जैसलमेर, 27 फरवरी (भाषा) भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास पोकरण में ‘वायुशक्ति’ अभ्यास में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया जिसे देखने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी मौजूद रहीं।
जैसलमेर जिले में थार के रेगिस्तानी इलाके में इस अभ्यास में वायुसेना ने अपनी जंगी ताकत और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किए गए मिशन की झलक दिखाई।
शुक्रवार शाम शुरू हुए इस अभ्यास के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान एवं राष्ट्रगीत से हुई। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
अभ्यास के दौरान तीन किलोमीटर के इलाके में फैले लक्ष्यों को दिखाया गया। प्रदर्शन के लिए बनाए गए लक्ष्यों में दुश्मन का रनवे, पेट्रोलियम भंडार, बंकर, रडार स्थल, टैंक और सशस्त्र काफिले, संचार केंद्र, आतंकवादियों के शिविर, शस्त्र भंडार एवं हैंगर शामिल थे।
इसके बाद लड़ाकू विमान एवं युद्धक हेलीकॉप्टर ने तालमेल बिठाकर ऑपरेशन शुरू किया जिसमें रणनीति बनाना, लक्ष्य को चिह्नित करना तथा लक्ष्यों को तबाह करना शामिल रहा।
इसके तहत जगुआर और मिराज लड़ाकू विमानों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपने ‘‘हमले के समन्वित तरीके’’ को दोहराते हुए एक साथ लक्ष्यों को निशाना बनाया। सुखोई लड़ाकू विमान ने ‘आतंकी शिविर’ पर हमला किया।
स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ ने नकल ‘रीफ्यूलिंग पॉइंट’ पर हमला करके अपनी फुर्ती दिखाई। अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, मिराज लड़ाकू विमान और एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर ने भी समन्वित ऑपरेशन में हिस्सा लिया।
अभ्यास के इस प्रदर्शन में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान किए गए ‘डिकॉय’ ऑपरेशन और ‘लोइटरिंग मिशन’ भी दिखाए गए। दुश्मन की निगरानी प्रणाली को ‘ब्लाइंड’ करने के लिए ‘सिम्युलेटेड स्ट्राइक’ में एक ‘रडार क्लस्टर’ को तबाह किया गया।
इस दौरान चिनूक हेलीकॉप्टर से हॉवित्जर तोपें तैनात की गईं।
अभ्यास के बाद के चरण में संगीत प्रस्तुति भी हुई।
अभ्यास के रात्रिकालीन चरण में टैंक, बंकर एवं ‘लॉजिस्टिक्स क्लस्टर’ को एसयू-30 और जगुआर लड़ाकू विमान के साथ हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर रुद्र ने तबाह कर दिया। रात्रिकालीन आपरेशन तय ‘लक्ष्यों’ पर सटीक निशानों के साथ शुरू हुए। लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टर ने कम दृश्यता वाले हालात में मिलकर मिशन को अंजाम दिया जिसमें उनकी तालमेल वाली लड़ाकू क्षमताएं नजर आईं।
प्रदर्शन के तहत जमीन से हवा में मार करने वाली आकाश मिसाइल भी दागी गई। गरुड़ कमांडो और 10 परा (एसएफ) के जवानों ने ‘बंधक’ बचाने का ऑपरेशन किया। कमांडो एमआई-17 हेलीकॉप्टर से कामचलाऊ भवन पर उतरे और खतरों को बेअसर करने और बंधकों को बचाने के लिए इमारत में घुस गए। यहां ‘घायलों’ के इलाज के लिए ‘मोबाइल फील्ड’ अस्पताल ‘भीष्म’ तैनात किया गया था जो मानवीय सहायता और आपदा राहत में वायुसेना की भूमिका को दिखाता है।
परिवहन विमान सी-130जे ने फंसे हुए लोगों को निकालने में मदद की। इस प्रदर्शन के आखिर में शानदार ड्रोन शो हुआ। इन ड्रोन ने रात में खुले आसमान में अलग-अलग आकृतियां बनाईं जिनमें भारत का नक्शा, संसद और वायुसेना का प्रतीक चिह्न शामिल है।
इससे पहले, दिन में भारतीय सेना की सर्वोच्च कमांडर राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘ऑलिव ग्रीन’ (जैतूनी हरे) रंग की वर्दी और हेलमेट पहन स्वदेशी हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर (एलसीएच) ‘प्रचंड’ में बतौर ‘सह-पायलट’ उड़ान भरी। लगभग 25 मिनट के इस मिशन के दौरान उन्होंने गडिसर झील और जैसलमेर किले के ऊपर से उड़ान भरी और एक टैंक लक्ष्य पर हमला किया।
उन्होंने उड़ान के दौरान दिए अपने संदेश में ‘प्रचंड’ को आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रचंड हेलीकॉप्टर आत्मनिर्भरता का प्रबल प्रतीक है। इस समय मैं जैसलमेर के प्रसिद्ध किले के ऊपर से उड़ान भर रही हूं। मैं देश के वीर बहादुर सैनिकों को अत्यंत गर्व के साथ बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं। आप लोगों को मेरा प्यार भरा नमस्कार… जय हिंद, जय भारत।’’
भाषा पृथ्वी सिम्मी
सिम्मी
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