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Friday, 27 March, 2026
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मौत बहुत बड़ी समतावादी, अनुकंपा के आधार पर नौकरी के दावों का सक्रिय निस्तारण करें : न्यायालय

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नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मौत की महिमा यह है कि यह बहुत बड़ी समतावादी है और युवा तथा बूढ़े अथवा अमीर और गरीब के बीच कोई भेद नहीं करती है।

न्यायालय ने सरकारी अधिकारियों से यह भी कहा कि वे अनुकम्पा के आधार पर नौकरी के दावों का निर्णय करते समय ‘अत्यंत सक्रियता’ की भावना से कार्य करें।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर रोजगार देने के प्रावधान का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को अचानक आए संकट से उबारना और रोजीरोटी के लिए सक्षम बनाना है।

न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि राज्य में स्थानीय प्राधिकरणों के तहत अनुकंपा नियुक्ति को शासित करने के लिए कोई मौजूदा नीति नहीं है।

पीठ ने कहा कि मृत कर्मचारियों के कानूनी वारिसों ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए 2005-2006 में पश्चिम बंगाल के तीन नगर निगमों- बर्धमान, राणाघाट और हावड़ा में अर्जियां दायर की गयी थीं और तब से लेकर अब तक लगभग 17-18 साल बीत चुके हैं।

पीठ की ओर से न्यायमूर्ति नागरत्ना द्वारा लिखे गये फैसले में कहा गया है कि जहां कर्मचारी की मृत्यु की तारीख के बाद से एक लंबा समय व्यतीत हो गया है, वहां अनुकम्पा के आधार पर नियुक्ति की तत्काल भावना समाप्त हो जाएगी और इसका महत्व खो जाएगा।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘सरकारी अधिकारियों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के दावों का फैसला करते समय अत्यधिक सक्रियता और तत्कालिकता की भावना के साथ कार्य करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की योजना का उद्देश्य पूरा हो।’

भाषा सुरेश दिलीप

दिलीप

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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