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Friday, 16 January, 2026
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दिल्ली में प्रशासन संबंधी मुद्दों पर चर्चा के लिए उप राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया

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नयी दिल्ली, नौ जनवरी (भाषा) दिल्ली के उप राज्यपाल वी के सक्सेना ने सोमवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखकर दिल्ली में प्रशासन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए आमंत्रित किया, जिस पर मुख्यमंत्री ने इस विषय पर सार्वजनिक विचार-विमर्श का सुझाव दिया।

केजरीवाल ने उप राज्यपाल के पत्र के जवाब में उनके इस बयान पर अप्रसन्नता भी जताई कि मुख्यमंत्री दूसरे राज्यों में अपने चुनाव प्रचार के कारण दिल्ली में शासन का काम गंभीरता से करने में असमर्थ थे।

उप राज्यपाल ने कहा कि मुख्यमंत्री अक्टूबर 2022 तक उनसे नियमित मुलाकात करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने विधानसभा और निगम चुनावों में व्यस्तता का हवाला देते हुए भाग लेने में असमर्थता जताई।

उन्होंने कहा कि चुनाव हो चुके हैं और अब राष्ट्रीय राजधानी के निवासियों के हित में ‘विवाद-रहित’ शासन के लिए बैठकें बहाल होनी चाहिए।

केजरीवाल से मिले अनेक पत्रों का जिक्र करते हुए सक्सेना ने अपने पत्र में शुरुआत में लिखा, ‘‘मैं इस बात की सराहना करना चाहूंगा कि आपने शहर में शासन के काम को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है और उन संवैधानिक प्रावधानों, विधानों तथा कानूनों की जटिलताओं में उलझ गये हैं जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली के प्रशासन की बहुस्तरीय योजना को रेखांकित करते हैं।’’

केजरीवाल ने जवाब में लिखा, ‘‘आप एक राष्ट्रीय पार्टी है और इसके राष्ट्रीय संयोजक के रूप में मुझे देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव प्रचार में भाग लेना होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री, माननीय गृह मंत्री और कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री जिनमें योगी आदित्यनाथ जी, शिवराज जी, पुष्कर धामीजी आदि शामिल हैं, भी उस समय गुजरात और दिल्ली में अपनी पार्टी के लिए प्रचार कर रहे थे।’’

केजरीवाल ने कहा कि वह उप राज्यपाल के कार्यालय के साथ सुविधा के हिसाब से एक तारीख तय करके उनसे मिलने जरूर जाएंगे।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले एक महत्वपूर्ण चर्चा शुरू हुई जिसका भारतीय लोकतंत्र पर महत्वपूर्ण असर है। उन्होंने सक्सेना से दिल्ली में निर्वाचित सरकार और उप राज्यपाल के प्रशासन के बीच सर्वोच्चता के सवाल पर भी रुख स्पष्ट करने को कहा।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘मैं आपसे अनुरोध करुंगा कि इन विषयों पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख रखें। जब आपने निर्वाचित सरकार को दरकिनार करते हुए एकपक्षीय तरीके से (नगर निगम में) 10 एल्डरमैन, पीठासीन अधिकारी को मनोनीत किया तथा हज समिति गठित की और अधिकारियों से सीधे जरूरी अधिसूचनाएं जारी कराईं तो जनता के बीच कड़ी आलोचना हुई।’’

केजरीवाल ने गत सात जनवरी को भी उप राज्यपाल से सर्वोच्चता के सवाल पर जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।

उन्होंने पूछा कि जिन विषयों में उप राज्यपाल को ‘प्रशासक’ बताया गया है, क्या उन सभी में निर्वाचित सरकार की अनदेखी की जाएगी और क्या वह सीधे अधिकारियों और विभागों से काम कराएंगे।

केजरीवाल ने कहा कि उदाहरण के लिए बिजली, स्वास्थ्य, पानी, शिक्षा आदि से जुड़े सभी कानून उप राज्यपाल को प्रशासक के रूप में परिभाषित करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘तो, क्या इसका यह मतलब हुआ कि अब से बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जल विभाग आदि सभी को सीधे आप चलाएंगे?’’

केजरीवाल ने कहा, ‘‘तो सर चुनी हुई सरकार क्या करेगी? क्या यह उच्चतम न्यायालय के सभी फैसलों के विरोधाभासी नहीं होगा जिनमें बार-बार कहा गया है कि उप राज्यपाल मंत्रपरिषद की सलाह और सहायता के साथ काम करने को बाध्य हैं।’’

उन्होंने कहा कि सभी मुद्दों पर ‘‘चाय पर निजी तरीके से बातचीत हो सकती है या इस मुद्दे पर सार्वजनिक विचार-विमर्श उपयोगी रहेगा।’’

दिल्ली में उप राज्यपाल कार्यालय और आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार के बीच अनेक मुद्दों पर गतिरोध रहा है, जिसमें अब वापस ले ली गई आबकारी नीति भी है।

सक्सेना ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली में प्रशासन के प्रावधान किसी भी याचिकाकर्ता, वकील और आम आदमी के लिए पूरी तरह स्पष्ट हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं आपको एक बैठक के लिए आमंत्रित करना चाहूंगा, जहां हम विषयों पर विस्तार से चर्चा कर सकें।’’

भाषा वैभव रंजन

रंजन

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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