गुवाहाटी, 15 मार्च (भाषा) पश्चिम बंगाल में हल्दिया से बांग्लादेश होते हुए माल की आवाजाही पूरी करने के बाद ब्रह्मपुत्र नदी पर चलने वाले अब तक के सबसे लंबे जहाज ने मंगलवार को यहां पांडु बंदरगाह पर लंगर डाला।
नब्बे मीटर लंबे जहाज एमवी राम प्रसाद बिस्मिल ने दो मालवाहक नौकाएं डीबी कल्पना चावला और डीबी एपीजे अब्दुल कलाम के साथ 1,793 मीट्रिक टन स्टील की छड़ें लेकर हल्दिया बंदरगाह से भारी माल ले जाने के प्रायोगिक परीक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।
केंद्रीय जहाजरानी, बंदरगाह और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने 16 फरवरी को हल्दिया के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह से जहाज को हरी झंडी दिखाई थी। नयी दिल्ली से डिजिटल तरीके से कार्यक्रम से जुड़ते हुए सोनोवाल ने कहा, ‘‘इस सबसे लंबे जहाज का परीक्षण सफर आज सफल रहा, इसलिए हमें यह स्वीकार करना चाहिए कि टीम द्वारा कई हिस्सों में इस चुनौतीपूर्ण मौसम के दौरान नदी की गहराई को ध्यान में रखते हुए एक कामकाजी मार्ग को तैयार करने के लिए संभव कोशिश की गई।’’
उन्होंने कहा कि केंद्र असम में जल परिवहन के लिए व्यावसायिक व्यवहार्यता लाने और ब्रह्मपुत्र की जीवन शक्ति को फिर से जीवंत करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दृष्टि ‘‘परिवहन के माध्यम से परिवर्तन’ के अपने दृष्टिकोण के तहत भारत के विकास इंजन को शक्ति देने के लिए पूर्वोत्तर की अष्टलक्ष्मी क्षमता को सक्रिय करना है।’’
सोनोवाल ने कहा, ‘‘यह न केवल परिवहन का सबसे सस्ता और पारिस्थितिक रूप से सबसे कुशल तरीका है बल्कि यह समुद्री नेटवर्क के माध्यम से पूर्वोत्तर के व्यापार के लिए शेष दुनिया के साथ लंबे समय से प्रतीक्षित जुड़ाव को भी मुमकिन बनाता है।’’
मंत्री ने कहा कि असम के लोगों के लिए ब्रह्मपुत्र जीवन रेखा है और इसे प्रधानमंत्री ने समझा था, जिन्होंने पारिस्थितिक रूप से इस संवेदनशील क्षेत्र के विकास को एक ऐसे माध्यम से आकार देने की कल्पना की जो आर्थिक और पर्यावरण के अनुकूल हो। सोनोवाल ने इस प्रायोगिक यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए प्रदान किए गए समर्थन को लेकर प्रधानमंत्री, बांग्लादेश सरकार, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा और पश्चिम बंगाल तथा बिहार की सरकारों को धन्यवाद दिया।
इससे पहले, एमवी लाल बहादुर शास्त्री ने पटना से पांडु तक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के लिए 200 मीट्रिक टन खाद्यान्न की एक खेप को ढोकर ब्रह्मपुत्र के जरिए बांग्लादेश से पटना के बीच परीक्षण यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा किया।
भाषा आशीष प्रशांत
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