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Wednesday, 21 January, 2026
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जम्मू-कश्मीर: बादल फटने की घटना के महीनों बाद भी परिजनों का इंतजार जारी

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जम्मू, 21 जनवरी (भाषा) महीनों से पंजाब के जालंधर के राजेश कुमार और बिंदिया निराशा और उम्मीद के बीच जी रहे हैं। वे जम्मू में अपनी 22 साल की बेटी और उसकी दोस्त के बारे में उत्तर खोज रहे हैं, जो पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में बादल फटने के बाद लापता हो गई थीं।

जम्मू के एक और परिवार ने इस त्रासदी में अपने आठ सदस्यों को खो दिया है। परिवार का कहना है कि वे मुआवजे की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल मृत्यु प्रमाणपत्र चाहते हैं ताकि वे मृतकों के अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।

डीएनए रिपोर्ट लंबित होने के कारण उनका कहना है कि हर गुजरता दिन इस दर्द को और बढ़ा देता है कि वे उम्मीद बनाए रखें या इस क्षति को स्वीकार कर लें।

बादल फटने की घटना 14 अगस्त 2025 को चिसोटी गांव में हुई। यह स्थान माछिल माता मंदिर का प्रवेश द्वार है। इस घटना में 65 लोग मारे गए और 30 से अधिक लोग लापता हो गए जिनमें अधिकतर श्रद्धालु थे।

अपनी बेटी वंशिका और उसकी दोस्त दिशा की तस्वीरें थामे, राजेश कुमार और बिंदिया उन कई लोगों में शामिल थे जिन्होंने बुधवार को यहां प्रेस क्लब के बाहर इकट्ठा होकर न्याय की मांग की।

भावुक बिंदिया ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम साथ चल रहे थे। हमारी बेटी और उसकी दोस्त हमसे आगे बढ़ गईं। इसके बाद कुछ पता नहीं चला। हम उनके बारे में किसी भी सूचना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।”

उन्होंने जम्मू-कश्मीर सरकार पर अब तक उनके लिए कुछ नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “हमें सितंबर में डीएनए नमूने के लिए बुलाया गया था, लेकिन अब तक कोई रिपोर्ट हमारे साथ साझा नहीं की गई।”

कुमार ने कहा कि परिवार ने लापता सदस्यों को खोजने के लिए कई बार प्रयास किया। उन्होंने कहा, “हमने मृत्यु प्रमाणपत्र के लिए उप-खंडीय मजिस्ट्रेट के पास हलफनामे जमा किए और आठ सितंबर को डीएनए नमूने दिए, लेकिन अब तक जम्मू -कश्मीर प्रशासन की तरफ से कोई सूचना नहीं मिली।”

कुमार ने कहा कि उन्हें कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी और उसकी दोस्त एमबीए की छात्रा थीं और हम चाहते हैं कि सरकार उनके मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करे ताकि हम आवश्यक धार्मिक अनुष्ठान कर सकें।”

जम्मू की रेशम गढ़ कॉलोनी के निवासी रमेश कुमार ने भी इसी तरह के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस त्रासदी में उनके आठ रिश्तेदार मारे गए जिनमें उनकी दो बहनें भी शामिल थीं।

उन्होंने कहा, “हमें केवल एक शव मिला, जबकि सात लोग — तीन महिलाएं और चार बच्चे-अभी भी लापता हैं। हम पैसे की मांग नहीं कर रहे हैं, हम केवल मृत्यु प्रमाणपत्र चाहते हैं।’’

कुमार ने कहा कि उनकी बहन और उसके दो बच्चे लापता लोगों में शामिल हैं।

भाषा आशीष नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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