scorecardresearch
Sunday, 1 March, 2026
होमदेशमध्यस्थता अब केवल हॉल, कुलीन क्लब तक ही सीमित नहीं, गांवों और गलियों तक पहुंच गई है: सीजेआई

मध्यस्थता अब केवल हॉल, कुलीन क्लब तक ही सीमित नहीं, गांवों और गलियों तक पहुंच गई है: सीजेआई

Text Size:

विजयवाड़ा, एक मार्च (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने रविवार को कहा कि देश में मध्यस्थता अब केवल हॉल या विशिष्ट क्लब तक ही सीमित नहीं है, बल्कि गांवों और गलियों के बिल्कुल केंद्र तक पहुंच गई है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां एक संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यस्थता भारत के डीएनए में गहराई से समाई हुई है और विवाद समाधान का ऐतिहासिक रूप से एक प्रभावी तरीका रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘आप सभी जानते हैं कि मध्यस्थता हमारे डीएनए में समाई हुई है… और अब भारत में मध्यस्थता केवल हॉल के भीतर, कुलीन क्लब या शहरी क्षेत्रों में होने वाली चर्चाओं तक ही सीमित नहीं है। मध्यस्थता गांवों में प्रवेश कर चुकी है। मध्यस्थता गलियों में प्रवेश कर चुकी है। मध्यस्थता उन घरों में भी प्रवेश कर चुकी है, जहां दुर्भाग्यपूर्ण विवाद होते हैं।”

इसके सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए, उन्होंने भगवान कृष्ण का उदाहरण दिया, जो महाभारत में दो युद्धरत गुटों के बीच संघर्ष को सुलझाने का प्रयास करने वाले पहले विधिवत मध्यस्थ थे।

उन्होंने कहा कि दो पक्षों के बीच मध्यस्थता करने में भगवान कृष्ण के विफल रहने की कहानी एक महत्वपूर्ण बिंदु को उजागर करती है, जो आत्मनिरीक्षण को प्रेरित करती है और मध्यस्थता के महत्व पर बल देती है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत के अनुसार, देश विकास कर रहा है, अर्थव्यवस्था भी बढ़ रही है, स्टार्टअप, नए उद्योग, बड़े उद्योग और व्यावसायिक संस्थाएं बाजार में प्रवेश कर रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘जब व्यापार बढ़ता है, तो विवाद स्वाभाविक हैं। इसलिए व्यावसायिक संस्थाएं और व्यवसायी मध्यस्थता को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल विवाद का समाधान होता है, बल्कि भविष्य के व्यावसायिक लेन-देन के लिए उनके संबंध भी बरकरार रहते हैं।”

भाषा अमित सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments