जम्मू, 24 फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर में भारी बारिश से 152 लोगों की मौत हो गयी, 179 लोग घायल हुए, लगभग 21,000 आवासीय ढांचे (जिनमें ज्यादातर आवासीय मकान थे) क्षतिग्रस्त हो गये और 1515 पशु मारे गये। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग (डीएमआरआरआरडी) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, कुल मृतकों में से 151 जम्मू संभाग से थे जबकि कश्मीर घाटी में बारिश से एक व्यक्ति की मौत हुई।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मृतकों में लगभग 100 तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जिनकी अगस्त में किश्तवाड़ जिले स्थित मचैल माता मंदिर और रियासी जिले में वैष्णो देवी मंदिर जाते समय बादल फटने व भूस्खलन में जान चली गई थी।
किश्तवाड़ के चिसोटी गांव (मचैल माता मंदिर का प्रवेश द्वार) में भीषण बादल फटने से 63 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य लोग घायल हुए थे जबकि 30 लोग लापता हो गए।
इस घटना के बाद 26 अगस्त को वैष्णो देवी मार्ग पर लगातार बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य तीर्थयात्री घायल हो गए।
सरकार ने कहा कि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत मानदंडों के अनुसार जानमाल के नुकसान, घायलों और घरों को हुए नुकसान के लिए मुआवजा वितरित कर दिया गया है।
विभाग ने कहा कि राहत और पुनर्निर्माण कार्यों के लिए वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कोष के तहत 289.39 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं, जिसमें जम्मू संभाग के लिए 200.39 करोड़ रुपये और कश्मीर संभाग के लिए 89 करोड़ रुपये शामिल हैं।
जम्मू संभाग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जहां 3,304 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, 1,818 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए और 11,622 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
इसके अलावा, 3,531 झोपड़ियां व पशु शेड नष्ट हो गए जबकि1,461 पशुओं की मौत हो गई।
सरकार ने बताया कि कश्मीर संभाग में 12 मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए, 44 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए और 597 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए।
इसके अलावा, 71 झोपड़ियां व पशु शेड क्षतिग्रस्त हो गए और 54 पशुओं की मौत हो गई।
विभाग ने बताया कि गृह मंत्रालय ने तीन से सात सितंबर, 2025 तक जम्मू-कश्मीर में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) को नियुक्त किया था और दल ने केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न प्रभावित जिलों का दौरा किया।
नुकसान और क्षति का ज्ञापन छह नवंबर, 2025 को मंत्रालय को प्रस्तुत कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री राहत कोष (सीएमआरएफ) के तहत किश्तवाड़ के चिसोटी बाढ़ पीड़ितों के लिए 207 लाख रुपये से अधिक, पुंछ जिले में सुरथी व कालाबन गांवों में भूस्खलन से प्रभावित घरों के लिए 45 लाख रुपये, रियासी जिले में माता वैष्णो देवी में भूस्खलन पीड़ितों के लिए 95 लाख रुपये, रामबन जिले में 253.25 लाख रुपये और कठुआ जिले में मृतकों व घायलों के लिए 21.50 लाख रुपये की राहत प्रदान की गई।
सरकार ने बताया कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) के तहत चिसोटी बादल फटने की घटना में मारे गए 63 लोगों और घायल हुए 29 लोगों के लिए 141 लाख रुपये की राशि सीधे ऑनलाइन अंतरित की गई।
भाषा जितेंद्र माधव
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