Thursday, 8 December, 2022
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‘कलमा’ को लेकर विरोध का सामना कर रहा कानपुर का स्कूल दिशानिर्देशों के लिए योगी को लिखेगा पत्र

सभी धर्मों की प्रार्थनाएं कराने के विरोध के चलते फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया था. गुरुवार को यह फिर से खुलने के लिए तैयार है.

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लखनऊ: ‘कलमा’ विवाद में फंसे कानपुर के स्कूल ने माफी मांग ली है. लेकिन विरोध प्रदर्शनों से आहत स्कूल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक अनुरोध करने वाला है.

लोगों के विरोध को देखते हुए फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल को दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया था. गुरुवार को यह फिर से खुलने वाला है.

फ्लोरेट्स इंटरनेशनल स्कूल के प्रबंध निदेशक सुमीत मखीजा ने कहा, ‘बच्चों का भविष्य खराब किया जा रहा है. हमें स्कूल को बंद करना पड़ा क्योंकि हम नहीं चाहते थे कि हमारे बच्चे परेशान हों. उन्होंने कहा, ‘कई माता-पिता हमारे समर्थन में सामने आए हैं और फेसबुक, ट्विटर आदि पर लिखा है. हमारी अंतरात्मा साफ है.’

उन्होंने कहा, ‘क्या करना है और क्या नहीं, हम सीएम और डीएम को पत्र लिखकर इस पर दिशानिर्देश लेने के लिए योजना बना रहे हैं. स्पेशल असेंबली का क्या होगा, जब बच्चे गणेश चतुर्थी, सरस्वती पूजा और ईद के अवसर पर अलग-अलग भगवानों का रूप धारण कर तैयार होते हैं? हमने प्रशासन और मीडिया से लिखित माफी मांगी है. हमारा इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था.’

स्कूल में सुबह असेंबली में चार धर्मों की प्रार्थनाएं कराईं जाती थीं. लेकिन अब इस विवाद- भाजपा और विहिप के सदस्यों ने इसका विरोध किया- के बाद इन्हें बंद कर दिया गया है और इनकी जगह राष्ट्रगान गाया जाएगा. रविवार को सबसे पहले विवाद तब शुरू हुआ जब एक अभिभावक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें दावा किया गया था कि उनकी बेटी को स्कूल में ‘कलमा‘ (मुस्लिम धर्म का मूल मंत्र) पढ़ाया जाता है और उसे पूरा पाठ याद है.

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इस मुद्दे को एक ट्विटर यूजर ने कानपुर पुलिस तक पहुंचाया और पुलिसकर्मियों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों की एक टीम ने आरोपों की पुष्टि करने के लिए सोमवार तड़के स्कूल का दौरा किया.

मखीजा ने विरोध को ‘शर्मनाक कृत्य’ बताया और कहा कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने स्कूल पर जबरन धर्म परिवर्तन में शामिल होने का आरोप लगाया. उन पर कथित तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और राज्य के धर्मांतरण विरोधी कानून के लिए मामला दर्ज किया गया है.

सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) सीसामऊ, निशंक शर्मा स्कूल का दौरा करने वाली टीम का हिस्सा थे. उन्होंने सोमवार को कहा कि सुबह की असेंबली में छात्र सिर्फ राष्ट्रगान गा रहे थे.

उन्होंने कहा, ‘स्कूल ने बताया कि वह पिछले 12-13 सालों से सभी धर्मों की प्रार्थनाएं कराते आ रहे हैं और किसी ने कभी भी इस पर आपत्ति नहीं की.’

एसीपी ने बताया, ‘लगभग दो-तीन दिन पहले जब कुछ लोगों ने आपत्ति की तो स्कूल के अधिकारियों ने उन्हें सूचित किया कि अगर वे चाहते हैं, तो इसे बंद कर दिया जाएगा. शनिवार को स्कूल अधिकारियों ने सभी धर्मों की प्रार्थनाएं रोकने और सिर्फ राष्ट्रगान गाने का आदेश जारी कर दिया था.’


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‘स्कूल में ताला लगा देंगे’

विहिप और उसकी युवा शाखा बजरंग दल के सदस्यों ने इसे लेकर संस्थान में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था. इसका नेतृत्व करने वाले भाजपा पार्षद महेंद्र शुक्ला ने कहा कि वे ‘स्कूल में ताला लगा देंगे’

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि छात्रों को ‘कलमा’ सुनाने की प्रैक्टिस ‘गलत’ और ‘प्राकृतिक न्याय’ के खिलाफ है.

कुछ प्रदर्शनकारियों को स्कूल की इमारत पर गंगाजल छिड़कते भी देखा गया.

वीएचपी कानपुर संगठन सचिव मधुरम ने दिप्रिंट को बताया कि वीएचपी की युवा शाखा से जुड़े बजरंग दल के कुछ सदस्य सोमवार को निजी स्कूल के बाहर प्रदर्शन में शामिल थे.

कुछ अभिभावकों के साथ प्रदर्शनकारियों ने स्कूल प्रबंधन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. शर्मा ने दिप्रिंट को बताया कि इस मामले में शिकायतकर्ता माता-पिता रवि राजपूत हैं.

उन्होंने कहा, ‘हमने शिकायत सुनी और स्कूल के मालिक सुमीत मखीजा के खिलाफ आईपीसी की धारा 295ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करना) और यूपी में धर्म परिवर्तन पर प्रतिबंध अधिनियम, 2021 के तहत प्राथमिकी दर्ज की.’

शुक्ला ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने स्कूल को बंद किए जाने के लिए इसलिए मजबूर किया क्योंकि छात्रों को राष्ट्रगान की बजाय ‘कलमा’ सुनाने के लिए कहा जा रहा था. लेकिन इस दावे का स्कूल के अधिकारियों ने खंडन किया है.

मामले की जांच कानपुर के डीएम विशाख जी ने भी की थी, जिसके बाद मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग के एक अधिकारी के नेतृत्व में एक टीम निजी स्कूल पहुंची और प्रबंधन ने लिखित तौर पर माफी मांगी.


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’19 सालों से सभी धर्मों की प्रार्थनाएं कराई जा रही थीं’

मखीजा ने दिप्रिंट को बताया कि इस स्कूल की यह ब्रांच पिछले 12-13 सालों से चल रही है, वहीं मैन ब्रांच 2003 में खोली गई थी.

मखीजा ने कहा, ‘कुछ दिनों पहले मुझे एक गुमनाम व्यक्ति का फोन आया. उन्होंने कहा कि उनका बच्चा पिछले सात साल से स्कूल में पढ़ रहा था और फिर वह सुबह की प्रार्थना के तहत कलमा के पाठ का विरोध करने लगे.’

उन्होंने दोहराया कि छात्रों को पिछले 19 सालों से सुबह चार अलग-अलग धर्मों की प्रार्थना कराई जाती रही है.

वह आगा बताते हैं, ‘मैंने उनसे (कॉल करने वाले) अपनी पहचान बताने और चार-पांच माता-पिता से लिखित शिकायत देने के लिए कहा. अगर ऐसा होता है तो इसे (चार प्रार्थनाओं के पाठ) रोक दिया जाएगा. बाद में मुझे स्थानीय पुलिस से फोन आया और मुझसे इस मुद्दे के बारे में पूछा गया. उन्हें भी उस समय तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी.

मखीजा ने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने आखिरकार छात्रों को चार अलग-अलग धर्मों की प्रार्थना कराए जाने को रोकने का फैसला किया क्योंकि स्कूल में ‘सभी धर्मों के छात्र पढ़ रहे हैं’ और ‘कल, किसी को दूसरे धर्म की प्रार्थना पर आपत्ति हो सकती है.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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