चंडीगढ़, 14 जून (भाषा) पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने हिमाचल प्रदेश द्वारा सिंचाई योजनाओं के लिए पानी लेने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त करने की शर्त को खत्म करने के केन्द्र के ‘एकतरफा फैसले’ का बुधवार को विरोध किया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केन्द्र सरकार ने इस संबंध में 15 मई को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के अध्यक्ष को निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने कहा कि इन निर्देशों के माध्यम से सरकार ने बीबीएमबी के अध्यक्ष को निर्देश दिया है कि वह अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने के मौजूद तंत्र को इस शर्त पर समाप्त कर दें कि हिमाचल प्रदेश द्वारा ली जाने वाली पानी की कुल मात्रा बिजली के क्षेत्र में उनकी हिस्सेदारी के अनुपात में कम रहेगी। उच्चतम न्यायालय ने बिजली के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी 7.19 प्रतिशत तय की है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि बीबीएमबी हिमाचल प्रदेश द्वारा जलापूर्ति/सिंचाई योजनाओं के लिए पानी लेने संबंधी तकनीकी व्यवहार्यता का अध्ययन सिर्फ तभी करेगा जब उसमें बीबीएमबी का इंजीनियरिंग ढांचा शामिल हो और वह ऐसा अनुरोध प्राप्त होने के 60 दिनों के भीतर हिमाचल प्रदेश को आवश्यक तकनीकी जरूरतों के बारे में बताएगा।
मुख्यमंत्री मान के अनुसार, यह फैसला पूरी तरह से अनुचित, आधारहीन है और पंजाब के साथ पूर्ण अन्याय है क्योंकि जल समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश को सतलुज और ब्यास नदियों से कोई पानी नहीं मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश को बिजली का 7.19 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त करने की अनुमति दे दी है लेकिन पानी साझा करने के संबंध में उच्चतम न्यायालय ने कोई आदेश पारित नहीं किया है।
मान ने कहा कि पानी साझा करना अंतरराज्यीय विवाद है और ‘‘राज्यों के बीच पानी साझा करने को लेकर कोई एकतरफ निर्देश जारी नहीं किया जा सकता है।’’
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि बीबीएमबी का गठन ‘पंजाब पुनर्गठन कानून, 1966 के प्रावधान 79(1)’ के तहत हुआ है जिसके तहत बोर्ड के पास बांध और जलाशयों… नंगल हाईडेल नहर और रोपड़, हरिके और फिरोजपुर में सिंचाई परियोजनाओं के प्रशासन, मरम्मत और संचालन का ही अधिकार है।
उन्होंने विशेष रूप से कहा कि कानून के अनुसार बीबीएमबी के पास साझेदार राज्यों (पार्टनर राज्यों) के अलावा अन्य किसी भी राज्य को नदियों का पानी देने का अधिकार नहीं है और हिमाचल प्रदेश साझेदार राज्य नहीं है।
मान ने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियों का जल अलग-अलग समझौतों के तहत पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और राजस्थान को दिया गया है और हिमाचल प्रदेश नदियों के पानी पर दावा नहीं कर सकता है।
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि इन नदियों के जल को साझेदार राज्यों के विशेष क्षेत्रों के लिए चिन्हित किया गया है और आवंटित जल की आपूर्ति विशेष नहर तंत्र के माध्यम से की जाती है।
भाषा अर्पणा पवनेश
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