Wednesday, 25 May, 2022
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उग्रवादी खोजने गई झारखंड पुलिस ने तीन साल की बच्ची को पटक कर मार डाला

पीड़ित ने कहा पूछताछ के नाम पर पुलिस कर रही है परेशान. बीजेपी एसटी मोर्चा के प्रदेश मंत्री अवधेश सिंह चेरो और सांसद के प्रतिनिधि तक कह रहे हैं कि पीड़ित उग्रवादी नहीं है.

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झारखंड : झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की टीम पर एक तीन साल की बच्ची को पटक कर मार डालने का आरोप है. आप यकीन करें या न करें, पलामू जिले में ऐसी घटना बीते 23 अगस्त की रात को घटी है.

पुलिस रांची से 137 किलोमीटर दूर बकोरिया गांव के वंशी टोला में उग्रवादियों की तलाश में पहुंची थी. इस दौरान गांव के निवासी विनोद सिंह के घर की तलाशी लेने गई. पुलिस के मुताबिक वह झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) नामक उग्रवादी संगठन का सदस्य है.

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घर जहां बच्ची को पटक कर मारा गया | आनंद दत्ता

डर से विनोद घर में छुप गए. दरवाजा खोला और गुस्से में पुलिस ने विनोद की तीन साल की बच्ची को पटक कर मार डाला. ऐसा आरोप लगा है.

विनोद की पत्नी बबीता देवी की शिकायत पर मनिका थाने की पुलिस और सीआरपीएफ की टीम पर एफआईआर दर्ज की गई है. मामले में न्यायिक जांच का आदेश दे दिया गया है. पुलिस ने बकोरिया में ही 2016 में फर्जी मुठभेड़ में 12 लोगों को गोली मार दिया था. इसमें दो पारा शिक्षक थे जो पुलिस के मुखबिर भी थे. फिलहाल मामले की सीबीआई जांच चल रही है.


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पत्नी चिल्लाती रही, पुलिस ने रहम नहीं किया

बच्ची के पिता विनोद सिंह ने बताया कि रात एक बजे के लगभग कुछ लोग घर के बाहर आवाज लगाने लगे. कहा कि वह मनिका के थानेदार हैं, घर खोलो. डर के मारे वह घर में ही छुप गये. इस बीच वे लोग दरवाजा पीटने लगे.

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दोनों तरफ से जोर-जबर्दस्ती होने लगी. बच्ची को गोद में लिए उनकी पत्नी अपने पति को बचाने के लिए लड़ रही थी. तभी गेट खुल गया. पुलिस ने उनकी बच्ची को गोद से छीन लिया और पटक दिया. विनोद की पत्नी ने बताया कि ‘पुलिस ने बच्ची को दो बार पटका. इन बातों का जिक्र बबीता देवी की ओर से दर्ज एफआईआर में भी है.’

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मामले में एफआईआर की कॉपी.

एफआईआर के मुताबिक मामले (कांड संख्या 86/19) के तहत मनिका थाना प्रभारी और 20-30 सीआरपीएफ जवान पर हत्या, जान बूझकर चोट पहुंचाने, डकैती, शांति भंग जैसी विभिन्न धाराओं में मामला दर्जकर जांच की जा रही है.

मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची के सिर में गंभीर चोट की वजह से मौत हुई है. रिपोर्ट में ब्रेन हेमरेज और पिछले हिस्से में चोट का जिक्र है. साफ है मौत से पहले अनहोनी हुई है, जिससे उसकी मौत हुई है. फिलहाल बच्ची की मां बीमार है. उन्हें स्लाइन चढ़ाया जा रहा है.

बिना कारण बताए पुलिस ने नहीं दी एफआईआर की कॉपी

इधर पुलिस अभी से मामले को दबाने में जुटी है. बच्ची के पिता को छह दिन बाद एफआईआर की कॉपी दी गई है. मेडिकल रिपोर्ट अभी तक नहीं सौंपी गई है.

विनोद सिंह ने बताया, ‘घटना के वक्त मेरी पत्नी ने हल्ला मचाना शुरू किया. गांव के कुछ लोग मेरे घर की तरफ आए, लेकिन पुलिस ने कहा कि अगर आगे बढ़ोगे तो गोली मार देंगे.

इस दौरान सोनू सिकंदर नाम का एक व्यक्ति आया. वह चतरा सांसद सुनील सिंह का सांसद प्रतिनिधि भी है. उसने बताया कि सीआरपीएफ की तरफ से उसे फोन आया था कि वह उसके गांव आ रही है. यह बात सोनू ने गांव वालों के सामने खुद बताया.

एफआईआर के वक्त भी वह मौजूद थे. कॉपी नहीं मिलने पर उन्होंने यह भी कहा कि वह उसके घर पहुंचा देंगे. इस पर सोनू सिकंदर का कहना था कि सीआरपीएफ की तरफ से फोन नहीं आया था, जबकि घटना के तुरंत बाद सतबरवा थाने से प्रभारी रूपेश कुमार दूबे का फोन आया था. वह मामला जानना चाह रहे थे.

बकोरिया गांव सतबरवा थाना के इलाके में आता है. जबकि सीआरपीएफ के साथ मनिका थाने की पुलिस विनोद सिंह के घर पहुंची थी.

इधर सतबरवा थाने के प्रभारी ने पहले बताया कि एफआईआर की कॉपी नहीं दी गई है तो दे दी जाएगी, थाने में ही रखी है. फिर उन्होंने कहा कि विनोद सिंह खुद इसे नहीं ले जा रहे हैं. फिर उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिहाज से उनके घर में कॉपी नहीं दी गई है. बार-बार सवाल करने पर उन्होंने कहा, ‘ऐसा नहीं है कि बिना किसी कारण के नहीं दिया गया है. इस सवाल पर आप इतना जिरह मत कीजिए’

पलामू एसपी अजय लिंडा ने कहा, ‘अगर नहीं मिला है तो उससे कहिये कि वरिष्ठ पदाधिकारी से संपर्क करे. हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि जब एफआईआर की कॉपी तत्काल देनी होती है तो क्यों नहीं दी गई.’

मालूम हो कि 26 अगस्त को नई दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह नक्सलवाद प्रभावित राज्यों के सीएम के साथ बैठक कर रहे थे. झारखंड के सीएम रघुवर दास ने कहा कि उनके राज्य को आगामी चुनाव के लिए अर्धसैनिक बलों की 275 कंपनियों की जरूरत है. साथ ही पहले से तैनात अर्धसैनिक बलों की संख्या में अगले तीन सालों तक कोई कमी नहीं की जानी चाहिए. क्योंकि राज्य में माओवाद अंतिम सासें गिन रहा है. बैठक में शायद ही पुलिस और अर्धसैनिक बलों के इस करतूत की कोई चर्चा हुई हो.

यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिसिया कार्रवाई का शिकार आम आदमी को होना पड़ा है. ठीक 23 अगस्त को ही रांची के रातू थाना के हाजत में नेसार अंसारी नाम के एक चोरी के आरोपी ने फांसी लगा ली. परिजनों का आरोप है कि पुलिस की पिटाई से उसकी मौत हुई है. बचने के लिए उसे फांसी पर लटका दिया गया.

पत्थलगड़ी आंदोलन के बाद खूंटी जिले के छह गांवों जिकिलता, उदबुरू, सोनपुर, कोचांग, तुबिल और कुरुंगा के लोग झारखंड सरकार की नजर में राजद्रोही हैं. यहां 2016 से लेकर 2018 तक कुल 23 एफआईआर दर्ज की गई हैं. इसमें हजारों अज्ञात लोगों पर राजद्रोह के तहत मामला दर्ज किया गया है. सभी मामले अड़की, खूंटी और मुरहू थाने के हैं.

साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल की मानें तो झारखंड में माओवादी हिंसा में इस साल अब तक 12 आम नागरिकों की मौत हो चुकी है. वहीं 2015-19 तक 107 और 2000 से अब तक 755 आम लोगों की मौत हो चुकी है.

झारखंड स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक इस वक्त झारखंड के जेलों में 6869 विचाराधीन कैदी हैं.

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जेजेएमपी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति.

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जेजेएमपी ने रविवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि विनोद सिंह उसके संगठन का आदमी नहीं है. कर्मवीर नाम के व्यक्ति की ओर से जारी विज्ञप्ति में लिखा है कि पुलिस जानबूझकर संगठन के नाम पर निर्दोष ग्रामीणों को परेशान कर रही है.

बीजेपी एसटी मोर्चा के प्रदेश मंत्री अवधेश सिंह चेरो विनोद सिंह से मिलने उनके घर आए थे. उन्होंने बताया कि ‘वह विनोद को बहुत पहले से जानते हैं. वह उग्रवादी हो ही नहीं सकता. वह हमारे समर्थक भी हैं. वहीं सांसद प्रतिनिधि सोनू सिकंदर ने भी माना कि पीड़ित उग्रवादी नहीं है.’

विनोद सिंह के चार बच्चे थे. अब तीन बच्चों में बेटा विशाल साढ़े छह साल, बेटी कविता साढ़े चार साल और छोटी बेटी नौ महीने की है. उसका फिलहाल नाम नहीं रखा गया है. उनके पास खुद की डेढ़ एकड़ जमीन है. साथ ही गांव के ही जफूर मियां के 40 कट्ठे में बटैया पर भी खेती करते हैं. पत्नी घर के पास ही छोटा सी किराने की दुकान चलाती हैं.

दोनों पति-पत्नी डरे हुए हैं. जांच के नाम पर पुलिस हर दिन उनके घर आ रही है. विनोद के मुताबिक पुलिस हर बार यही पूछ रही है कि ‘तुम कैसे पहचाने कि वह पुलिस वाले ही थे? तुम कैसे जानते हो कि वह सीआरपीएफ ही थी?’ फिलहाल मामले की जांच चल रही है. आने वाला समय ही बताएगा कि पीड़ित को न्याय मिलता है या फिर मामले की लीपापोती होती है.

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