नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) दिल्ली सरकार की सचिव पद्मा जायसवाल ने बुधवार को कहा कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में डिजिटल खाई को पाटने के लिए ऐसे विकेन्द्रित तंत्र की आवश्यकता है, जिनमें स्थानीय भाषाओं पर आधारित मॉडल शामिल हों।
उन्होंने यहां ‘हेल्थ ऑफ इंडिया समिट 2026’ में कहा कि भारत को जमीनी हकीकतों के आधार पर अपनी खुद की प्रणाली विकसित करनी होगी और वैश्विक स्तर पर अन्य देशों में जो किया जा रहा है, उसकी नकल नहीं करनी होगी।
जायसवाल ने कहा, ‘‘भारत में हाइब्रिड मॉडल लागू करने की ज़रूरत है, जिसके तहत 20–30 छोटे, स्वदेशी और भाषा-आधारित मॉडल विकसित करने होंगे, जिनमें स्थानीय आंकड़े शामिल हों और जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों, घटनाओं और ज़मीनी हकीकत के अनुसार तैयार किया जाए। तभी स्वास्थ्य क्षेत्र में अपेक्षित और प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकेंगे।’’
उन्होंने बताया कि गोवा और पुडुचेरी जैसे स्थानों पर इस तरह की प्रणालियों को पायलट परियोजनाओं के रूप में अपनाया गया है।
जायसवाल ने कहा कि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य कर्मियों के प्रशिक्षण के मामले में परिणाम बहुत ही आशाजनक रहे।
उन्होंने बताया कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मिशन की स्थापना की है।
उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विविधता और भाषाओं की बहुलता के कारण अपना अनूठा मॉडल अपनाना होगा।
भाषा यासिर सुरेश
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