नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि श्रीलंका ‘‘बहुत गंभीर संकट’’ का सामना कर रहा है और उससे वित्तीय विवेक, जिम्मेदार शासन और ‘‘ मुफ्त की संस्कृति’’ से दूर रहने का सबक लेना चाहिए।
इस बैठक में कांग्रेस, वाम दलों और द्रमुक सहित 28 राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने श्रीलंका जैसे हालात भारत में पैदा होने की आशंका को खारिज कर दिया।
जयशंकर ने बैठक के बाद कहा, ‘‘ गेंद श्रीलंका और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पाले में है और वे चर्चा कर रहे हैं। उन्हें समझौते पर पहुंचने की जरूरत है, तब हम (भारत) देखेंगे कि हम क्या सहायक भूमिका निभा सकते हैं।’’
उन्होंने कहा कि श्रीलंका अब भी बहुत गंभीर स्थिति में है।
सर्वदलीय बैठक के दौरान इस मुद्दे पर दो प्रस्तुति दी गई।एक प्रस्तुति विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने श्रीलंका संकट और उसके राजनीतिक असर पर दिया जबकि दूसरी प्रस्तुति आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ ने सभी भारतीय राज्यों की आर्थिक सेहत पर दिया।
जयशंकर ने राज्यों की आर्थिक सेहत पर प्रस्तुति देते हुए कहा, ‘‘हम नहीं समझते की श्रीलंका जैसी स्थिति भारत में उत्पन्न हो सकती है। लेकिन तर्क है जो हम करना चाहते हैं, हम वित्तीय विवेक के महत्व को रेखांकित करना चाहते हैं। इसलिए हम यहां एक या दो राज्य को रेखांकित नहीं कर रहे हैं बल्कि लगभग सभी राज्यों की आर्थिक सेहत के बारे में बता रहे हैं। इसमें कोई राजनीतिक मंशा नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ये आंकड़े भारत में तुलनात्मक आधार पर है ताकि प्रत्येक राजनीतिक पार्टी और नेता को सही और स्पष्ट संदेश मिल जाए।
जयशंकर ने बैठक का सामपन इस बात पर जोर देते हुए किया कि श्रीलंका के संकट से सबक सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बड़ा सबक इससे वित्तीय विवेक और सुशासन की सीखने की है।
उन्होंने कहा, ‘‘सौभाग्य से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे पास दोनों पर्याप्त है।’’
जब संवाददाताओं ने उनसे पूछा कि पड़ोसी देश की स्थिति से क्या सबक सीखा जा सकता है तो जयशंकर ने कहा, ‘‘श्रीलंका से आने वाला सबक बहुत ही मजबूत है। ये सबक हैं वित्तीय विवेक, जिम्मेदार शासन और मुफ्त की संस्कृति नहीं होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ जिस कारण से हमने आप सभी से सर्वदलीय बैठक में हिस्सा लेने का अनुरोध किया है, वह यह है कि.. यह एक बहुत गंभीर संकट है और श्रीलंका में जो हम देख रहे हैं, वह कई मायने में अभूतपूर्व स्थिति है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह मामला करीबी पड़ोसी से संबंधित है और इसके काफी करीब होने के कारण हम स्वाभाविक रूप से परिणामों को लेकर चिंतित हैं।’’
बाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जयशंकर ने कहा कि मछुआरों का मुद्दा सहित लंबे समय से लंबित मामलों पर भी बैठक में चर्चा की गई।
उन्होंने नेताओं को सूचित किया कि जनवरी से अबतक भारत ने श्रीलंका को 3.8 अरब डॉलर की मदद की है।
उन्होंने बताया, ‘‘किसी और देश ने इस स्तर पर श्रीलंका की मदद नहीं है जितनी हमने की है और आईएमएफ सहित अन्य संस्थानों से भी सहायता दिलाने में मदद कर रहे हैं।
इस बैठक में विदेशमंत्री जयशंकर, संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी, मत्स्यपालन मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला सहित सरकार की ओर से आठ मंत्रियों ने हिस्सा लिया।
जयशंकर ने कहा कि श्रीलंका को लेकर कई गलत तुलनाएं हो रही हैं और कुछ लोग पूछ रहे हैं कि क्या ऐसी स्थिति भारत में आ सकती है। उन्होंने इसे गलत तुलना बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसलिए वित्त मंत्रालय को कहा कि वह प्रस्तुति तैयार करे जिसमें राज्यवार राजस्व, व्यय, भुगतान नहीं किए गए देनदारियों की जानकारी हो।’’
विदेश मंत्री ने जोर दिया कि यह सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं के बीच बहुत खुले तौर पर चर्चा हुई।
विपक्ष की ओर से कांग्रेस के पी.चिदंबरम और मणिकम टैगोर, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की ओर से शरद पवार और द्रमुक की ओर से टी.आर.बालू और एम.एम.अब्दुल्ला ने हिस्सा लिया।
बैठक में अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई, तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूख अब्दुल्ला, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तेलंगाना राष्ट्र समिति के केशव राव, बहुजन समाज पार्टी के रीतेश पांडे, वाईएसआर कांग्रेस के विजयसाई रेड्डी और एमडीएमके के वाइको आदि ने हिस्सा लिया।
श्रीलंका पिछले सात दशकों में सबसे गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है, जहां विदेशी मुद्रा की कमी के कारण भोजन, ईंधन और दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं के आयात में बाधा आ रही है। सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शनों के बाद आर्थिक संकट से उपजे हालातों ने देश में एक राजनीतिक संकट को भी जन्म दिया है। कार्यवाहक राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया है।
भाषा धीरज रंजन
रंजन
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
