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Saturday, 7 March, 2026
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एमसीडी 7 अप्रैल 1958 को अस्तित्व में आया था, चांदनी चौक के टाउन हॉल से हुई थी शुरुआत

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(कुणाल दत्त)

नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) तत्कालीन एकीकृत दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) आज से ठीक 64 साल पहले अस्तित्व में आया था और चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक टाउनहॉल से इसने अपनी यात्रा शुरू की थी।

दिल्ली के ‘दिल’ में स्थित 150 साल से अधिक पुराना टाउन हॉल तब नगर निकाय की सत्ता का केंद्र हुआ करता था। एमसीडी की पहली महापौर स्वतंत्रता सेनानी अरुणा आसफ अली थीं। राष्ट्रीय राजधानी के अधिकतर हिस्से पर एकीकृत एमसीडी का शासन था।

करीब 1860 के आसपास शुरू हुई नगरपालिका प्रशासन प्रणाली से एमसीडी 7 अप्रैल, 1958 को अस्तित्व में आया।

एमसीडी का गठन संसद द्वारा पारित दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत किया गया।

‘पीटीआई-भाषा’ को मिले दस्तावेजों और कई जानकारों के अनुसार भारत की आजादी के लगभग एक दशक बाद नीति निर्माता जब एमसीडी की परिकल्पना कर रहे थे, तो इसे ‘बॉम्बे नगर निगम’ की तर्ज पर गठित करने का फैसला लिया गया था।

टाउन हॉल में पुराने आयुक्त के कार्यालय में लगे एक पुराने उत्तराधिकार बोर्ड के अनुसार, दिल्ली के पहले नगर आयुक्त, पीआर नायक ने भी 7 अप्रैल, 1958 को कार्यभार संभाला था और उनका कार्यकाल 15 दिसंबर, 1960 को समाप्त हो गया था।

साल 1958 में एमसीडी में पार्षदों की संख्या 80 थी। क्रमिक परिसीमन के माध्यम से, वार्डों की संख्या बढ़ाकर 134 की गई और 2007 में यह संख्या 272 तक पहुंच गई।

बृहस्पतिवार को, जब ‘पीटीआई-भाषा’ ने इस प्रतिष्ठित स्थल का दौरा किया, तो वहां मौजूद नगरपालिका कर्मचारियों को आज के दिन के बारे में नहीं पता था, लेकिन उन्होंने आशा व्यक्त की कि नया एकीकृत नगर निकाय ‘निगम के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए अच्छा होगा’। साल 2011 में नगरीय निकाय को तीन भागों उत्तरी दिल्ली, दक्षिणी दिल्ली और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में विभाजित कर दिया गया था। उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दक्षिण दिल्ली नगर निगम में फिलहाल 104-104 जबकि पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 64 वार्ड हैं।

एक दशक के बाद, दिल्ली नगर निगम को एक बार फिर एकीकृत किये जाने की तैयारी शुरू हो गई है क्योंकि संसद ने मंगलवार को दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित कर दिया है।

विधेयक के अनुसार एकीकृत दिल्ली नगर निगम में वार्डों की संख्या 250 से अधिक नहीं होगी और जब तक संशोधित कानून के तहत निकाय की पहली बैठक आयोजित नहीं की जाती तब तक एक विशेष अधिकारी को इसके कार्य की देखरेख के लिए नियुक्त किया जा सकता है।

भाषा जोहेब पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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