नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के बाद प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया है. विश्वविद्यालय ने 9 अक्टूबर को इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी किया.
आदेश के मुताबिक, विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति (IC) ने जांच में मिले तथ्यों के आधार पर प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की सिफारिश की थी.
आदेश में कहा गया, “सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करने और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद, आंतरिक समिति (IC) की रिपोर्ट के आधार पर प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को विश्वविद्यालय की सेवा से बर्खास्त करने की सजा दी जाती है.”
प्रोफेसर अकोइजाम विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान स्कूल के सामाजिक व्यवस्था अध्ययन केंद्र से जुड़े थे. उन पर JNU की 11 छात्राओं ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे.
आदेश के अनुसार, आंतरिक समिति ने इन आरोपों की जांच की और विश्वविद्यालय के सेवा नियमों के तहत प्रोफेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की. इसके लिए UGC के संदर्भ नंबर F.91-1/2013 (TFGS)/10(1) और केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियमों के नियम 11(ix) का हवाला दिया गया.
विश्वविद्यालय ने समिति की रिपोर्ट और उपलब्ध तथ्यों पर विचार करने के बाद प्रोफेसर को नौकरी से निकालने का आदेश जारी किया.
यह कार्रवाई छात्राओं के उन आरोपों के बाद हुई है, जिनमें उन्होंने कहा था कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रोफेसर के खिलाफ उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की. छात्राओं का दावा था कि उन्होंने मई 2026 में कुलपति को यह शिकायत दी थी.
इससे पहले, 16 सितंबर को दिल्ली महिला आयोग (DCW) ने सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक वीडियो का खुद संज्ञान लिया था. यह वीडियो प्रोफेसर पर लगे आरोपों से जुड़ा था.
आयोग ने JNU प्रशासन से इस मामले में तथ्यों की रिपोर्ट मांगी थी. इसमें यह जानकारी भी मांगी गई थी कि क्या शिकायत आंतरिक शिकायत समिति को भेजी गई थी और इस मामले में क्या कार्रवाई की गई.
दिल्ली महिला आयोग ने विश्वविद्यालय को तीन दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) जमा करने का निर्देश भी दिया था. आयोग ने कहा था कि यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर कानून के अनुसार निष्पक्षता, तेजी और संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई की जानी चाहिए.