नागपुर, 30 दिसंबर (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने नौकरी का झांसा देकर युवाओं से ठगी करने के एक मामले की जांच के आदेश दिए हैं। धोखाधड़ी के इस मामले में युवा सेना नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे के चचेरे भाई वरुण सरदेसाई के शामिल होने के आरोप हैं।
यह फैसला राज्य सरकार द्वारा दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक दिशा सालियन की मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की घोषणा के कुछ दिनों किया गया है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक योगेश सागर ने वरुण सरदेसाई का जिक्र करते हुए कहा कि जब एक राजनीतिक दल के उभरते सितारे और पार्टी नेतृत्व के किसी करीबी पर आरोप लगता है, तो यह राज्य के लिए एक गंभीर मुद्दा है।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘‘ यह मामला गंभीर है और सरकार इसकी जांच करेगी।’’
करीब एक सप्ताह पहले फडणवीस ने दिशा सालियन की मौत की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने की घोषणा की थी।
महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों ने पिछले सप्ताह एसआईटी के गठन की मांग की थी। वे स्पष्ट रूप से शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधायक एवं पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे को निशाना बना रहे थे।
वरुण सरदेसाई शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट की युवा शाखा युवा सेना के नेता हैं और वह आदित्य के चचेरे भाई भी हैं।
भाजपा के विधायक योगेश सागर ने नौकरी में धोखाधड़ी का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा में शुक्रवार को कहा कि सरदेसाई हिंदुस्तान स्काउट्स एंड गाइड्स के अध्यक्ष थे, जबकि रूपेश कदम और पंकज चौरागड़े क्रमशः इसके सचिव और कोषाध्यक्ष थे।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया, ‘‘युवकों से कम से कम 10 लाख रुपये लिए गए और उन्हें प्रशिक्षण के लिए गोंदिया भेज दिया गया। गोंदिया में एक स्कूल बनाया गया था और उन्हें वहां प्रशिक्षित किया गया था। प्रशिक्षण के बाद उन्हें नियुक्ति पत्र दिया गया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें स्कूल द्वारा प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किया जाएगा। ’’
उन्होंने दावा किया कि गरीब किसानों के बच्चों से कम से कम आठ से 10 लाख रुपये लिए गए, जिन्होंने जमीन बेचकर पैसे जुटाए थे।
भाजपा नेता ने कहा कि जब ये युवा अपने नियुक्ति पत्र के साथ बाद में स्कूल गए, तो उन्हें यह कहते हुए ‘दूर भगा दिया’ गया कि प्रतिष्ठान हिंदुस्तान स्काउट्स और गाइड्स से जुड़ा हुआ नहीं है।
सागर ने आरोप लगाया कि चौरागड़े से संपर्क करने पर, प्रभावित युवकों को सूचित किया गया कि उनका पैसा सरदेसाई को दिया गया था और पैसा वापस मिलने पर उन्हें वापस कर दिया जाएगा।
सागर ने कहा कि इसके बाद तत्कालीन (एमवीए) सरकार सत्ता में आ गई और वह मुख्यमंत्री के रिश्तेदार थे। वे (युवा) तत्कालीन मुख्यमंत्री से मिलने भी गए थे, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे उनसे मिले या नहीं । भाषा रवि कांत नरेश
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