अमरावती, 25 सितंबर (भाषा) आंध्र प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सी अय्यन्नापात्रुडु ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह वाईएसआरसीपी प्रमुख वाई एस जगन मोहन रेड्डी को विपक्ष के नेता (एलओपी) का दर्जा नहीं दे सकते।
नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वाईएसआरसीपी के पास रेड्डी को विपक्ष का नेता मानने के लिए आवश्यक विधायकों की संख्या नहीं है।
अय्यन्नापत्रुडु ने विधानसभा को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘वह (जगन) पूछते हैं कि बिना संख्याबल के वह (विपक्षी नेता का दर्जा) क्यों नहीं दे सकते? हमारे कुछ नियम हैं। हम उन्हीं के अनुसार चलेंगे, मैं (जगन को) यह (विपक्षी नेता का दर्जा) कैसे दे सकता हूं।’’
उन्होंने कहा कि रेड्डी ने विपक्ष के नेता का दर्जा दिए जाने की अपनी याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है और अब वह सर्वोच्च न्यायालय जाने की योजना बना रहे हैं।
आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यीय विधानसभा में केवल 11 विधायकों के साथ, वाईएसआरसीपी आधिकारिक विपक्षी दल के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए आवश्यक सीमा को पूरा नहीं करती है क्योंकि इसके लिए न्यूनतम 18 विधायकों की आवश्यकता होती है।
विधानसभा की तुलना एक ‘‘मंदिर’’ से और अध्यक्ष को उसका पुजारी बताते हुए अय्यन्नापात्रुडु ने कहा कि वह रेड्डी को वह आशीर्वाद (विपक्षी नेता का दर्जा) नहीं दे सकते, जो भगवान ने नहीं दिया है।
अध्यक्ष ने पूछा, ‘‘मैंने हाल में कहा था कि अगर यह (विधानसभा) मंदिर है, तो मैं इसका पुजारी हूं। भगवान को आशीर्वाद देना ही होता है। भगवान ने आपको आशीर्वाद (नेता प्रतिपक्ष का दर्जा) नहीं दिया, इसलिए आपको 11 (विधायक) दिये। मैं पुजारी के तौर पर आपको कैसे आशीर्वाद दे सकता हूं।’’
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में कोई जीत सकता है या हार सकता है, लेकिन सभी नेताओं को राज्य के विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए।
विधानसभा अध्यक्ष ने पूर्व मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे विधानसभा का उपयोग जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए करें और आश्वासन दिया कि सरकार उनके सवालों का जवाब देगी।
उन्होंने रेड्डी के विधानसभा सत्र में भाग नहीं लेने तथा अपनी पार्टी के विधायकों को ऐसा करने से रोकने के लिए आलोचना की।
अय्यन्नापात्रुडु ने सत्र से अनुपस्थित रहते हुए प्रतिदिन सदन में दो प्रश्न भेजने के उद्देश्य पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘.. यह अलोकतांत्रिक है। मुझे लगता है कि सभी लोगों को इसकी निंदा करनी चाहिए।’’
भाषा
देवेंद्र मनीषा
मनीषा
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