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Saturday, 17 January, 2026
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नौकरी के लिए जरूरी कौशल स्थायी नहीं होते: नोबेल पुरस्कार विजेता एस्थर डुफ्लो

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(माणिक गुप्ता)

जयपुर, 16 जनवरी (भाषा) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री एस्थर डुफ्लो ने कॉलेज शिक्षा के ढांचे पर पुनर्विचार का शुक्रवार को आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को व्यावसायिक प्रशिक्षण पर कम और छात्रों को तेजी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए तैयार करने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

जयपुर में 19वें जयपुर साहित्य महोत्सव (जेएलएफ) में डुफ्लो ने प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से हो बदलावों पर अपने विचार जाहिर किए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उच्च शिक्षा को केवल नौकरी के लिए तैयार स्नातकों की फौज खड़ी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मानविकी में एक मजबूत आधार प्रदान करना चाहिए, जो तकनीकी विषय की पढ़ाई कर रहे छात्रों के लिए भी एक आवश्यक घटक है।

डुफ्लो ने कहा, “परिदृश्य इतनी तेजी से बदल रहा है कि आप किसी व्यक्ति को जो विशिष्ट कौशल सिखा रहे हैं, वह उसकी पढ़ाई पूरी होने तक अप्रचलित होने की कगार पर पहुंच जाएगा और उसके नौकरी की तलाश शुरू करने तक निश्चित रूप से अप्रचलित हो जाएगा। हमें कॉलेज शिक्षा के ढांचे पर इस तरह से पुनर्विचार करना होगा कि यह छात्रों को तेजी से बदलती दुनिया में खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए तैयार कर सके।”

उन्होंने कहा, “…मेरे विचार से इसका मतलब यह है-जिसमें कुछ हद तक स्वार्थ भी झलक सकता है-कि कॉलेज शिक्षा में मानविकी की मजबूत पृष्ठभूमि को समाहित किया जाना चाहिए, जिसमें लिखने की क्षमता, सोचने की क्षमता और अपने लिए निर्णय लेने की क्षमता शामिल है।”

जेएलएफ में डुफ्लो (53) ने अपनी बेस्टसेलर पुस्तक ‘पुअर इकोनॉमिक्स: रीथिंकिंग पॉवर्टी एंड द वेज टू एंड इट’ का एक नया विस्तारित संस्करण पेश किया। उन्होंने यह पुस्तक अपने पति और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी के साथ मिलकर लिखी है।

उच्च शिक्षा का ढांचा कैसा होना चाहिए, इसे समझाने के लिए डुफ्लो ने जीपीएस का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि कुछ विशिष्ट कौशल भले ही जल्द अप्रचलित हो सकते हैं, लेकिन सीखने, अनुकूलन करने और सही निर्णय लेने की क्षमता बनी रहती है।

डुफ्लो ने स्पष्ट लेखन, आलोचनात्मक चिंतन और स्वतंत्र निर्णय लेने जैसे कौशलों को कॉलेज शिक्षा में शामिल किए जाने वाले अहम पहलु करार दिया। उन्होंने कहा कि दर्शनशास्त्र, नैतिक शिक्षा और सामाजिक विज्ञान जैसे विषय इन क्षमताओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

डुफ्लो ने कहा, “कोड लिखने की कला सीखने के साथ-साथ आपको मूलभूत संभाव्यता और सांख्यिकी सीखने की आवश्यकता है, क्योंकि यही वो चीजें हैं, जो इन चीजों के मूल में हैं और आगे बढ़ने में आपकी मदद करेंगी।”

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए तरक्की के लिए शिक्षा के मूलभूत सिद्धांतों की ओर लौटना आवश्यक हो सकता है।

पांच दिवसीय जयपुर साहित्य महोत्सव में बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक, शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद, ब्रिटिश अभिनेता एवं लेखक स्टीफन फ्राई, साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता अनुराधा रॉय, अनुभवी फिल्म समीक्षक भावना सोमाया और मनु जोसेफ, रुचिर जोशी व केआर मीरा सहित 350 से अधिक प्रख्यात लेखक और विद्वान हिस्सा ले रहे हैं।

भाषा पारुल पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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