नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के लिए मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच हुए मतदान के बाद देर रात मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई जो बुधवार को भी जारी रही.
जेएनयूएसयू चुनाव समिति के अनुसार, परिणाम छह नवंबर को घोषित होने की उम्मीद है.
इस साल जेएनयूएसयू चुनाव में 67 प्रतिशत मतदान हुआ जो पिछले चुनाव के 70 प्रतिशत से कम है. वर्ष 2023-24 के चुनावों में 73 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है.
जेएनयू परिसर मंगलवार को पूरे दिन ढोल-नगाड़ों, नारों और प्रचार गीतों से गूंजता रहा. छात्रों ने नए केंद्रीय समिति और स्कूल काउंसिलर को चुनने के लिए मतदान किया. मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ और शाम 5.30 बजे तक चला, जिसमें दोपहर 1 बजे से 2.30 बजे के बीच का विराम शामिल है.
कुल 9,043 छात्र चार प्रमुख केंद्रीय पदों – अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव – और विभिन्न स्कूलों में 42 काउंसिलर सीटों के लिए मतदान करने के पात्र थे.
यह मुकाबला, जिसे अक्सर व्यापक वैचारिक संघर्ष के रूप में देखा जाता है, मुख्य रूप से लेफ्ट यूनिटी – जो अखिल भारतीय छात्र संघ (आइसा), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स फेडरेशन (डीएसएफ) का गठबंधन है – और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के बीच है.
वामपंथी धड़े ने अध्यक्ष पद के लिए अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष पद के लिए किझाकूट गोपिका बाबू, महासचिव पद के लिए सुनील यादव और संयुक्त सचिव पद के लिए दानिश अली को मैदान में उतारा है. एबीवीपी ने इन चार केंद्रीय पदों के लिए क्रमश: विकास पटेल, तान्या कुमारी, राजेश्वर कांत दुबे और अनुज को अपना उम्मीदवार बनाया है.
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