लखीमपुर (असम), नौ जनवरी (भाषा) असम के लखीमपुर जिले में 500 हेक्टयर वन भूमि को खाली कराने की प्रशासन की ओर से अपनी तैयारियां पूरी करने के बीच ज़मीन पर “अवैध तरीके से रह रहे” कई लोगों को सोमवार को अपना सामान ले जाते हुए देखा गया।
कुछ परिवारों को अपना सामान ट्रकों में भरते हुए देखा गया जबकि अन्य अपना सामान साइकिलों के जरिए ले गए। बच्चों को भी सिर पर गठरी ले जाते हुए देखा गया।
आधासोना और मोहघुली गांवों में पावा आरक्षित वन की 501 हेक्टयर भूमि को पहले चरण में खाली करने का अभियान मंगलवार को चलाया जाएगा। प्रभावित होने वालों में ज्यादातर लोग बंगाली मुसलमान हैं।
अधिकारियों ने बताया कि आरक्षित वन के 2,560.25 हेक्टेयर में से केवल 29 हेक्टेयर फिलहाल किसी भी तरह के अतिक्रमण से मुक्त है।
निवासियों और नेताओं का दावा है कि पहले उन्हें जमीन के मालिकाना हक के दस्तावेज दिए गए थे।
उन्होंने दावा किया कि इन दस्तावेजों को असम में मौजूदा भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने खारिज कर दिया है।
‘ऑल असम माइनॉरिटी स्टूडेंट्स यूनियन’ (एएएमएसयू) लखीमपुर जिला सचिव अनवाररूल ने दावा किया, “इन क्षेत्रों के लोग दशकों से यहां रह रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) योजना के तहत घर बनाए गए, राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्र बनाए, बिजली कनेक्शन दिए गए और मनरेगा कार्यक्रम के तहत सड़कें सभी बनाई गईं।”
उन्होंने सवाल किया कि क्षेत्र में अवैध रूप से रहने वाले इन निवासियों को सरकारी योजनाओं के तहत लाभ कैसे दिए जा रहे हैं?
एक स्थानीय व्यक्ति ने दावा किया कि राज्य सरकार ने उन्हें पहले के दशकों में भूमि का स्वामित्व प्रदान किया था।
उन्होंने कहा “जब हमने इसे इस सरकार को प्रस्तुत किया, तो उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। अब हमें कहां जाना चाहिए?’
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पावा आरक्षित वन के सीमांकन स्तंभ को कई बार बदला गया है, खासकर 2017 के बाद से, और दावा किया कि बेदखली अभियान से पहले सीमा का सीमांकन करने के लिए ‘मनमाने तौर पर चिन्ह” लगाए जा रहे हैं।
एक अन्य अधिकारी ने कहा कि क्षेत्र को चार ब्लॉक में विभाजित किया गया है और बेदखली अभियान मंगलवार सुबह सभी स्थानों पर एक साथ शुरू होगा।
उन्होंने कहा, “हमारे शीर्ष अधिकारियों ने यहां कर्मियों को जानकारी दी है। हमें ज्यादा प्रतिरोध की उम्मीद नहीं है। हम किसी भी परिदृश्य के लिए तैयार हैं।”
लखीमपुर के पुलिस अधीक्षक बेदांता माधब राजखोवा ने कहा था कि राज्य पुलिस और सीआरपीएफ के 600 कर्मियों को अभियान के लिए तैनात किया गया है। इलाके में ‘मॉक ड्रिल’ की गई थी और लॉन्ग मार्च निकाला गया ।
मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) अशोक कुमार देव चौधरी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में 701 परिवारों ने पावा आरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर लिया है।
भाषा नोमान माधव
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