बेंगलुरु, 15 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक वी सुनील कुमार ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) से जुड़े एक कथित जाली दस्तावेज की फॉरेंसिक जांच की मांग करते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं।
उनका यह बयान पुलिस की ओर से शुक्रवार को मुख्यमंत्री कार्यालय की शिकायत पर मामला दर्ज किए जाने के बाद आया है। शिकायत में कहा गया कि सोशल मीडिया पर एक फर्जी नोट प्रसारित किया गया, जिसमें गलत दावा किया गया कि मंड्या के एक जिला स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अधिकारी को मैसुरु में आबकारी उपायुक्त नियुक्त किया गया है।
विधान सौध थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ जालसाजी और जाली दस्तावेज के इस्तेमाल के संबंध में मामला दर्ज किया गया है।
सीएमओ ने आरोप लगाया कि यह कृत्य मुख्यमंत्री और राज्य की कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया।
भाजपा विधायक कुमार ने शनिवार को एक पोस्ट में कहा, ‘‘अगर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर वाला पत्र ही फर्जी है, तो क्या हमें मुख्यमंत्री कार्यालय के कामकाज पर गौर नहीं करना चाहिए?’’
उन्होंने आरोप लगाया कि इससे प्रशासनिक चूक पर गंभीर सवाल उठते हैं और दावा किया कि मुख्यमंत्री सिद्धरमैया केवल पद पर ध्यान दे रहे हैं, कार्यालय के कामकाज पर नहीं।
फॉरेंसिक जांच की मांग करते हुए कुमार ने कहा कि यदि पत्र फर्जी है तो उस पर मौजूद हस्ताक्षर की प्रामाणिकता भी जांची जानी चाहिए और इसके लिए हस्ताक्षर को फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाल भेजा जाना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि वह असली है या जाली।
उन्होंने आशंका जताई कि यह मुख्यमंत्री कार्यालय के भीतर जारी कोई बड़ा ‘लेटरहेड घोटाला’ भी हो सकता है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सिद्धरमैया ने शुक्रवार को कहा कि फर्जी पत्र बनाना और फैलाना निंदनीय व बेहद गंभीर अपराध है।
उन्होंने सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से जानकारी साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करने की अपील की और आगाह किया कि फोटोशॉप या कृत्रिम मेधा (एआई) के दौर में अपुष्ट सामग्री फैलाना भी अपराध हो सकता है।
भाषा खारी शोभना
शोभना
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
