(तस्वीर के साथ)
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सोमवार को दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित ‘बंग भवन’ के बाहर तैनात सुरक्षाकर्मियों से बहस हुई और उन्होंने अपने राज्य में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित परिवारों के उत्पीड़न का आरोप लगाया।
इसके बाद बंग भवन के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई।
ममता बनर्जी ने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान दावा किया कि निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने मुद्दे उठाने के लिये बंगाल से लोग आए हैं, लेकिन उन्हें धमकाया जा रहा है। उन्होंने ‘बंग भवन’ परिसर के बाहर बड़ी तादाद में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाये। हालांकि, मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का संदर्भ देते हुए यह भी कहा कि वह पुलिस को नहीं, बल्कि ‘‘ऊपर बैठे लोगों’’ को दोषी ठहराती हैं।
बनर्जी पश्चिम बंगाल में एसआईआर के संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ अपनी निर्धारित बैठक के लिए रविवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंची थीं।
पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से प्रभावित लगभग 50 परिवारों को राष्ट्रीय राजधानी लाया गया है और वे चाणक्यपुरी स्थित ‘बंग भवन’ सहित राज्य सरकार की विभिन्न परिसंपत्तियों में ठहरे हुए हैं। इनमें से कुछ परिवारों को सोमवार को निर्वाचन आयोग की बैठक में ले जाया गया।
एक नाटकीय घटनाक्रम में बनर्जी सोमवार सुबह दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित ‘बंग भवन’ पहुंचीं, जहां उनकी ‘भारी’ सुरक्षा तैनाती को लेकर दिल्ली पुलिस से बहस हुई।
उन्हें भवन के बाहर सुरक्षाकर्मियों से सीधे बहस करते हुए देखा गया, जहां उन्होंने कहा कि वह एसआईआर के दौरान पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में आई हैं, न कि किसी आंदोलन के लिए।
बनर्जी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘बंग भवन में बंगाल के लोगों को धमकियां दी जा रही हैं… हमारा मामला उच्चतम न्यायालय में है, निर्वाचन आयोग में हमारी एक बैठक है। हम यहां आधिकारिक तौर पर मिलने आए हैं… लोगों की मौत हुई है, क्या उनके परिवार वाले मीडिया से बात भी नहीं कर सकते?’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यहां कई ऐसे परिवार हैं जो एसआईआर प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। एसआईआर से प्रभावित परिवार जहां भी ठहरे हुए हैं, हर उस जगह पर दिल्ली पुलिस तैनात है। दिल्ली में धमाका होने पर दिल्ली पुलिस कहां होती है?’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘लेकिन मैं दिल्ली पुलिस को दोष नहीं देती, मैं शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को दोष देती हूं। यह अक्षमता है… वे देश की रक्षा नहीं कर सकते, वे बंगाल और आम जनता को प्रताड़ित करते हैं, और एसआईआर के नाम पर अत्याचार कर रहे हैं।’’
बनर्जी ने कहा, ‘‘जब मैं यहां आती हूं, तो वे घबरा जाते हैं… मैं लाखों लोगों को ला सकती थी।’’
उन्होंने दावा किया कि दिल्ली ‘‘एक जमींदारी की तरह’’ हो गई है और इसमें गरीबों के लिए कोई जगह नहीं है।
इससे पहले, बनर्जी पुलिसकर्मियों के पास जाती हुई दिखीं और उन्होंने कहा, ‘‘मैं यहां आंदोलन करने के लिए नहीं आई हूं; अगर मैं आंदोलन के लिए आई होती, तब तो आप अपना होश खो चुके होते।’’
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस को एसआईआर से प्रभावित उन परिवारों को परेशान नहीं करना चाहिए, जो शहर में आए हैं।
बनर्जी ने कहा, ‘‘हम यहां न्याय के लिए आए हैं…।’’
पुलिस ने खास सुरक्षा व्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से बताए बिना कहा कि चाणक्यपुरी स्थित ‘बंग भवन’ और ‘मंडी हाउस’ में पुलिस की मौजूदगी बढ़ा दी गई है और परिसरों के पास कई स्थानों पर कर्मियों को तैनात किया गया था।
इस बीच, साकेत गोखले, डोला सेन, काकोली घोष दस्तीदार और बापी हलदर सहित तृणमूल कांग्रेस के सांसद राष्ट्रीय राजधानी के उन विभिन्न स्थानों पर पहुंचे, जहां एसआईआर से प्रभावित परिवार रह रहे हैं।
दिल्ली के कैलाश कॉलोनी स्थित पश्चिम बंगाल विद्युत विकास निगम लिमिटेड के एक अतिथि गृह के बाहर तैनात पुलिसकर्मियों से गोखले की बहस होती दिखाई दी। बंगाल के एसआईआर प्रभावित बीस लोग यहां ठहरे हुए हैं।
गोखले ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दिल्ली पुलिस सुबह वहां रजिस्टर की जांच करने आई थी और लगभग 25-30 पुलिसकर्मियों को बस के साथ कथित तौर पर हिरासत में लिये गए लोगों को ले जाने के लिए तैनात किया गया था।
गोखले ने दावा किया, ‘‘दिल्ली पुलिस ने चेतावनी दी थी कि अगर वे बाहर निकले तो उन्हें हिरासत में ले लिया जाएगा, और गेट बंद कर दिए गए थे। जब मैंने पुलिसकर्मियों से बात की, तो उन्होंने कहा कि यह गणतंत्र दिवस के लिए सुरक्षा उपाय था। जब मैंने कहा कि गणतंत्र दिवस बीत चुका है, तो मुझे बताया गया कि एआई शिखर सम्मेलन हो रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उनसे पूछा कि जब दिल्ली में धमाके होते हैं, तो दिल्ली पुलिस कहां होती है?’’
गोखले के साथ तृणमूल सांसद सेन और हलदर भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बहस के बाद पुलिस ने बस को हटा दिया और तैनात कर्मियों की संख्या कम कर दी।
गोखले ने आरोप लगाया, ‘‘उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे बंगाली हैं और बांग्ला बोलते हैं…।’’
तृणमूल सांसद दस्तीदार भी यहां पुलिसकर्मियों के साथ बहस करती देखी गईं।
तृणमूल की राज्यसभा में उपनेता सागरिका घोष ने बाद में यह मुद्दा संसद के उच्च सदन में उठाया। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एसआईआर प्रक्रिया के पीड़ितों का एक प्रतिनिधिमंडल, जिन्होंने हर तरह के नुकसान झेले हैं, को दिल्ली पुलिस द्वारा परेशान किया गया और उनके साथ बदसलूकी की गई…।’’
तृणमूल सदस्यों ने पुलिस बल की निंदा करते हुए सदन में नारे भी लगाए।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के साथ दिल्ली के हैली रोड स्थित बंग भवन में एसआईआर से प्रभावित परिवारों के साथ बातचीत की।
भाषा धीरज दिलीप
दिलीप
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