गुवाहाटी, 17 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा ने रविवार को पार्टी से इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया कि उसके कई नेता राज्य में भारतीय जनता पार्टी खासतौर से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के साथ मिलीभगत करके काम कर रहे हैं।
कांग्रेस से इस्तीफा देने के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले बोरा ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे इस्तीफे पत्र में कहा कि पार्टी में अंतर्कलह से भाजपा को मदद मिली और उन्हें 1976 में छात्र नेता के दिनों से उसका सदस्य होने के बावजूद पार्टी छोड़ने पर विवश होना पड़ा।
बोरा ने अपने त्याग पत्र में कहा, ‘‘मुझे आपको यह सूचित करते हुए बहुत दुख हो रहा है कि असम में यह खुला रहस्य है कि भाजपा के खिलाफ लड़ने के बजाय असम पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस समिति) के वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग भाजपा सरकार मुख्यत: मुख्यमंत्री के साथ गुप्त समझौता किये हुए है।’’
राज्य के पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने ‘‘इस तरह से भूमिका निभायी, जिससे भाजपा के लिए हाल में असम से दोनों राज्यसभा सीट पर जीत दर्ज करने का मार्ग प्रशस्त हो गया।’’
कांग्रेस ने बोरा को संसद के ऊपरी सदन के चुनाव के लिए फिर से उम्मीदवार बनाया था। असम में विपक्षी दलों के संयुक्त उम्मीदवार के तौर पर वह राज्यसभा चुनाव हार गए थे।
बोरा ने दावा किया कि वह 2016 में एपीसीसी प्रमुख का पदभार संभालने के बाद कांग्रेस को ऐसी स्थिति में ला पाए, जहां लोगों ने उससे 2021 के विधानसभा चुनावों में सरकार बनाने की उम्मीद की। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन असम पीसीसी के वरिष्ठ नेताओं के एक धड़े की अंदरुनी कलह के कारण लोगों का हमसे भरोसा उठ गया और उन्होंने हमें जनादेश नहीं दिया।’’
पूर्व कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि भाजपा से लड़ाई के लिए एकजुट होने के बजाय विभिन्न स्तरों पर कांग्रेस नेता ‘‘अपने निहित स्वार्थों के लिए एक-दूसरे से लड़ रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा ‘‘हमारे देश के लोकतंत्र, संविधान, धर्मनिरपेक्षता तथा अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है।’’
बोरा ने कहा, ‘‘इससे भाजपा को एक के बाद एक गली-नुक्कड़ में आगे बढ़ने, देश के लाखों कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने का पर्याप्त मौका मिला है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में मेरी अंतरात्मा मुझे कांग्रेस पार्टी में बने रहने नहीं देती, जहां कुछ नेताओं के निहित स्वार्थों के लिए भाजपा के पक्ष में पार्टी के हित और विचारधारा से समझौता किया जा रहा है।’’
भाषा गोला दिलीप
दिलीप
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