नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटीटी) मॉड्यूल के आठ सदस्यों की न्यायिक हिरासत रविवार को 14 दिनों के लिए बढ़ा दी। इन सभी ने भारत में कथित तौर पर अवैध रूप से प्रवेश किया और जाली पहचान पत्र प्राप्त किए।
लश्कर-ए-तैयबा के सदस्यों में से सात बांग्लादेशी नागरिक हैं। इन सभी को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अदालत में पेश किया गया। उनकी पिछली सात दिवसीय न्यायिक हिरासत रविवार को समाप्त हुई।
बाईस फरवरी को, तीन राज्यों में चलाए गए एक बड़े आतंकवाद-रोधी अभियान में, दिल्ली पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था।
उमर फारूक, रुबिउल इस्लाम, मोहम्मद मिजानुर रहमान, मोहम्मद सैफियत हुसैन, मोहम्मद जाहिदुर इस्लाम, मोहम्मद लिटन, मोहम्मद उज्ज्ल और मोहम्मद उमर को अदालत में पेश किया गया।
ये गिरफ्तारियां पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में समन्वित छापेमारी के बाद की गई थीं, जब जांचकर्ताओं ने दिल्ली में कई स्थानों पर आतंकवादी बुरहान वानी की तस्वीरों वाले ‘पाकिस्तान समर्थक’ और ‘आतंकवाद समर्थक’ पोस्टर लगाने में समूह की संलिप्तता का पता लगाया था।
पुलिस के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और बांग्लादेश स्थित आतंकवादी संगठनों के समर्थन से देश में एक बड़ा आतंकी हमला करने की योजना बना रहे थे।
पुलिस का दावा है कि इस मॉड्यूल को बांग्लादेश से शब्बीर अहमद लोन उर्फ राजा उर्फ कश्मीरी संचालित कर रहा था, जो जम्मू कश्मीर का एक प्रशिक्षित लश्कर-ए-तैयबा आतंकवादी है। इसे पहले 2007 में दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया था। इन हथियारों में एके-47 राइफल और ग्रेनेड शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि श्रीनगर के कंगन का रहने वाला लोन 2018 में तिहाड़ जेल से रिहा होने के बाद बांग्लादेश भाग गया था और भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी आतंकवादियों के स्लीपर सेल को सक्रिय करके लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेटवर्क को पुनर्जीवित करने का काम कर रहा था।
भाषा अमित नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
