचे और ताला खोला.’

‘निशाना बनाये गए लोगों की सूची’

पिछले महीने बहुवा में हुई गिरफ्तारी के समय, पुलिस ने सखा और टीकरी सहित आसपास के कई गांवों के 1,342 निवासियों के नाम वाला एक रजिस्टर बरामद किया था.

विहिप के पांडेय ने आरोप लगाया है कि ये नाम उन लोगों के थे जिन्हें चर्च धर्मांतरण के लिए निशाना बना रहा था.

जब दिप्रिंट ने उन कुछ ग्रामीणों से संपर्क किया जिनके नाम इस रजिस्टर में हैं, तो उन्होंने दावा किया कि उन्हें धर्मांतरण के लिए पैसे देने की कोई पेशकश नहीं की गई थी.

60 वर्षीय शिवोधन, जिनकी पत्नी बसंती का नाम इस रजिस्टर में दर्ज है, ने कहा, ‘वे यहां के गांवों में हारमोनियम लेकर और गीत गाते हुए जाते थे,, वे वहां प्रार्थना सभा आयोजित करते थे.’

टिकरी निवासी इस शख्स ने कहा कि उन्होंने करीब पांच साल पहले चर्च जाने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा, ‘मेरी पत्नी पर एक दुष्ट आत्मा का साया था. मैं उसे कई अस्पतालों में ले गया था और इसलिए मैंने चर्च को भी आजमाने का फैसला किया. कुछ भूत ग्रस्त लोगों ने वहां से लाभ प्राप्त करने का दावा किया था. मैंने कुछ लोगों को ढोल की आवाज़ पर चिल्लाते हुए देखा.’

टिकरी निवासी बसंती अपने परिजनों के साथ. वह उन ग्रामीणों में से एक हैं जिनका नाम नया जीवन चर्च से कथित रूप से बरामद 1,342 ग्रामीणों की सूची में पाया गया था.

हालांकि, कुछ समय बाद इस दंपति ने वहां जाना बंद कर दिया. वे कहते हैं, ‘हमें एक बाइबिल दी गई थी लेकिन मुझे नहीं पता था कि इसे पढ़ना कैसे है.’

एक अन्य ग्रामीण माईकी, जिसका नाम इस सूची में था, ने दिप्रिंट को बताया कि जब उसे सिंदूर और मंगलसूत्र उतारने के लिए कहा गया तो उसने (चर्च) जाना बंद कर दिया.

हालांकि, इनमें से राम अवतार रैदास जैसे कुछ लोगों ने वाकई ईसाई धर्म अपना लिया है. वे कहते हैं, ‘ मुझे ईसाई धर्म पसंद आया. हिंदू धर्म में बहुत जातिवाद है.‘

सखा के निवासी कल्लू ने कहा, ‘जब लोगों को फ़ायद होगा, तो वे अनुसरण करेंगे. वे उसके बाद रुक जाते थे.’

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कभी चर्च में शामिल होने के लिए पैसे या अन्य किसी लाभ की पेशकश की गई थी, कल्लू ने कहा कि उन्होंने ऐसी किसी घटना के बारे में नहीं सुना है.

ईसाई धर्म का पालन करने वाले पड़ोस के अयाह गांव के निवासी संतोष सिंह ने कहा, ‘उन्हें फंसाया गया है. जैसे हम हिंदू मंदिरों को (दान) देते हैं, उसी तरह यहां छोटे-छोटे दान दिए जाते हैं.

ध्यान देने कि बात है कि एफएमपीबी की एक पत्रिका ‘फ्रेंड्स फोकस’ के दिसंबर 2014 के अंक में इस बारे में लिखा गया है कि कैसे जम्मू और कश्मीर से लेकर असम तक गुजरात तक देश के लगभग सभी हिस्सों में (संभवतः उस महीने) कितने लोगों ने ‘यीशु को स्वीकार किया.’

इसमें बहुवा की भी प्रविष्टि (एंट्री) है. इसके एक अंश में कहा गया है, ‘बारह लोगों ने यीशु मसीह को स्वीकार किया और तीन गांवों में 3500 लोगों को सुसमाचार सुनाया गया. साथ ही 4000 गॉस्पेल ट्रैक्ट और 20 न्यू टेस्टामेंट वितरित किए गए.’

पास के बिंदकी एफएमपीबी चर्च से जुड़े पॉल दया सिंह से संपर्क करने पर उन्होंने धर्मांतरण के आरोपों से इनकार किया.

उन्होंने कहा, ‘यहां बपतिस्मा जैसा कुछ नहीं हो रहा है. उपस्थित लोगों को केवल अपने जीवन में चंगाई (बेहतरी) लाने के लिए यीशु मसीह के नक्शेकदम पर चलने हेतु प्रोत्साहित किया जाता है. पैसे का कोई लेन-देन नहीं होता है. सदस्य बनने पर लोग प्रति माह 20 रुपये का भुगतान कर सकते हैं.‘


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‘जाली’ आधार कार्ड और इसके RSS कनेक्शन का रहस्य

पुरे फतेहपुर जिले में धर्मांतरण से संबंधित कार्रवाई में शायद सबसे ‘हाई-प्रोफाइल’ इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया (ईसीआई) की हरिहरगंज शाखा का है.

जैसा कि दिप्रिंट द्वारा पहले बताया गया था, यह सारा विवाद 14 अप्रैल को तब शुरू हुआ, जब एक स्थानीय विहिप पदाधिकारी, हिमांशु दीक्षित ने एक शिकायत दर्ज कराई जिसमें दावा किया गया कि पादरी विजय मसीह और कई अन्य लोग छल-कपट द्वारा स्थानीय लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रहे थे.

यह शिकायत ‘गुड फ्राइडे’ से एक दिन पहले आयोजित होने वाले ‘मौंडी थर्सडे’ के अवसर पर की गई थी, जब चर्च के कई सदस्य प्रार्थना में भाग ले रहे थे.

जैसा कि उनके बचाव पक्ष के वकीलों ने दिप्रिंट को बताया, शिकायत मिलने पर पुलिस ने 35 नामजद और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है. फिर छब्बीस लोगों को मौके पर से हिरासत में ले लिया गया. उन्हें आधिकारिक तौर पर 15 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन सभी को अगले दिन जमानत मिल गई.

लेकिन वह मामले अंत नहीं था. अक्टूबर में, पादरी विजय मसीह और कॉंग्रेगेट विनय कुमार, जो पास के ब्रॉडवेल क्रिश्चियन अस्पताल के एक दंत चिकित्सक हैं, को फिर से गिरफ्तार कर लिया गया.

इस बार तीन लोगों ने हलफनामा दाखिल कर कहा था कि उनका धर्मांतरण हुआ है और उनके नए आधार कार्ड बनवाये गए हैं. इसके अलावा, पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने मसीह की जेब से दो अन्य लोगों से जुड़े चार आधार कार्ड बरामद किए हैं. ये दोनों फतेहपुर के असवार तारापुर गांव के दलित ग्रामीण केशन और सत्यपाल के थे.

फतेहपुर पुलिस द्वारा 30 अक्टूबर को जारी किये गए एक बयान में कहा गया है कि मसीह ने केशन और सत्यपाल को 15 अप्रैल को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने और उन्हें उनके नए नाम के तहत नए आधार कार्ड दिए जाने की बात स्वीकार की थी. बयान में मसीह के हवाले से कहा गया है, ‘हम ऐसे (धर्मान्तरित) लोगों को नए आधार कार्ड देते हैं.’

इसके बाद फतेहपुर की एक अदालत ने यह देखते हुए मसीह को जमानत देने से इंकार कर दिया कि ये सभी आरोप अब सरकारी दस्तावेजों की जालसाजी से संबंधित हैं.

हालांकि, जब दिप्रिंट ने असवर तारापुर गांव में रहने वाले केशन और सत्यपाल का पता लगाया, तो उन्होंने दावा किया कि उनका कभी धर्मांतरण हुआ ही नहीं था और उन्होंने आरएसएस के एक स्थानीय सदस्य अरुण तिवारी की ओर इशारा किया, जिन्हें उन्होंने संपत्ति से जुड़े एक मामले के सिलसिले में अपने आधार कार्ड दिए थे.

हिंदू देवी-देवताओं के चित्रों से सज्जित अपने मिट्टी के घर में बैठे 45 वर्षीय सत्यपाल, जो पेशे से एक मजदूर है, हक्का-बक्का लग रहे थे.

सत्यपाल की पत्नी ने बताया कि उन्होंने लगभग दो महीने पहले तिवारी को विभिन्न दस्तावेज दिए थे, क्योंकि उसने कथित तौर पर यह दावा किया था कि वह उनकी पैतृक संपत्ति के 15 बिस्वा के स्वामित्व को उनके नाम स्थानांतरित करवाने में उनकी मदद कर सकते हैं.

सत्यपाल ने कहा कि वह ‘कभी’ चर्च नहीं गए है और उन्हें कुछ पता नहीं है कि उन्हें नया आधार कार्ड कैसे मिला. उन्होंने अनुमान लगाया, ‘तिवारी इसके पीछे हो सकते हैं.’

केशन भी इसी तरह हैरान-परेशान लग रहे थे. उन्होंने कहा कि वह तिवारी के खेतों में काम करते हैं और उन्होंने तिवारी से उनके नाम वाले जमीन के एक भूखंड का बैनामा (बिक्री विलेख) करवाने के लिए मदद मांगी थी.

हालांकि, उन्होंने कहा कि तिवारी ने उन्हें एक मामले में ‘गवाह बनने’ के लिए भी कहा था.

उन्होंने कहा, ‘चर्चा इस बारे में थी कि हम [केशन और सत्यपाल] गवाह बनें. मुझे इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि मुझे किस चीज का गवाह बनाया जा रहा है. मैं अनपढ़ हूं, मुझे कुछ नहीं पता था.‘ साथ ही, उन्होंने कहा कि वे कभी भी चर्च नहीं गए हैं

सत्यपाल और केशन के दावों के बारे में पूछे जाने पर, तिवारी ने आरोप लगाया कि दोनों चर्च से ‘प्रभावित’ थे. तिवारी ने कहा, ‘वे चर्च गए थे, जो उनका धर्म परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था. फिर उन्होंने आरएसएस और विहिप से शिकायत की.‘ जब दिप्रिंट ने केशन को इसका जवाब देने को कहा, तो तिवारी ने उसे मौके से चले जाने के लिए कहा.

इन परस्पर विरोधी दावों के बारे में पूछे जाने पर, फतेहपुर के आरएसएस प्रचारक योगेश कुमार ने कहा कि आरएसएस के किसी भी कार्यकर्ता का धर्मांतरण से किसी तरह का लेना-देना होना असंभव बात है. उन्होंने कहा, ‘यदि हमारे सदस्य किसी भी तरह की गलत गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं तो हम स्वयं उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हैं.’

केशन और सत्यपाल के दावों के बारे में पूछे जाने पर कोतवाली थाने के एसएचओ (थाना प्रभारी) अमित मिश्रा ने कहा कि उनके बयान झूठे हैं.

उन्होंने कहा, ‘कुछ ही दिन पहले, कुछ महिलाओं सहित लगभग 15-20 लोगों ने उनसे मुलाकात की थी और उन्हें धमकी दी थी. उनके आधार कार्ड बरामद कर लिए गए हैं, ‘

फतेहपुर के एसपी राजेश कुमार सिंह ने भी केशन और सत्यपाल के बयानों का खंडन किया और कहा कि उन्होंने ही चर्च के सदस्यों द्वारा धर्मांतरण किये जाने की शिकायत की थी.

चर्च कहता है ‘फंसाया गया है’, पर पुलिस इस बात से असहमत है

चर्च के सदस्यों ने विहिप और बजरंग दल, जिनके कार्यकर्ताओं ने ‘मौंडी थर्स्डे’ के मौके पर चर्च का घेराव किया था, के हाथों अपने उत्पीड़न का आरोप लगाया है.

गौरतलब बात है कि अप्रैल वाली प्राथमिकी में नामित चर्च जाने वालों में से 23 लोग इस चर्च से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित ब्रॉडवेल क्रिश्चियन अस्पताल के कर्मचारी हैं.

इस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. जेसु दास ने दिप्रिंट को बताया, ‘चर्च एक पंजीकृत संस्था है और इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया एक बड़ा संगठन है. धर्मांतरण का आरोप झूठा है. अस्पताल के सभी कर्मचारी प्रार्थना में शामिल होने के लिए चर्च गए थे.’

फतेहपुर स्थित ब्रॉडवेल क्रिश्चियन अस्पताल का प्रवेश द्वार. अप्रैल में यहां के स्टाफ के तेईस सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया था

उन्होंने कहा कि गिरफ्तारियां ‘सुनियोजित और गुप्त रूप से आयोजित’ लग रही थीं.

उन्होंने कहा, ‘जिस तरह से पुलिस अपने पुरे साजो-सामान के साथ इतनी सारी जीपों और एक बड़ी फोर्स के साथ चर्च पहुंची थे … (उससे) सब कुछ पूर्व नियोजित लगता था.’

आधार कार्ड के विषय पर, डॉ. जेसु दास ने आरोप लगाया कि उन्हें फोटोशॉप किया गया था. उन्होंने दावा किया कि सितंबर में अस्पताल को एक नोटिस मिला था जिसमें कहा गया था कि तीन लोगों ने हलफनामा देकर कहा है कि उनका धर्म परिवर्तन किया गया है और उनके आधार कार्ड बदल दिए गए हैं.

डॉ. जेसु ने बताया, ‘हमें बताया गया कि तीन हिंदू व्यक्तियों के उपनाम बदलकर सैमसन कर दिए गए हैं. तीनों हलफनामों की बॉडी (मुख्य विवरण) एक जैसी थी- एक पूरी तरह से कॉपी और पेस्ट वाले मामले जैसा. उन्होंने अस्पताल को नोटिस दिया और हमारे कर्मचारियों से कहा कि वे आकर अपना बयान दें.’

डॉ. जेसु दास ने कहा, ‘मुझे, हमारे दंत चिकित्सक, एक अन्य चिकित्सक और एक लैब तकनीशियन को पुलिस चौकी बुलाया गया था. हमारे दंत चिकित्सक विनय कुमार, जिनका नाम प्राथमिकी में दर्ज था, को गिरफ्तार कर लिया गया और बाकी को जाने दिया गया. हमने पुलिस से पूछा कि वे विनय को कैसे गिरफ्तार कर सकते हैं जबकि सभी को जमानत मिल गई थी. लेकिन पुलिस ने कहा कि उन्होंने आईपीसी की धाराएं बढ़ा दी हैं. ‘

इस मामले में प्रतिवादी बने चर्च के सदस्यों के वकीलों में से एक, दिलीप चंद्र त्रिवेदी, ने दिप्रिंट को बताया कि 16 अप्रैल से लेकर अक्टूबर तक, जब आधार कार्ड सामने आए, तब तक इस मामले की जांच में कोई हलचल नहीं हुई थी.

उनके मुताबिक, पुलिस ने अब तक राजेश त्रिवेदी, संजय सिंह और प्रमोद दीक्षित नाम के तीन लोगों के हलफनामों के साथ इन आधार कार्डों की केवल फोटोकॉपी जमा की है.

आधार कार्डों को अदालत में पेश नहीं किए जाने के बारे में पूछे जाने पर एसएचओ मिश्रा ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें एक अभी भी चल रही जांच के बारे में बोलने की आजादी नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ‘उन्हें आरोप लगाने दें. पुलिस इसकी तहकीकात कर रही है.’

रविवार को फतेहपुर पुलिस ने जॉनसन जैकब के रूप में पहचाने गए एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसकी मां ब्रॉडवेल क्रिश्चियन अस्पताल में नर्स के रूप में काम करती है. उन्होंने यह भी दावा किया कि हरिहरगंज की कृष्णा कॉलोनी निवासी संजय अल्पर्ट फ्रांसिस नाम के एक धर्मांतरित व्यक्ति का एक और आधार कार्ड बरामद किया है. इस तरह से 30 अक्टूबर से 20 नवंबर के बीच ईसीआई के 15 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है.

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(संपादनः शिव पाण्डेय)
(अनुवादः रामलाल खन्ना)


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